जयपुर : BVG कंपनी से 276 करोड़ के भुगतान बदले 20 करोड़ की डील के वीडियो मामले में ACB ने प्रकरण दर्ज किया है. जिसमें RSS के क्षेत्र प्रचारक निम्बाराम का नाम का भी उल्लेख है, लेकिन RSS ने इसे गलत बताते हुए कहा कि BVG इंडिया लिमिटेड कंपनी के प्रतिनिधि निम्बाराम (Nimbaram) के पास प्रताप गौरव केंद्र, उदयपुर में अपने CSR फण्ड द्वारा सहयोग करने का प्रस्ताव लेकर आये थे.
निम्बाराम ने उनसे आग्रह किया था कि वे इस केंद्र का स्वयं दौरा करें और वहां की आवश्यकताओं को समझे और यदि उचित लगे तो इसमें सहयोग देने का तय करें. कंपनी के प्रतिनिधियो से इस केंद्र पर जाकर देखने का आग्रह किया था. कंपनी के प्रतिनिधियों ने दौरे की तारीख तय की, लेकिन वहां पर गये ही नहीं. इसलिए सीएसआर फण्ड से किसी राशि या अन्य किसी भी रूप में सहायता का प्रश्न ही नहीं उठता.
बीवीजी कंपनी (BVG company) के साथ 20 करोड़ रुपए के लेनदेन के कथित वीडियो में आरएसएस (RSS) के क्षेत्र प्रचारक निम्बाराम को आरोपी बनाया है. इसे लेकर आरएसएस की ओर से बयान जारी किया गया है. आरएसएस के क्षेत्र कार्यवाह हनुमान सिंह राठौड़ ने कहा कि वीडियो तथ्यों के विपरीत है और सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए जारी किया गया है. निम्बाराम हर तरह की जांच में सहयोग को तैयार हैं. राठौड़ ने साफ किया कि वैचारिक द्वेष और दुर्भावना से जारी किए गए इन आरोपों का हम खंडन करते हैं और कानून सम्मत कार्रवाई करने के सभी प्रकार के विकल्प हमारे सामने खुले हुए हैं.
राठौड़ ने कहा कि बीवीजी इंडिया लिमिटेड कंपनी के प्रतिनिधि निम्बाराम के पास प्रताप गौरव केंद्र, उदयपुर में अपने सीएसआर फण्ड द्वारा सहयोग करने का प्रस्ताव लेकर आये थे. निम्बाराम ने उनसे आग्रह किया था कि वे इस केंद्र का स्वयं दौरा करें और वहां की आवश्यकताओं को समझ कर यदि उचित लगे तो इसमें सहयोग देने का तय करें. कंपनी के प्रतिनिधियों ने दौरे की तिथि तय की, लेकिन वहां पर गए ही नहीं, इसलिए सीएसआर फण्ड से किसी राशि या अन्य किसी भी रूप में सहायता का प्रश्न ही नहीं उठता.
आरएसएस के क्षेत्र कार्यवाह हनुमान सिंह राठौड़ ने कहा कि 20 अप्रैल को निम्बाराम से कंपनी के प्रतिनिधियों की भेंट या बातचीत सामान्य सामाजिक शिष्टाचार के नाते ही थी. उनकी इस सामान्य शिष्टाचार भेंट को आरएसएस में उनकी भूमिका से जोड़ना निंदनीय है. अलग-अलग समय और सन्दर्भ में की गयी बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग कर, उन्हें जोड़कर राजनीतिक कारणो से उसके अन्य अर्थ लगाए जा रहें हैं. राजनीतिक निहित स्वार्थों ने तथ्यों को तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया है, जबकि इस मामले में किसी प्रकार की राशि का कोई आदान प्रदान नहीं हुआ है. इसलिए इसे भ्रष्टाचार से जोड़कर अनर्गल आरोप लगाना समाज में प्रतिष्ठित व्यक्ति के चरित्र हनन के सामान है. वैचारिक द्वेष एवं दुर्भावना से लगाए जा रहे इन झूठे आरोपों एवं लांछनों का हम खंडन करते हैं और कानून सम्मत कार्यवाही करने के सभी प्रकार के विकल्प हमारे सामने खुले हुए हैं.










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