सेहतनामा- बर्ड फ्लू का नया स्ट्रेन मचा सकता है तबाही:WHO ने कन्फर्म किया भारत में दूसरा केस, नहीं बनी है कोई वैक्सीन

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत में एवियन इन्फ्लूएंजा (H9N2) का दूसरा केस कन्फर्म किया है। एवियन इन्फ्लूएंजा को बर्ड फ्लू के नाम से भी जाना जाता है। पश्चिम बंगाल में एक 4 साल का बच्चा बर्ड फ्लू के इस स्ट्रेन (H9N2) से पीड़ित था, जिसे अभी अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। इससे पहले साल 2019 में भी WHO ने भारत में बर्ड फ्लू H9N2 स्ट्रेन का पहला केस कन्फर्म किया था।
बीते कुछ महीनों से दुनिया के अलग-अलग देशों से बर्ड फ्लू के अलग-अलग वेरिएंट्स सामने आ रहे हैं। अमेरिका, चीन और भारत समेत कई देशों में बर्ड फ्लू के केस मिले हैं।
आमतौर पर यह वायरस पक्षियों या जानवरों में फैलता है। हालांकि, बीते कुछ सालों में इंसानों में भी इसके कई मामले देखने को मिल रहे हैं। बर्ड फ्लू की मृत्यु दर काफी ज्यादा है। हालांकि, नए स्ट्रेन H9N2 से संक्रमित व्यक्तियों के लिए यह बहुत घातक साबित नहीं हुआ है, पर विशेषज्ञ भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
इसलिए आज ‘सेहतनामा’ में बात करेंगे बर्ड फ्लू की। साथ ही जानेंगे कि-
- बर्ड फ्लू के क्या लक्षण होते हैं?
- यह कितनी खतरनाक बीमारी है?
- इससे बचाव के उपाय क्या हैं?
तीन महीने तक चला बच्चे का इलाज
WHO के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में बर्ड फ्लू H9N2 से पीड़ित बच्चे को स्थानीय पीडिएट्रिशियन के पास 26 जनवरी को बुखार और पेट दर्द की शिकायत के बाद दिखाया गया। अगली बार 29 जनवरी को बच्चे को बेहोशी की हालत में अस्पताल ले जाया गया, तब डॉक्टर ने बच्चे को बेहतर इलाज की सलाह दी। फिर 1 फरवरी को बच्चे को सांस लेने में परेशानी हुई तो उसे पीडिएट्रिक आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। वहां तीन महीने तक बच्चे का इलाज चला और अब उसे अस्पताल से छुट्टी मिल गई है।
क्या होता है बर्ड फ्लू?
बर्ड फ्लू इन्फ्लूएंजा वायरस से होने वाला संक्रमण है। यह आमतौर पर पक्षियों और जानवरों में फैलता है। कई बार यह संक्रमित जानवरों के जरिए इंसानों में भी फैल सकता है। बर्ड फ्लू के कई वेरिएंट काफी घातक होते हैं। हालांकि, H9N2 के मामले में बहुत गंभीर समस्याएं देखने को नहीं मिली हैं।
इन्फ्लूएंजा वायरस चार तरह का होता है, इन्फ्लूएंजा A, B, C और D। इनमें से ज्यादातर एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस इंसानों को संक्रमित नहीं करते। हालांकि A (H5N1) और A (H7N9) से इंसानों के संक्रमित होने का खतरा रहता है। अब A (H9N2) नए खतरे के रूप में सामने आया है।
बर्ड फ्लू के लक्षण क्या हैं?
बर्ड फ्लू सबसे अधिक रेस्पिरेटरी सिस्टम को प्रभवित करता है। इसके लक्षण किस तरह नजर आते हैं, आइए ग्राफिक में देखते हैं-
बर्ड फ्लू कैसे फैलता है?
बर्ड फ्लू पक्षियों में पाए जाने वाले इन्फ्लूएंजा वायरस के जरिए फैलता है। अभी तक इंसानों में इसके एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने के मामले सामने नहीं आए हैं। फिर भी एक्सपर्ट्स को डर है कि कभी भी कोई ऐसा म्यूटेंट आ सकता है, जो इंसानों से इंसानों में फैल सकता है।
बर्ड फ्लू कितनी खतरनाक बीमारी है
साल 1997 में हॉन्गकॉन्ग में एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस का इंसानों में पहला केस मिला था। यह H5N1 था और इसका डेथ रेट करीब 60% था यानी इससे प्रभावित 10 में से 6 लोगों की मौत हो रही थी।
क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, बर्ड फ्लू अब तक की बेहद घातक बीमारियों में से एक है। दुनिया में इसका इसका डेथ रेट 50% से ज्यादा है। इसका मतलब है कि बर्ड फ्लू से पीड़ित 10 व्यक्तियों में से 5 की मौत हो जाती है।
बर्ड फ्लू के जिस नए वेरिएंट H9N2 को लेकर हम बात कर रहे हैं, इसकी पक्षियों में मृत्यु दर 65% के करीब है। इंसानों में अभी इसके बहुत मामले देखने को नहीं मिले हैं। जो मामले मिले हैं, उनमें यह ज्यादा घातक साबित नहीं हुआ है।
क्या हैं बर्ड फ्लू के रिस्क फैक्टर्स?
