जमीअत उलमा-ए-हिन्द शाखा बीकानेर ने ग़रीब महिला का करवाया इलाज

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अतीकुर्रहमान गौरी और हाफिज अजमल हुसैन ने किया केस वेरिफाई, इलाज की ज़िम्मेदारी हाफिज अजमल और अब्दुल क़य्यूम ने निभाई


बीकानेर:
जमीअत उलमा-ए-हिन्द शाखा बीकानेर ने एक बार फिर इंसानियत और सामाजिक सेवा की शानदार मिसाल पेश करते हुए एक निर्धन बंगाली मज़दूर परिवार की बीमार महिला का इलाज करवा कर उन्हें राहत पहुंचाई है।

पीड़िता गॉल ब्लैडर (पित्ताशय की पथरी) की गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं। चूंकि वे राजस्थान की निवासी नहीं थीं, इसलिए उन्हें किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल सका। एम.एन. हॉस्पिटल, बीकानेर में जांच के बाद ऑपरेशन की अनुमानित लागत ₹30,000 बताई गई, जो कि इस परिवार के लिए बहुत बड़ा बोझ था।

इस मामले को सबसे पहले अतीकुर्रहमान गौरी और हाफिज अजमल हुसैन ने वेरिफाई किया। उसके बाद हाफिज अजमल हुसैन और श्री अब्दुल क़य्यूम खिलजी ने इस केस को पूरी गंभीरता और इंसानी जज़्बे के साथ संभाला।
उन्होंने महिला को अस्पताल में भर्ती कराया, टेस्ट, डॉक्टरी सलाह और ऑपरेशन की तमाम जिम्मेदारियाँ निभाईं।


मौलाना मोहम्मद इरशाद क़ासमी (महासचिव, जमीअत उलमा-ए-हिन्द शाखा बीकानेर) ने कहा:

“जमीअत उलमा-ए-हिन्द बीकानेर का उद्देश्य केवल धार्मिक कार्यों तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक और इंसानी खिदमत भी है।

इस मामले में अतीकुर्रहमान गौरी और हाफिज अजमल हुसैन ने सबसे पहले ज़रूरत को पहचानकर केस की पुष्टि की।

फिर हाफिज अजमल हुसैन और अब्दुल क़य्यूम साहब ने जिस मेहनत, ईमानदारी और दर्दमंदी से काम किया, वह काबिले-तारीफ़ है।

यह सबकुछ समाज के कुछ दरदमंद लोगों के सहयोग से मुमकिन हुआ। हम उन सभी का शुक्रिया अदा करते हैं।

मैं समाज के तमाम जिम्मेदार अफ़राद से अपील करता हूँ कि इस नेक काम में शरीक हों और इंसानियत की इस सेवा में अपना किरदार अदा करें।”


✅ ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है और मरीज़ स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं।

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