
बीकानेर।गंगाशहर में वर्षीतप करने वाले तपस्वीजनों व भक्तामर मण्डल के सदस्यों ने सामूहिक रूप से गुरु-दर्शन हेतु लाडनूं पहुंच कर आचार्य श्री महाश्रमण जी से आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर जतनलाल दूगड़ ने गुरुदेव को निवेदन करते हुए बताया कि गंगाशहर में इस वर्ष उल्लेखनीय तपस्याएं हुई हैं। दूगड़ ने कहा कि वर्तमान में श्रावक-श्राविकाओं के पुरुषों में 5 व महिलाओं के 40 यानि कुल 45 वर्षीतप जारी हैं। दूगड़ ने आचार्य प्रवर के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कहा कि आपकी अनुकम्पा से पिछले वर्ष मुनिश्री कमलकुमार जी का गंगाशहर प्रवास बहुत सार्थक रहा। इससे क्षेत्र में तपस्याओं व जप, तप आदि अनेक विशिष्ट धार्मिक अभिक्रम व अनुष्ठान क्षेत्र में अब भी जारी हैं। गंगाशहर में इतने वर्षीतप व अन्य अनेक तपस्याओं के साथ ही उनकी प्रेरणा से तपस्याओं की अनुमोदना में तथा अन्य सामाजिक मांगलिक अवसरों पर भक्तामर अनुष्ठान के लिए एक समूह बनाया गया है। इस समूह के माध्यम से नवम्बर से अब तक सामायिक की उपासना सहित 40 से अधिक भक्तामर अनुष्ठान हो चुके हैं। प्रतिदिन उपवास की बारी, प्रत्येक रविवार नमस्कार महामंत्र का जाप, प्रत्येक मंगलवार भिक्षु भजन संध्या, प्रतिदिन प्रातःकालीन उपासना व सायंकालीन प्रतिक्रमण आदि अभिक्रम भी जारी है।
आचार्य प्रवर ने आशीर्वचन व प्रेरणा प्रदान करते हुए फरमाया कि तपस्या व स्वाध्याय आदि भगवान द्वारा बताए गए मोक्ष का मार्गों में एक मार्ग है। वर्षीतप आदि दीर्घकालीन तपस्या बहुत महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही माला, जप, संयम व अन्य प्रत्याखान करना और श्रेयस्कर है।
इस अवसर पर उपस्थित महिला साधिकाओं ने ओजस्वी स्वर में सामूहिक सुमधुर गीत का संगान भी किया।
तपस्वीजनों व साधकों ने इस अवसर पर मुख्यमुनि महावीर मुनि, साध्वीप्रमुखा श्री विश्रुतविभा जी व साध्वीवर्या श्री संबुद्धयशा जी सहित अन्य चारित्रात्माओं के दर्शन-सेवा कर कृतार्थता की अनुभूति की।
लाडनूं में आवास आदि सुविधाएं नवनिर्मित बीकानेर भवन के मैत्री सदनम् में आचार्य तुलसी शान्ति प्रतिष्ठान परिसर में उपलब्ध करवाई गई। इस धर्म-यात्रा की सभी अनुकूल व्यवस्थाओं में किशनलाल बैद, हनुमानमल सेठिया आदि का विशेष सहयोग रहा।












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