स्थानीय प्रयासों से जैव विविधता पर वैश्विक प्रभाव…

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बीकानेर।महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय बीकानेर एवं राजस्थान राज्य जैव विविधता मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आज दिनांक 22-05-2026 को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर जैव विविधता पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जागरूकता कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के आप-पास के गांव नाल बडी, नोखा दहिया,नापासर, किल्चू, कल्याणसर, उदासर, कोटडी, स्वरूपदेसर आदि गांवा के निवासियों को सम्मिलित किया गया । 
    कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित ने उपस्थित ग्रामीणों से जैव विविधता के संरक्षण हेतु सामूहिक साझेदारी की बात रखी। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि चूहे,टिड्डी, तितली और कीट पंतगों के साथ-साथ रेगीस्तानी पशु और वृक्षों की महत्वतता को समझाते हुए उन्हे रेगीस्तान की पहचान बताया। उन्होंने जैव विधिधता के साथ मानवीय गतिविधियों के नकारात्मक रूप की निन्दा की। कुलगुरु ने जंगलों के यथावत रहने देने को वास्तविक विकास कहा। कुलुगरु ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में भी जैव विविधता पार्क बनाया गया है जिसमें परिसर में रहने वाले वन्य जीवों के लिए जल की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। 
    कार्यक्रम का शुभारम्भ मां सरस्वती की वन्दना के साथ हुआ। कार्यक्रम का आयोजन सचिव डाॅ. लीला कौर ने मंच संचालन करते हुए वैश्विक प्रभाव के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य का परिचय देते हुए उसके महत्व पर प्रकाश डाला। 

विभागाध्यक्ष पर्यावरण प्रो. अनिल कुमार छंगाणी ने कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित, वित्त नियंत्रक श्री देवेन्द्र सिंह राठौड एवं शुष्क बागवानी केन्द्र से पधारे विभागाध्यक्ष प्रोफेसर धूरेन्द्र सिंह का स्वागत करते हुए विद्यार्थियों एवं उपस्थित ग्रामीणों को थार मरूस्थल की जैव विविधता एवं इसके संरक्षण विषय पर प्रजेटेंशन प्रस्तुत किया। प्रस्तुतीकरण में प्रो. छंगाणी ने जलवायु परिवर्तन, रेगीस्तानी संकटग्रस्त पशु व पादपों के साथ जल संरक्षण की तकनीकों व खेती के बदलते हुए पहलुओं पर गा्रमीणों के साथ अपने विचार एवं अनुभव साझा करते हुए उन्हें प्रेरणा दी। शुष्क बागवानी केन्द्र के विभागाध्यक्ष प्रो. धूरेन्द्र सिंह ने विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों को जलवायु व फसलों की विविधता के बारे में समझाया। उन्होेंने फसल उत्पादन हेतु विविध तकनीकों की महत्वतता एवं प्रभाव के बारे में विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों का जानकारी दी।
वन विभाग से पधारे जिला वन अधिकारी श्री संदीप कुमार छलाणी एवं सहायक वन संरक्षक डाॅ. पूजा पंचारिया द्वारा पेटेंट, बाॅयोडाइवर्सिटी रजिस्टर तथा बाॅयोपाइरेसी जैसे मुख्य बिन्दुओं से ग्रामीणों एवं विद्यार्थियों को अवगत कराया एवं ग्रामीणों द्वारा भी अपने विचार साझा किए गए। समापन समारोह में विश्वविद्यालय प्रोफेसर राजाराम चोयल ने जैव विविधता की निगरानी हेतु पर्यावरण सहायक पद को महत्वपूर्ण बताया और वन विभाग को इस संदर्भ में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की अपील की। कार्यक्रम के आयोजन में शोधार्थी प्रियंका जांगिड, प्रमिला सोलंकी, जयकिशन छंगाणी एवं विद्यार्थी ज्योति जोशी, प्रियव्रत पाण्डे, रोहित, श्वेता, मानसी अनिल पूनिया और सुनील पूनियां ने अपना महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक डाॅ. सीमा शर्मा, डाॅ. प्रगति सोबती, डाॅ. संतोष कंवर शेखावत, डाॅ. गौतम मेघवंशी, डाॅ. धर्मेश हरवानी, डाॅ. अभिषेक वशिष्ठ, अमरेश कुमार सिंह उप कुलसचिव डाॅ. प्रकाश सारण, सहायक कुलसचिव डाॅ. सुरेन्द्र गोदारा एवं कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री कृष्ण जाट एवं महासचिव सुभाष उपस्थित रहे। राजस्थानी के अतिथि शिक्षक रामोवतार उपाध्याय ने जैव विविधता विषय पर कविता वाचन राजस्थानी भाषा में किया।

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