इंफ्लूएंजा वायरस कई दिनों तक जीवित रह सकता है। H9N2 से संक्रमित पक्षी 10 दिनों तक मल और लार के जरिए वायरस फैला सकते हैं। इन्फेक्टेड सर्फेस को छूने से भी संक्रमण फैल सकता है।
बर्ड फ्लू से बचने के लिए किस तरह की सावधानियां बरत सकते हैं?
पक्षियों और जानवरों का टीकाकरण अवश्य करवाएं। इससे इन्हें बर्ड फ्लू होने का खतरा बेहद कम हो जाता है।
इसके अलावा हम खुद भी कुछ टिप्स अपना सकते हैं। पहले इसे ग्राफिक में देखते हैं, फिर विस्तार से समझेंगे-
- बर्ड फ्लू के जोखिम से बचने के लिए वन्यजीव क्षेत्र, पक्षी विहार आदि में जाना अवॉइड कर सकते हैं।
- अगर ऐसे किसी क्षेत्र में गए हैं तो मास्क या कपड़े से मुंह को ढंककर जाएं। वहां सर्फेस को न छुएं।
- घर लौटने से पहले अपने हाथ, पैर, मुंह को अच्छे से धो लें। सैनेटाइजर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
- H9N2 संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए पोल्ट्री फार्म में काम करते समय ग्लव्स, पूरे बाजू के कपड़े और मास्क जरूर पहनें।
- ग्लव्स उतारने के बाद हाथों को अच्छे से सैनेटाइज करें। अगर सैनेटाइजर नहीं है तो साबुन या हैंड वॉश का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
- पक्षियों, वन्यजीवों और उनके मल से अपने पालतू जानवरों और बच्चों को दूर रखें।
- घर पर चिकेन या अंडे खाते हैं तो उन्हें अच्छे से पकाएं।
- अगर इन्फेक्शन को लेकर कोई एडवाइजरी जारी की गई है तो बेहतर होगा कि चिकन और अंडे खाना अवॉइड करें।
बर्ड फ्लू से जुड़े अकसर पूछे जाने वाले कुछ सवाल यानी FAQs
सवाल: बर्ड फ्लू को लेकर एक्सपर्ट्स इतना क्यों आगाह करते हैं?
जवाब: क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक बड़ी वजह इसकी मृत्यु दर है। इंसानों में बर्ड फ्लू से मृत्यु दर 50% से भी अधिक है। इसका मतलब है कि बर्ड फ्लू से पीड़ित लोगों में से आधे लोगों की मृत्यु हो जाती है। अगर यह इंसानों से इंसानों में फैलने लगा तो तबाही मच सकती है।
सवाल: क्या बर्ड फ्लू महामारी बन सकता है?
जवाब: बर्ड फ्लू के महामारी बनने की आशंका बहुत कम है। हां, अगर भविष्य में इन्फ्लूएंजा वायरस का कोई ऐसा म्यूटेशन आता है, जो इंसानों से इंसानों में फैलने लगा तो यह महामारी का रूप ले सकता है।
सवाल: क्या बर्ड फ्लू से बचाव के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध है?
जवाब: इन्फ्लूएंजा वायरस से बचाव के लिए जानवरों और पक्षियों के लिए वैक्सीन उपलब्ध हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, बर्ड फ्लू अभी इस स्तर पर नहीं फैला है कि इंसानों के लिए वैक्सीन बनाने की जरूरत पड़े।
सवाल: क्या एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस यानी बर्ड फ्लू जिओ 5G ट्रायल की वजह से फैल रहा है?
जवाब: नहीं, ऐसा नहीं है। किसी एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस का जियो के 5G ट्रायल से कोई संबंध नहीं है। यह बीमारी पक्षियों में इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण फैलती है। कई बार इसके केस इंसानों में भी देखने को मिले हैं।












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