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अद्भुत आनन्द से सराबोर आनापान सति ध्यान का अनुभव कर स्टूडेंट्स एवं टीचर्स हुए प्रफुल्लित

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डॉ. विजय बोथरा जैसे चिकित्सक की आज भी महती आवश्यकता

गंगाशहर। गोपेश्वर बस्ती स्थित श्री गोपेश्वर विद्यापीठ सैकेंडरी स्कूल में जन चिकित्सक स्वर्गीय डॉ. विजय बोथरा की जयंती पर आनापान सति ध्यान कार्यक्रम का विशेष आयोजन किया गया। स्व. डॉ. बोथरा की पुत्रवधू एवं समाजसेविका श्रीमती श्रुति बोथरा के मुख्य आतिथ्य में आयोजित इस अभिनव आयोजन में पिरामिड स्प्रीचुअल सोसाइटी मूवमेंट की श्रीमती शीलू करनाणी, अहमदाबाद एवं श्रीमती मेनका बागड़ी, बैंगलोर ने ध्यान का महत्व बताते हुए सभागार में उपस्थित सभी विद्यार्थियों एवं टीचर्स को ध्यान सागर में अद्भुत आनन्द के गोते लगवाए। अपने संबोधन में शीलू करनाणी ने कहा कि जब तक सांस है हम शिव हैं और जब सांस का साथ नहीं रहता तो शव हो जाते हैं, इसलिए श्वास हेतु पूरे अवचेतन मन से जागरूकता की महती आवश्यकता है। यदि हम श्वास के प्रति जागरूक हो जाते हैं तो ब्रहांड की शक्तियों के प्रति भी जागरूक हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि श्वास ही एकमात्र ऐसा है जो प्रतिपल चलता रहता है। इसलिए सदैव हमें श्वास के प्रति पूरा अवेयरनेस रखना जरूरी है। उन्होंने इस मौके पर पिरामिड का महत्व भी उजागर किया और कहा कि हर घर पर पिरामिडनुमा आकृति होनी चाहिए। इस मौके पर श्रीमती मेनका बागड़ी ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने अध्ययन से पहले 10 मिनिट का ध्यान अवश्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिसकी जितनी उम्र है, उसी के मुताबिक दैनिक ध्यान करने वाले व्यक्ति नित्य सुस्वस्थ एवं तनाव रहित रहते हैं। ऐसे व्यक्तियों की मेमोरी शार्प होती है। शाला समन्वयक गिरिराज खैरीवाल ने पिरामिड स्प्रीचुअल सोसाइटी मूवमेंट के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस सोसाइटी के माध्यम से लगभग दोसौ देशों में ध्यान हेतु लोगों को जागरूक करने का महती प्रयास किया जा रहा है। इन प्रयासों के बहुत पॉजीटिव रिजल्ट आ रहे हैं। खैरीवाल ने बताया कि श्रीमती शीलू करनाणी एवं श्रीमती मेनका बागड़ी ब्रह्मऋषि सुभाष पत्री द्वारा स्थापित इस विशेष “आनापान सति ध्यान” का गत 5 वर्षों से अधिक समय से व्यापक प्रचार प्रसार कर रहे हैं। दोंनो ही रोजाना लगभग 5 – 5 पूर्णतः निशुल्क आनलाइन सेशन ध्यान के प्रतिदिन ले रही हैं। साथ ही विभिन्न शिक्षण संस्थाओं, अन्य संस्थानों में भी निरन्तर ये जाते हैं और इस ध्यान से लोगों को जोड़ने का विशेष काम करते हैं। खैरीवाल ने अपने संबोधन में डॉ. विजय बोथरा के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंग प्रस्तुत करते हुए उन्हें जन चिकित्सक बताया तथा कहा कि वैसे डॉक्टर आज तक दूसरा नहीं आया है जबकि उनके जैसे डॉक्टर्स की आज बहुत अधिक आवश्यकता है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित करते हुए समाजसेवी श्रीमती श्रुति बोथरा ने कहा कि स्व. डॉ. विजय बोथरा की जयंती पर श्री गोपेश्वर विद्यापीठ द्वारा हर वर्ष नवाचार किए जाते रहते हैं। उन्होंने स्वयं ने ध्यान किया और उन्हें हुई फिलिंग्स को सहर्ष शेयर किया। श्रुति बोथरा ने डॉ. बोथरा जी के सामाजिक कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्हें महान शख्सियत बताया तथा पूरे गर्व के साथ कहा कि भले ही वे आज इस संसार में नहीं हैं, लेकिन उनकी प्रेरणाएं सदैव हमें अच्छे मार्ग पर अग्रसर होने के लिए प्रेरित करती रहती हैं। श्रीमती बोथरा ने स्टूडेंट्स से कहा कि आप एक अच्छे प्रोफेशनल बनें या न बनें, अच्छी जॉब करें या ना करें लेकिन एक अच्छा इन्सान बनना बहुत आवश्यक है। अच्छे इन्सान के रूप में डॉ. विजय बोथरा को बीकानेर के लोग रोज याद करते हैं। इसलिए सदैव अच्छाई और नेकनीयत से अपने जीवन को संजोएं। इस अवसर पर शाला प्रधान भंवरी देवी ने श्रीमती शीलू करनाणी, श्रीमती मेनका बागड़ी एवं श्रीमती श्रुति बोथरा को शॉल भेंट कर उनका स्वागत किया।
टाटा बिल्डिंग इण्डिया कंपनी द्वारा पिछले शनिवार को आयोजित हुई निबंध प्रतियोगिता “मेरे पांच संकल्प” के विजेता विद्यार्थियों को इस मौके पर मेडल पहनाकर पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं डॉ. विजय बोथरा की तस्वीरों पर माल्यार्पण एवं अगरबत्ती प्रज्ज्वलन कर हुआ। शाला प्रभारी मनोज सिंगला ने आभार व्यक्त किया।

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