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पाण्डुलिपि सर्वेक्षण का शुभारंभ 15 फरवरी से; ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत देशव्यापी ऐतिहासिक पहल

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पाण्डुलिपि सर्वेक्षण का शुभारंभ 15 फरवरी से
ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत देशव्यापी ऐतिहासिक पहल
नई दिल्ली।
भारत की प्राचीन ज्ञान–परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा प्रारंभ किए गए ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत पाण्डुलिपि सर्वेक्षण कार्य का औपचारिक शुभारंभ 15 फरवरी 2026 से किया जाएगा।
माननीय संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत के कुशल नेतृत्व में आज नई दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित ज्ञान भारतम् कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में श्री इंद्रजीत सिंह (निदेशक, ज्ञान भारतम् मिशन) ने इस महत्त्वपूर्ण देशव्यापी सर्वेक्षण की आधिकारिक घोषणा की।
इस अवसर पर श्री इंद्रजीत सिंह ने कहा कि यह सर्वेक्षण कार्य भारत के प्रत्येक राज्य और क्षेत्र में फैली हुई दुर्लभ, अप्रकाशित एवं लुप्तप्राय हस्तलिखित पाण्डुलिपियों की पहचान, सूचीकरण एवं संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध होगा। उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण के माध्यम से मंदिरों, मठों, आश्रमों, पुस्तकालयों, निजी संग्रहों एवं पारंपरिक संस्थानों में सुरक्षित पाण्डुलिपियों को राष्ट्रीय अभिलेख में सम्मिलित किया जाएगा।
ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत होने वाला यह सर्वेक्षण न केवल भारतीय ज्ञान परंपरा—जैसे वेद, दर्शन, आयुर्वेद, ज्योतिष, गणित, कला, विज्ञान एवं शास्त्र—को संरक्षित करेगा, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए इसे डिजिटली सुरक्षित एवं सुलभ बनाने की दिशा में भी निर्णायक भूमिका निभाएगा।
कार्यक्रम में यह भी स्पष्ट किया गया कि सर्वेक्षण कार्य में देशभर के क्लस्टर सेंटर्स, शोध संस्थानों एवं विशेषज्ञ विद्वानों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी, जिससे यह अभियान एक जन–आंदोलन का स्वरूप ले सके।
पाण्डुलिपि सर्वेक्षण के इस राष्ट्रीय अभियान को भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक दूरदर्शी और ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है, जो भारत को पुनः विश्वगुरु की भूमिका में स्थापित करने की आधारशिला बनेगा।

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