अंतर्राष्ट्रीय राजस्थानी विचार मंच की ऑनलाइन बैठक संपन्न

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बीकानेर। अंतर्राष्ट्रीय राजस्थानी विचार मंच की ऑनलाइन बैठक मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष जानकीनारायण श्रीमाली की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में प्रतिभागियों को मंच के इतिहास के सम्बन्ध में बताया गया कि इस मंच की स्थापना राजस्थानी भाषा, संस्कृति एवं सभ्यता के प्रचार-प्रसार एवं उत्थान के उद्देश्य से वर्ष 1935-36 में कीर्तिशेष त्रय सर्व श्री ठाकुर राम सिंह, डॉ. नरोत्तम दास स्वामी एवं डॉ. सूर्यकरण पारीक द्वारा की गई थी।

इस महान त्रिमूर्ति के अवसान के पश्चात् संस्था के कार्य सञ्चालन का महती दायित्व राजस्थान के प्रथम द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कृष्णशंकर पारीक ने अपने कन्धों पर लिया। श्री पारीक वर्तमान में न्यूयॉर्क में निवास करते हैं । बढ़ती आयु की बाध्यता के दृष्टिगत उन्होंने संस्था के संचालन का दायित्व वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जानकीनारायण श्रीमाली को सुपुर्द किया । अध्यक्ष श्रीमाली ने से.ति. अपर रेल मंडल प्रबंधक निर्मल कुमार शर्मा को राष्ट्रीय महामंत्री का दायित्व सौंपा है एवं कार्यकारिणी के विस्तार हेतु अधिकृत किया है।

आज की बैठक में निर्णय लिया गया कि जिला प्रशासन के पास वर्षों से लंबित प्रस्ताव, जिस पर सहमति बन चुकी थी, कि रोशनी घर तिराहे को त्रिमूर्ति तिराहे का नाम दे कर यहाँ ठाकुर राम सिंह, डॉ. नरोत्तम दास स्वामी एवं डॉ. सूर्यकरण पारीक की प्रतिमा स्थापित की जाये, को लागू करवाने के लिए प्रशासन से पुनः संपर्क स्थापित कर प्रयास ही नहीं वरन क्रियान्वयन भी करवाया जाए। प्रशासन की स्वीकृति मिलने पर संस्था जन- सहयोग से राशि की व्यवस्था करेगी।

यह भी निर्णय लिया गया कि न केवल इन तीन विभूतियों वरन राजस्थान की भाषा, साहित्य, संस्कृति व् सभ्यता के उत्थान में योगदान देने वाली समस्त विभूतियों का उनकी जयंती व पुण्य -तिथि पर भावसिक्त स्मरण किया जाए ताकि नई पीढ़ी को प्रेरणा व मार्गदर्शन मिले।

राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं सूची में सम्मिलित करवाने के लिए प्रशासनिक एवं राजनैतिक स्तर पर प्रयास करने का निर्णय भी लिया गया।

संस्था के महामंत्री ने राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए उचित रणनीति के तौर पर नीति-निर्धारण में प्रभावी प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क बढ़ा कर इस दिशा में प्रयास किये जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने संस्था में नए सदस्यों को जोड़ने के लिए भी सभी वर्तमान सदस्यों एवं पदाधिकारियों से अनुरोध किया।

कार्यकारिणी सदस्य श्री भगवती प्रसाद पारीक ने विचार रखते हुए कहा कि राजस्थानी भाषा जो विश्व की सबसे समृद्ध भाषा है अपनी पहचान एवं अस्तित्व के लिए हम सभी राजस्थानी भाषाई लोगों की ओर देख रही है। हमारा दायित्व है कि हम इस दिशा में सकारात्मक प्रयास कर हमारी अपनी मायड़ भाषा को यथोचित सम्मान दिलवायें। बैठक में आर के शर्मा ने भी विचार व्यक्त किए ।

संस्था के महामंत्री निर्मल शर्मा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ बैठक समाप्त हुई।

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