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क्या औचक निरीक्षण से सुधरेंगे सरकारी अफसर-बाबू?:IAS-RAS तक को किया APO फिर भी लेटलतीफी जारी, न नौकरी जाने का डर न सैलरी कटने का

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क्या औचक निरीक्षण से सुधरेंगे सरकारी अफसर-बाबू?:IAS-RAS तक को किया APO फिर भी लेटलतीफी जारी, न नौकरी जाने का डर न सैलरी कटने का

जयपुर

राजस्थान के सरकारी दफ्तरों में लेट-लतीफ अफसरों को सुधारने के लिए खुद मुख्य सचिव सुधांश पंत लगातार औचक निरीक्षण कर रहे हैं। उनके हर निरीक्षण में अधिकारी-कर्मचारी नदारद मिल रहे हैं। सरकारी कार्यालयों में देर से आने वाले अधिकारी-कर्मचारियों पर मुख्य सचिव के निरीक्षण का कोई असर नहीं पड़ रहा। हाल ही में 18 अप्रैल को सुधांश पंत ने विद्युत निगम (जयपुर) का आकस्मिक निरीक्षण किया था। खुद सीएमडी भानु प्रकाश एटरू (IAS) गायब मिले थे।

14 फरवरी को किए गए दौरे में परिवहन मुख्यालय में परिवहन आयुक्त मनीषा अरोड़ा भी दफ्तर में नहीं मिली थीं। इससे पहले जयपुर विकास प्राधिकरण में 23 जनवरी 2024 को एक आईएएस और दो आरएएस अफसर समय पर उपस्थित नहीं मिले थे। पंत ने उन्हें एपीओ भी किया था, लेकिन कुछ दिनों बाद उन्हें फिर से बहाल कर दिया गया।

इस बीच, प्रशासनिक सुधार विभाग ने भी औचक निरीक्षण किए। सरकारी कार्मिक फिर कुर्सियों से गायब मिले। बार-बार औचक निरीक्षणों के बावजूद सरकारी कर्मचारी समय पर दफ्तर नहीं पहुंच रहे? क्या अधिकारियों-कर्मचारियों में किसी कार्रवाई का कोई खौफ नहीं? पढ़िए- इस खास रिपोर्ट में…।

मुख्य सचिव ही नहीं मुख्यमंत्री भी कर चुके औचक निरीक्षण

सुधांश पंत ने बतौर मुख्य सचिव पिछले साल 24 दिसंबर को काम संभाला था। पंत के पास सरकारी दफ्तरों में तय समय (सुबह साढ़े नौ बजे) पर देरी से आने वाले अफसरों-कर्मचारियों की लगातार शिकायतें आ रही थीं। ऐसे में उन्होंने खुद ही सरकारी कार्यालयों का औचक निरीक्षण करने की योजना बनाई। उनसे पहले ब्यूरोक्रेसी में मैसेज देने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल और सिंधीकैंप थाने का औचक निरीक्षण कर चुके थे।

जेडीए का औचक निरीक्षण करते सीएस सुधांश पंत। वे जेडीए का दो बार निरीक्षण कर चुके हैं।

जेडीए का औचक निरीक्षण करते सीएस सुधांश पंत। वे जेडीए का दो बार निरीक्षण कर चुके हैं।

जेडीए से की शुरुआत

पंत ने 24 जनवरी को जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें सचिव नलिनी कठोतिया (आईएएस), अतिरिक्त आयुक्त आनंदी लाल वैष्णव व उपायुक्त प्रवीण कुमार अनुपस्थित मिले। समय पर दफ्तर नहीं आने के चलते कठोतिया, वैष्णव और कुमार को एपीओ कर दिया गया।

हालांकि कुछ दिनों बाद ही उन्हें कार्मिक विभाग ने पुन: दूसरे पदों पर पद स्थापित कर दिया। पंत ने 8 अप्रैल को एक बार फिर जेडीए का औचक निरीक्षण किया। जेडीए के दूसरे दौरे में पंत ने काम-काज पर संतोष व्यक्त किया और फाइलों की पेंडेंसी कम होने की बात भी कही।

IAS से लेकर आरएएस अफसर तक मिले अनुपस्थित

पंत ने 2 फरवरी को जयपुर जिला कलेक्ट्रेट का दौरा किया। वहां राजस्व अपील अधिकारी (आरएएस) रामावतार गुर्जर अनुपस्थित मिले। पंत ने वहां कई कक्षों में स्वयं जाकर कार्मिकों को देखा।

