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‘उन्मेष: अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव’ का तीसरा संस्करण पटना में

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‘उन्मेष: अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव’ का तीसरा संस्करण पटना में

साहित्य अकादेमी द्वारा संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार और बिहार सरकार के सहयोग से 25 सितंबर से होगा चार दिवसीय आयोजन

90 सत्रों में देश विदेश के 550 लेखक होंगे शामिल

100 भाषाओं का होगा प्रतिनिधित्व

नई दिल्ली, 10 सितंबर 2025; ‘उन्मेष’ अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव के तीसरे संस्करण का आयोजन इस बार पटना में 25 से 28 सितंबर 2025 के बीच सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर में होगा। इस उत्सव का आयोजन भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय एवं साहित्य अकादेमी द्वारा संयुक्त रूप से बिहार सरकार के सहयोग से किया जा रहा है। यह जानकारी आज इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र में आयोजित प्रेस सम्मेलन में संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल ने दी। उन्होंने संस्कृति मंत्रालय द्वारा विज्ञान भवन में 11-13 सितंबर 2025 को आयोजित की जा रही अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के बारे में विस्तार से बताया जो कि ‘ज्ञान भारतम्’ के तहत पांडुलिपि धरोहर के माध्यम से भारत की ज्ञान विरासत को पुनः प्राप्त करने की योजना है। प्रेस सम्मेलन में संस्कृति मंत्रालय की अपर सचिव श्रीमती अमिता प्रसाद सरभाई, इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी एवं साहित्य अकादेमी के सचिव डॉ. के. श्रीनिवासराव भी उपस्थित थे।
‘उन्मेष’ प्रतिभागियों की संख्या के आधार पर एशिया का सबसे बड़ा साहित्य उत्सव है तथा भारत का सबसे समावेशी साहित्यिक समारोह भी। इस बार के आयोजन में देश-विदेश से लगभग 550 प्रतिष्ठित लेखक, कवि, विद्वान, अनुवादक, प्रकाशक तथा विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी हुई जानी-मानी हस्तियाँ लगभग 90 सत्रों में भाग लेंगी और लगभग 100 भाषाओं का प्रतिनिधित्व करेंगी। इसके अतिरिक्त, 12 अन्य देशों के लेखक भी इस उत्सव में सहभागिता करेंगे। ज्ञात हो कि पिछले दो उत्सव क्रमशः 2022 में शिमला तथा 2023 में भोपाल में आयोजित किए गए थे।
वर्तमान समय की श्रेष्ठ प्रतिभाओं की उपस्थिति वाले इस उत्सव में बिहार के माननीय राज्यपाल श्री आरिफ़ मोहम्मद खान, श्री अमोल पालेकर, श्री जावेद अख़्तर, श्री गिरीश कासरवल्ली, सुश्री सोनल मानसिंह सहित भारत में पदस्थ कुछ देशों के राजदूत सहित अनेक विशिष्ट व्यक्तित्वों की सहभागिता संभावित है।
कविता एवं कहानी पाठ के अतिरिक्त उत्सव के कुछ महत्त्वपूर्ण सत्र हैं- साहित्य और अन्य कलाओं की साझी दुनिया, उत्तर-आधुनिक भारतीय साहित्य और सिनेमा, सोशल मीडिया एवं साहित्य, प्रवासन तथा आदिवासी समुदायों की पहचान का संकट, विदेशी भाषाओं में भारतीय साहित्य का प्रचार-प्रसार, सौंदर्यपरक भारतीय संवेदनाएँ और भारतीय फिल्में, बिहार की साहित्यिक विरासत, राष्ट्रीय शिक्षा नीति में साहित्य की भूमिका, भारतीय नाटकों में प्रवासन एवं विस्थापन आदि।
उत्सव में शामिल हो रहे कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण लेखक, विद्वान एवं कलाकार हैं – नवतेज सरना, प्रतिभा राय, अरुण कमल, विश्वास पाटील, जेरी पिंटो, विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, कपिल कपूर, उदय नारायण सिंह, अनीसुर रहमान, सुबोध सरकार, शीन काफ़ निज़ाम, हरिवंश, भरत गुप्त, रामवचन राय, लक्ष्मण गायकवाड, अनामिका, ममंग दई, वामन केंद्रे, भानु भारती, एम.के. रैणा, शरण कुमार लिंबाले, हृषीकेश सुलभ, महादेव टोप्पो, होशांग मर्चेंट, कांजी पटेल, एच.एस. शिवप्रकाश, अभिराज राजेंद्र मिश्र, हरप्रसाद दास, अशोक चक्रधर, पी. शिवकामी, लिलिट दुबे, मालिनी अवस्थी आदि।
प्रतिदिन शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें ग्रेमी पुरस्कार से पृरस्कृत संगीतज्ञ रिकी केज़ की लाइव प्रस्तुति के साथ ही राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, संगीत नाटक अकादेमी एवं पूर्वी क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र की प्रस्तुतियाँ शामिल हैं।

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