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“सहनशीलता शक्ति है,कमजोरी नहीं” : डॉ.अजिता शर्मा

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-आधी आबादी-
“सहनशीलता शक्ति है,कमजोरी नहीं”
“नारी की सहनशीलता को प्रायः उसकी कमजोरी समझ कर उसे प्रताड़ित करना क्या उचित है?”……..विचारणीय है?
नारी जिसके बिना एक सभ्य समाज की कल्पना अधूरी सी प्रतीत होती है,प्रायः बहुत सी जिम्मेदारियों का निर्वहन करती समाज को सुचारू रूप से संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।नारी अपने विभिन्न स्वरूपों में अनेक उतार-चढ़ाव का सामना करते हुए त्याग,बलिदान,धैर्य धारण करते हुए परिवार को बांधे रखती है।विडबंना है कि नारी के इसी त्याग,सहनशीलता से पूर्ण व्यवहार को उसकी कमजोरी समझ लिया जाता है,जिसके फलस्वरूप परिवार में उसके सपनों को नजरअंदाज किया जाता है।परिस्थितियां चाहे विवाह पूर्व की हो,या विवाह पश्चात की प्रत्येक परिस्थितियों में उससे समझौते की अपेक्षा की जाती है।बाल्यावस्था से किशोरावस्था तक एक बेटी होने के नाते कई पारिवारिक मामलों में प्रारम्भ से उसे सहन करने की शिक्षा तथा विवाह पश्चात अपने परिवार के सुख व शांति के लिए अपने सपनो को एक तरफा रख कर परिस्थितियों को सहन करने की शिक्षा भी यह समाज ही देता है।
समाज की रूढ़ि वादी विचारधारों का उसको कदम कदम पर सामना करना पड़ता है।कहने को समाज मे रह -रह कर स्त्री पुरुषों की समानता की बात उठती है,स्त्रियों को पुरुषों के समान अधिकार देने की बात आती है।कहने को हम स्वयं को आधुनिक विचारधाराओं वाला समझते है,लेकिन जब बात स्त्रियों की स्वतंत्रता की आती है तो ये समाज पारिवारिक स्तर पर ही उनकी उड़ानों पर प्रतिबंध लगाने में पीछे नही रहता।परिवार में रहते हुए परिवार के सुखी जीवन की इच्छा रखते हुए सभी परिस्थितयों को सहन करने की उसकी प्रवृति को उसकी कमजोरी समझ कर अभी भी आये दिन उस पर अत्याचार किये जाते है,कदम कदम पर उसके विचारों का बलात्कार किया जाता है।क्या ये उचित है?
आज के संदर्भ में यदि वर्तमान परिस्थितियों का हम विश्लेषण करते है,तो महिलायें दोहरी जिम्मेदारियों का वहन करते हुए अपने परिवार को संभाल रही है।कही कही इस दौर में घरेलू हिंसा का सामना करते हुए भी सकारात्मक दृष्टिकोण अपना कर परिवार को संबल प्रदान कर रही है।क्या इन समस्त तथ्यों पर विचार करने के पश्चात भी महिलाओं की सहन शीलता को उनकी कमजोरी समझना समाज की समझदारी होगी?

✍🏻डॉ.अजिता शर्मा
(व्याख्याता:-शिक्षा)
उदयपुर

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