  • 7 फरवरी को पंत ने नगर निगम का निरीक्षण भी किया। वहां भी कुछ अधिकारी-कर्मचारी समय पर दफ्तर नहीं पहुंचे थे।
  • 14 फरवरी को परिवहन मुख्यालय का निरीक्षण किया। जहां खुद परिवहन आयुक्त मनीषा अरोड़ा गैर हाजिर मिलीं। उनके पीए ने उन्हें फोन किया तो वे आनन-फानन में परिवहन मुख्यालय पहुंची।
  • 18 अप्रैल को पंत ने विद्युत भवन का औचक निरीक्षण किया। जयपुर विद्युत निगम के सीएमडी भानु प्रकाश एटरू स्वयं दफ्तर में तय समय पर गैरहाजिर मिले। एटरू वर्ष 2003 बैच के आईएएस अफसर हैं।
18 अप्रैल को सुधांश पंत ने विद्युत निगम (जयपुर) का आकस्मिक निरीक्षण किया था।

18 अप्रैल को सुधांश पंत ने विद्युत निगम (जयपुर) का आकस्मिक निरीक्षण किया था।

प्रशासनिक सुधार विभाग ने भी किए निरीक्षण

प्रशासनिक अधिकारियों पर नजर रखने वाले प्रशासनिक सुधार विभाग ने भी औचक निरीक्षण करना शुरू किया। विभाग ने अपने स्तर पर दो-तीन टीमें बनाकर जयपुर में ही नगर निगम, कांवटिया हॉस्पिटल, गणगौरी हॉस्पिटल, जलदाय विभाग और आरटीआई दफ्तरों में औचक निरीक्षण किए। इनमें से नगर निगम में आरएएस अफसर करतार सिंह गैरहाजिर मिले थे।

क्या हैं लेट-लतीफों के खास 5 बहाने

जब सरकारी दफ्तरों में तय समय (सुबह साढ़े नौ बजे से शाम 6 बजे तक) पर गैर हाजिर अफसरों व कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस दिए जाते हैं, तो वे अपनी अनुपस्थिति के कारण भी बड़े रौचक बताते हैं। इनमें 5 कारण ऐसे हैं, जो लगभग हर गैर हाजिर कार्मिक के जवाबों में शामिल होते हैं।

  • दफ्तर आ ही रहा था कि अचानक तबीयत खराब हो गई। जी-मिचलाने लगा, घबराहट सी हो रही थी।
  • दफ्तर के लिए निकलने ही वाला था कि गाड़ी खराब हो गई। दूसरी गाड़ी का इंतजाम करने में देरी हो गई। बस या ट्रेन लेट हो गई।
  • दफ्तर के किसी जरूरी कोर्ट केस से संबंधित काम के लिए वकील से विचार-विमर्श करना था। पहले वहां जाना जरूरी हो गया था।
  • मौसम अचानक खराब हो गया। तेज बारिश होने लगी ऐसे में घर से निकलना मुश्किल हो गया था।
  • दफ्तर में आ तो गया था, लेकिन उपस्थिति रजिस्टर पर दर्ज नहीं किया।
नगर निगम का औचक निरीक्षण करने पहुंचे पंत। प्रशासनिक सुधार विभाग ने भी कई कार्यालयों में औचक निरीक्षण किए।

नगर निगम का औचक निरीक्षण करने पहुंचे पंत। प्रशासनिक सुधार विभाग ने भी कई कार्यालयों में औचक निरीक्षण किए।

क्यों नहीं हो रहा औचक निरीक्षण का असर

सीएम और सीएस की ओर से पिछले 4 महीनों में जिस तरह से औचक निरीक्षण किए गए हैं, उसके बावजूद सरकारी कारिंदों का दफ्तरों मे गैरहाजिर मिलना चौंकाने वाला है। आईएएस-आरएएस अफसर जो उस विभाग में शीर्ष पदों पर होते हैं, जब वे ही गैर हाजिर मिलें उस दफ्तर की वर्क कल्चर आसानी से समझी जा सकती है। आखिर इनकी वजहें क्या हैं…

1. सरकारी सेवा नियमों में नहीं हो पाती कोई ठोस कार्रवाई

राजस्थान सर्विस रूल्स के तहत गैरहाजिर पाए जाने वाले सरकारी कर्मचारियों-अधिकारियों के खिलाफ कोई बहुत ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती है। समय पर दफ्तर में नहीं मिलने पर विभागाध्यक्ष की ओर से संबंधित कार्मिक को 16 सीसीए और 17 सीसीए (क्लासिफिकेशन कंट्रोल एंड अपील रूल्स-1958) के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किए जाते हैं। जिनका संबंधित कार्मिक जवाब दे देते हैं और अपनी अनुपस्थिति रहने का कोई न कोई कारण बता देते हैं।

मुख्यमंत्री बनते ही भजनलाल शर्मा ने एसएमएस हॉस्पिटल का औचक निरीक्षण किया था।

मुख्यमंत्री बनते ही भजनलाल शर्मा ने एसएमएस हॉस्पिटल का औचक निरीक्षण किया था।

2. आर्थिक दंड और प्रमोशन रोकने के प्रावधान, लेकिन ऐसे मामले भी बहुत कम

16 सीसीए के तहत बड़ा आर्थिक दंड और 17 सीसीए के तहत माइनर पेनल्टी के प्रावधान है। इसके तहत संबंधित कार्मिक को दोषी पाए जाने पर (जांच के बाद) आर्थिक दंड लगाया जाता है। माइनर पेनल्टी में जहां एक वेतन इंक्रीमेंट रोका जाता है वहीं मेजर पेनल्टी के तौर पर एक से तीन इंक्रीमेंट रोकने, पेंशन रोकने, पदोन्नति रोकने तक के प्रावधान हैं।

