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प्रेमचंद की कहानियों पर संगोष्ठी..

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बीकानेर।अजित फाउण्डेशन द्वारा आयोजित ‘हथाई’ कार्यक्रम के तहत प्रेमचंद की कहानियांे पर संगोष्ठि में शिक्षाविद् आनन्द पुरोहित ने कहा कि प्रेमचंद की कहानियों को तीन भागों में विभक्त किया जा सकता है। प्रेमचंद ने आदर्शवाद, आदर्शवाद एवं यर्थाथवाद तथा पूर्वतया यर्थाथवाद पर कहानियों की रचना की। आनन्द पुरोहित ने बताया कि प्रेमचंद जब साहित्य लिख रहे थे उस काल में देष में आजादी का संघर्ष चल रहा था, कारण उनकी कहानियों में देशभक्ति भी हमें देखने को मिली।
शिक्षक सुरेश पुराहित ने बताया कि प्रेमचंद की कहानियों में नैतिकता का प्रभाव देखने को हमें मिलता है, उन्होंने स्त्रीविमर्श पर भी अपनी कलम चलाई जिससे समाज में काफी बदलाव देखने को मिला। युवा शिक्षक प्रेमकुमार मेघवाल ने बताया कि प्रेमचंद ने समाज में जिस प्रकार का वातारण देखा उनको अपनी कहानियों के माध्यम से जन-जन तक पहुचांने का कार्य किया।
कार्यक्रम में प्रतीक ने प्रेमचंद की ईदगाह कहानी पर अपनी बात रखते हुए कहा कि लेखक ने सभी वर्गों पर समाज के सभी तबकों के बारे में मुखरित होकर लिखा। जिससे बच्चों में किशोरों में भी प्रेरणा जागृत होती है।
अर्पिता स्वामी ने नमक का दरोगा कहानी पर अपनी बात रखते हुए कहा कि प्रेमचंद ने पिता-पुत्र के भ्रष्टाचार को लेकर आपसी संवाद को बेहद उम्दा ढ़ंग से प्रस्तुत किया है। तथा कहानी में कई मोड़ देकर कहानी का अंत बेहद सुखद किया।
इसी क्रम में तनिषा सुथार ने कफन कहानी में स्त्री विमर्श एवं समाज में व्याप्त विसंगतियों के बारे में मुखरित होकर लिखा गया है।
युवा साहित्यकार आनन्द पुरोहित ने कहा कि हमें प्रेमचंद की कहानियों के साथ-साथ उनकी आलाचनात्मक टिप्पणियां भी पढ़नी चाहिए जिससे लेखक के सभी सदंर्भो के बारे में जानकारी प्राप्त हो सके।
कार्यक्रम के आरम्भ में संस्था समन्वयक संजय श्रीमाली ने बताया कि संस्था द्वारा युवाओं को साहित्यक एवं पठन-पाठन के प्रति रूचि जागृत करने हेतु हथाई जैसे कार्यक्रम आरम्भ किए गए। जिससे युवा प्रतिमाह किसी न किसी लेखक के रचनासंसार के बारे में पढ़ेगे तथा अपनी बात रखेंगे तो उनमें पुस्तकों के प्रति रूचि बढ़ेगी।
कार्यक्रम के अंत में कल्पिष शर्मा ने संस्था की तरफ से सभी का आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया।

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