बीकानेर स्थापना दिवस : तीन दिन तक संस्कृति, संवाद और सम्मान का संगम

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17, 18 और 19 अप्रैल को होंगे विविध आयोजन | लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड और 25 विभूतियों का सम्मान

बीकानेर // नगर स्थापना दिवस इस बार नए अंदाज और व्यापक स्वरूप में 17, 18 और 19 अप्रैल को मनाया जाएगा। बीकानेर नगर स्थापना दिवस समारोह समिति और नंदलाल जोशी चैरिटेबल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय कार्यक्रम की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। समिति के अध्यक्ष के रूप में संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा होंगे

यह तीन दिवसीय उत्सव बीकानेर की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और प्रगतिशील स्वरूप को नई पहचान देगा तथा शहर में एकता और गौरव की भावना को और मजबूत करेगा।

कार्यक्रम संयोजक रविन्द्र हर्ष ने बताया कि इस वर्ष आयोजन को खास बनाने के लिए शहर के 100 से अधिक युवा कलाकारों को जोड़ा गया है, जो अपनी कला से बीकानेर को विशेष रंगों में सजाएंगे। उन्होंने कहा कि यह आयोजन युवाओं की भागीदारी और शहर की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई देगा।

सहसंयोजक अनिल जोशी के अनुसार “बीकानेर के बढ़ते कदम” विषय पर आयोजित विशेष परिचर्चा में शहर के विकास, चुनौतियों और संभावनाओं पर गंभीर चर्चा की जाएगी, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के बुद्धिजीवी भाग लेंगे।

वहीं सहसंयोजक ज्योति प्रकाश रंगा ने बताया कि “फिर गूंजेगा बीकानेर” सांस्कृतिक संध्या इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण होगी। इस मंच पर स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा, साथ ही बीकानेर यूथ आइकॉन अवार्ड के माध्यम से प्रतिभाशाली युवाओं को सम्मानित किया जाएगा।

आयोजन के तहत पांच विशिष्ट व्यक्तियों को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया जाएगा, वहीं नगर की 25 विभूतियों का सम्मान किया जाएगा। इस सम्मान समारोह में बीकानेर के उन प्रतिभाशाली युवाओं को भी सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने प्रशासन, शिक्षा, खेल, साहित्य व आईटी के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर शहर का नाम गौरवान्वित किया है।

इसके अलावा रंगोली प्रतियोगिता, नागरिक अभिनंदन और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कई कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

इस अवसर पर आयोजन समिति का भी गठन किया गया है, जिसमें अध्यक्ष विश्राम मीणा के साथ सरजू दास जी महाराज, द्वारका प्रसाद पचीसिया, गणेश बोथरा, ज्ञान गोस्वामी, निर्मल कामरा, श्याम सुंदर सोनी और भूपेंद्र मिड्डा शामिल हैं।

यह आयोजन न केवल उत्सव का अवसर होगा, बल्कि बीकानेर की सांस्कृतिक विरासत, युवा शक्ति और सामाजिक एकजुटता का जीवंत प्रतीक भी बनेगा।

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