
कोटा। पिछले कुछ दिनों से राजस्थान रोडवेज में जोधपुर राष्ट्रीय विश्वविद्यालय एवं ओपीजेएस विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्रियों का मामला सुर्खियों में है। कुछ विश्वविद्यालय बिना नियामक संस्थाओं के अनुमोदन के दूरस्थ शिक्षा द्वारा एमबीए जैसे कार्यक्रम चलाते हैं व ऐसी स्थिति में बाद में जाकर उक्त डिग्रियां अमान्य साबित होती हैं।
वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय, कोटा राजस्थान राज्य का एक मात्र दूरस्थ शिक्षा क्षेत्र का सरकारी विश्वविद्यालय है जो वर्तमान में प्रभावी यूजीसी (मुक्त एवं दूरस्थ ज्ञान अर्जन कार्यक्रम और ऑनलाइन कार्यक्रम) विनियम 2020 के अधीन अपने विभिन्न पाठ्यक्रम संचालित करता है। वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय, कोटा को उक्त यूजीसी विनियम, 2020 के अधीन विभिन्न कार्यक्रमों के साथ-साथ एमबीए कार्यक्रम को भी दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से संचालित करने की अनुमति प्राप्त है। विश्वविद्यालय को एमबीए कार्यक्रम चलाने हेतु एआईसीटीई से भी एनओसी प्राप्त है। विश्वविद्यालय का एमबीए कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप चार सेमीस्टर का दो वर्षीय कार्यक्रम है, जिसमें वर्तमान में जुलाई 2025 सत्र के प्रवेश चालू है।
कुलगुरु पद का अतिरिक्त दायित्व ग्रहण करने के बाद कुलगुरु प्रो भगवती प्रसाद सारस्वत ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचारों से ओपन विश्वविद्यालय से एमबीए की मान्यता बाबत जो संशय बना हुआ है वह पूर्णतया गलत है। उन्होने बताया कि मान्यता प्राप्त खुला विश्वविद्यालय से दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से एमबीए कर सकते हैं एवं वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय, कोटा द्वारा संचालित एमबीए की डिग्री यूजीसी एवं एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त है और वह पूर्णत: वैध है ।













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