जानकारों का मानना है कि राजस्थान में अभी तक ऐसा कोई उदाहरण सामने नहीं आया है कि किसी कार्मिक के समय पर उपस्थित नहीं मिलने के कारण उसे कहीं कोई भारी दंड का सामना करना पड़ा हो। ऐसे में सामान्यत: कार्मिक कारण बताओ नोटिस का जवाब देकर छूट जाते हैं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

सख्त कार्रवाई का अभाव, पुराने नियमों में सुधार जरूरी

रिटायर्ड आईएएस अफसर महावीर प्रसाद वर्मा का कहना है कि करीब 35 वर्ष की सरकारी सेवा में मैंने देखा है कि हजारों अफसर व कर्मचारी अक्सर तय समय पर दफ्तर नहीं पहुंचते थे, लेकिन कभी किसी कार्मिक को सख्त प्रशासनिक या आर्थिक दंड झेलना पड़ा हो, ऐसा मैंने नहीं देखा। केवल कारण बताओ नोटिस से कभी कुछ भी नहीं होता है।

इस संबंध में सरकारी सेवा नियम 1957-58 के बने हुए हैं। तब के सरकारी दफ्तरों की आवश्यकता, वर्क परफॉर्मेंस, सर्विस डिलीवरी, जनता की अपेक्षाओं आदि में रात-दिन का अंतर आ चुका है। अब कॉरपोरेट जगत का जमाना है। एक दिन की सर्विस डिलीवरी भी देरी हो जाए तो जुर्माने लगाए जाते हैं। ऐसे में सरकारी सिस्टम को भी ज्यादा जिम्मेदार बनाए जाने की जरूरत है।

रिटायर्ड आईएएस एके सिंह का कहना है कि पुराने नियमों में बदलाव लाने की जरूरत है, ताकि कार्मिकों में भय हो और वे काम के प्रति ज्यादा गंभीर हो सकें। स्वस्थ कार्य संस्कृति नहीं होने से लोग सरकारी काम-काज को हलके में लेते हैं। कॉरपोरेट जगत, एयरलाइंस, बैंक आदि इसके अच्छे उदाहरण हैं। वहां लोग समय पर आते ही हैं। सॉफ्टवेयर और कंप्यूटर एप्लिकेशन्स के जरिए उनकी उपस्थिति दर्ज होती है। इससे जो कार्मिक उल्लंघन करते हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई भी कड़ी होती है। वे उल्लंघन करने से स्वाभाविक रूप से दूर रहना पसंद करने लगे हैं। दुर्भाग्य से सरकारी सेवाओं में अभी इस तरफ कदम नहीं बढ़ाए गए हैं।

दौरों से नहीं बदलेगी तस्वीर

वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारेठ का कहना है कि मुख्य सचिव हो या जिला कलेक्टर। किसी नौकरशाह के दौरे करने मात्र से सरकारी कारिंदों की लेट-लतीफी प्रवृत्ति में कोई बदलाव नहीं होने वाला। रोज-रोज दौरे किया जाना भी संभव नहीं है। यह प्रशासनिक रोग नहीं बल्कि शैक्षणिक व सामाजिक रोग है। इसका उपचार भी शिक्षा व समाज के माहौल में परिवर्तन लाकर ही संभव है। ऐसा माहौल बनाया जाए कि सरकारी कार्मिक दफ्तर के नियमों-परम्पराओं का स्वाभाविक रूप से पालन करें।

क्या कहते हैं जिम्मेदार?

प्रशासनिक सुधार विभाग के सचिव (आईएएस) राजन विशाल ने बताया कि जो सरकारी कार्मिक दफ्तरों में समय पर उपस्थित नहीं मिलते हैं उन्हें सरकारी सेवा नियमों के तहत नोटिस दिए जाते हैं। सख्त कार्रवाई कोई अलग से नहीं की जा सकती है, जो नियमों में प्रावधान हैं उन्हीं के अनुसार कार्रवाई की जाती है।

राजन विशाल, सचिव, प्रशासनिक सुधार विभाग

राजन विशाल, सचिव, प्रशासनिक सुधार विभाग

इसके लिए कोई नए नियम तो हैं नहीं। संबंधित कार्मिक के बारे में उनके विभागाध्यक्षों को लिखते हैं, फिर वे उनसे जवाब-तलब करते हैं। संबंधित कार्मिक को सुनवाई का मौका भी दिया जाता है। अगर उनका जवाब संतोषजनक नहीं होता है, तो फिर आगे की कार्रवाई करते हैं।

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