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हर्षाेल्लास के साथ नानीबाई रो मायरो सम्पन्न

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बीकानेर।करूण भक्ति एवं समर्पण भाव पर आधारित नानीबाई रो मायरो कथा के समापन अवसर पर व्यास पीठासीन कथा वाचक श्री उत्कृष्ट महाराज ने बताया कि करूण प्रार्थना सुनकर द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण परिवार सहित नानीबाई के ससुराल पधारने पर नानीबाई की प्रसन्नता का भाव देखने योग्य थे। जिसके भाई स्वयं भगवान हो उसका मायरा तो देखने लायक ही था।
नरसी के लिए 56 करोड़ का मायरा भरने आए सांवल सेठ से नानी बाई के ससुराल पक्ष द्वारा संदेह करते हुए भगवान से प्रश्नों के उत्तर में भगवान द्वारा यह कहना कि ‘नरसी मेरे पुराने सेठ व अन्नदाता हैं, यह धन संपत्ति तो क्या, मैं इनके लिए स्वयं बिकने को भी तैयार हूँ। भगवान कि शरणागत वत्सलता पर गदगद कंठ होते हुए महाराज ने कहा कि ‘भगवान भक्त के अधिन है’, और भक्त भगवान के। नरसी कहते है कि मेरे गोपाल पर भरोसा तो कर के देखो, सब कुछ संभव हो जाएगा।
नानीबाई को सांवल सेठ द्वारा चुनरी ओढ़ाते हुए पूरे अंजार नगर को मायरा पहराया गया। इस अवसर पर पारम्परिक विवाह गीत ‘बीरा रमक झमक होय आया, नौ मण मिश्री, मायरे री बेला आई गाकर सभी भक्तजन भावविभोर होकर नृत्य करने लगे।
कथा प्रसंगानुसार भर दे मायरो, सांवरियो भात भरण ने आवियो, ओढ़ो ओढ़ो नी बाई, लाया है चुनड़ भाई आदि भजनों के गायन से श्रीमती सरस्वती आचार्य, संगीतकार लालजी वैरागी कथा प्रसंगों को साकार कर दिया। कान्हा पुरोहित ने तबला एवं नवीन पारीक ने ओक्टोपैड संगत पर दर्शक श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के अंत में महिला मण्डल के सभी सदस्यों ने श्रोतागण एवं सम्मानिय लोगों का आभार व्यक्त किया।

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