
बीकानेर। भारत सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला कृषक वर्ष 2026 की घोषणा के बाद महिला किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में ठोस पहल करते हुए नाबार्ड की ओर से फलोदी जिले की राजीविका समूह से जुड़ी 30 महिला कृषकों को बीकानेर स्थित ऊरमूल में तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिला किसानों को पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन की नवीन और वैज्ञानिक तकनीकों से अवगत कराना रहा ताकि वे सामाजिक और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं ने दूध उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण, पशु स्वास्थ्य प्रबंधन और बाजार से जुड़ाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यवहारिक जानकारी प्राप्त की।
नाबार्ड के सहायक महाप्रबंधक रमेश तांबिया ने कहा कि महिला किसानों को यदि वैज्ञानिक तकनीकों की सही जानकारी और संसाधन मिलें, तो वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन सकती हैं। यह प्रशिक्षण उसी दिशा में एक मजबूत कदम है।
राजीविका जिला प्रबंधक स्वीटी एलजा ने जानकारी दी कि
चयनित महिला किसानों को राजीविका एवं श्री गुरु जंभेश्वर सेवा संस्थान के सहयोग से इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण में देशी दुधारू पशुओं के वैज्ञानिक रखरखाव, संतुलित आहार, स्वास्थ्य प्रबंधन और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।
ऊरमूल के मैनेजिंग डायरेक्टर बाबूलाल बिश्नोई ने कहा कि
प्रशिक्षण में महिलाओं को दुग्ध उत्पादों को बाजार से जोड़ने, दूध की गुणवत्ता बनाए रखने के मानक, मूल्य संवर्धन और विपणन की व्यवहारिक समझ भी दी गई। इससे महिला उद्यमिता को नई दिशा मिलेगी। कार्यक्रम में बीकानेर विकास प्राधिकरण की आयुक्त अर्पिता गुप्ता ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ ग्रामीण विकास को भी गति देते हैं। महिला कृषकों का आर्थिक रूप से मजबूत होना समाज के लिए बेहद आवश्यक है।
प्रशिक्षण में शामिल महिला प्रशिक्षणार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें पहली बार दुग्ध उत्पादन और पशु देखभाल की वैज्ञानिक जानकारी मिली है, जिससे अब हम अपने पशुपालन कार्य को और बेहतर तरीके से कर सकेंगे।
एक अन्य महिला प्रशिक्षणार्थी ने बताया दूध की गुणवत्ता और बाजार से जुड़ाव की जानकारी उनके लिए बेहद उपयोगी साबित होगी, इससे उनकी आमदनी बढ़ेगी।













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