BY DEFENCE JOURNALIST SAHIL | T.I.N. NETWORK
Range-Level Seminar on Forensic Science Enhances Police Investigation Skills in Bikaner
Bikaner, Rajasthan —
A comprehensive range-level seminar on “Forensic Science Laboratory” was organized on 12 August 2025 under the chairmanship of Hemant Sharma, Inspector General of Police, Bikaner Range. The seminar aimed to strengthen the scientific approach of police officials towards crime investigation and evidence collection in an era where technology-driven crime-solving has become a necessity.
The event brought together police officers from across districts under the Bikaner Range — from Assistant Sub-Inspector (ASI) to Additional Superintendent of Police (Addl. SP) — to receive in-depth training from forensic science experts. The focus was not merely on theoretical lectures but on practical, real-world applications of forensic techniques in modern policing.
Key Technical Areas Covered
During the seminar, specialists from the Forensic Science Laboratory (FSL) presented detailed sessions on:
- Scientific inspection of crime scenes and evidence gathering methods.
- Scientific analysis of crimes, including laboratory testing, material identification, and forensic profiling.
- Utilization of advanced tools and innovations such as DNA profiling, digital forensics, ballistic analysis, and cybercrime investigation technology.
- Courtroom evidence presentation, emphasizing protocols for ensuring the admissibility of scientific evidence in judicial proceedings.
IGP Hemant Sharma’s Address
In his keynote speech, IGP Hemant Sharma highlighted the urgent need for science-based investigation in the present-day law enforcement framework.
“In today’s era, conducting investigations using scientific methods is not just an advantage but a necessity. The assistance of forensic science laboratories makes the investigation process more accurate, effective, and just,” he said.
He stressed that meticulous evidence collection and preservation can make the difference between conviction and acquittal in critical cases, especially in crimes involving terrorism, narcotics, cyber threats, and organized criminal networks.
Empowering Officers for Modern Policing
The seminar was designed to bridge the gap between traditional policing and modern forensic science. Hands-on demonstrations, mock crime scene inspections, and interactive Q&A sessions allowed officers to understand how to translate lab findings into actionable leads during investigations.
Participants noted that such training not only boosts technical proficiency but also enhances coordination between field officers and forensic experts, ensuring that cases are built on irrefutable scientific foundations.
By the conclusion of the seminar, it was evident that the initiative had elevated investigative capabilities across the Bikaner Range. Officers returned to their respective districts with upgraded knowledge and renewed confidence in applying forensic science for crime prevention and resolution.
बीकानेर रेंज में “विधि विज्ञान प्रयोगशाला” पर रेंज स्तरीय सेमिनार – अपराध अनुसंधान में वैज्ञानिक दक्षता बढ़ी
बीकानेर, राजस्थान —
बीकानेर रेंज पुलिस महानिरीक्षक श्री हेमन्त शर्मा की अध्यक्षता में 12 अगस्त 2025 को “विधि विज्ञान प्रयोगशाला” विषय पर एक व्यापक रेंज स्तरीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य पुलिस अधिकारियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अपराध अनुसंधान और साक्ष्य संकलन की क्षमता को सुदृढ़ करना था।
रेंज अंतर्गत विभिन्न जिलों से सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) से लेकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एडिशनल एसपी) स्तर तक के अधिकारियों ने इसमें भाग लिया। सेमिनार में विधि विज्ञान विशेषज्ञों ने न केवल सैद्धांतिक जानकारी दी, बल्कि व्यावहारिक प्रशिक्षण और तकनीकी प्रदर्शन के माध्यम से आधुनिक पुलिसिंग में फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका को विस्तार से समझाया।
मुख्य बिंदु जिन पर प्रशिक्षण दिया गया
सेमिनार में विशेषज्ञों ने अधिकारियों को निम्न विषयों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया —
- घटनास्थल का वैज्ञानिक निरीक्षण और साक्ष्य संकलन की उन्नत विधियाँ।
- अपराधों के वैज्ञानिक विश्लेषण की प्रक्रिया, जिसमें लैब परीक्षण, सामग्री पहचान और प्रोफाइलिंग शामिल है।
- आधुनिक तकनीकी उपकरणों का उपयोग, जैसे डीएनए प्रोफाइलिंग, डिजिटल फॉरेंसिक, बैलिस्टिक विश्लेषण और साइबर अपराध जांच तकनीक।
- न्यायालय में साक्ष्यों की प्रस्तुति, जिसमें यह सुनिश्चित करने की प्रक्रिया कि साक्ष्य न्यायिक रूप से स्वीकार्य हों।
आईजीपी हेमन्त शर्मा का संबोधन
अपने संबोधन में श्री हेमन्त शर्मा ने कहा —
“आज के समय में वैज्ञानिक तरीकों से जांच करना समय की मांग है। विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं की मदद से जांच प्रक्रिया अधिक सटीक, प्रभावी और न्यायसंगत बनती है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि सटीक साक्ष्य संकलन और संरक्षण से ही गंभीर मामलों में दोषसिद्धि सुनिश्चित की जा सकती है, विशेषकर आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी, साइबर अपराध और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में।
आधुनिक पुलिसिंग की दिशा में बड़ा कदम
यह सेमिनार पारंपरिक पुलिसिंग और आधुनिक विधि विज्ञान के बीच तकनीकी समन्वय का सेतु साबित हुआ। मॉक क्राइम सीन निरीक्षण, हाथों-हाथ प्रशिक्षण और सवाल-जवाब सत्रों ने अधिकारियों को यह समझने में मदद की कि लैब रिपोर्ट को कैसे जांच के ठोस सुराग में बदला जाए।
अधिकारियों ने माना कि इस तरह का प्रशिक्षण तकनीकी दक्षता के साथ-साथ मैदान में काम करने वाले पुलिसकर्मियों और विधि विज्ञान विशेषज्ञों के बीच तालमेल को भी मजबूत करता है।
अंत में यह सेमिनार बीकानेर रेंज के अधिकारियों के लिए आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों से अपराध निवारण और जांच की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हुआ।







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