आईएमए में ट्रेनिंग लेने वाले पाकिस्‍तान के जनरल मूसा, भारत के खिलाफ लड़ा था एक युद्ध, सैम बहादुर थे जिनके कोर्समेट

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आईएमए में ट्रेनिंग लेने वाले पाकिस्‍तान के जनरल मूसा, भारत के खिलाफ लड़ा था एक युद्ध, सैम बहादुर थे जिनके कोर्समेट

Pakistan India News: भारत और पाकिस्‍तान के बीच चार बार युद्ध हो चुके हैं। एक युद्ध में एक युद्ध ऐसा भी था जब पाकिस्‍तानी आर्मी चीफ के तौर पर जो शख्‍स निर्देश दे रहा था, उसने भारत में ही ट्रेनिंग हासिल की थी। रविवार को जब भारतीय सैन्‍य अकादमी की पासिंग आउट परेड हुई तो इस किस्‍से का भी जिक्र हुआ।

 रावलपिंडी: रविवार को भारत के उत्‍तराखंड राज्‍य की राजधानी देहरादून में इंडियन मिलिट्री एकेडमी (आईएमए) की पासिंग आउट परेड थी। इस परेड के साथ ही भारतीय सेना को नए ऑफिसर्स भी मिले। आईएमए का पाकिस्‍तान से भी एक गहरा कनेक्‍शन है। भारत और पाकिस्‍तान दोनों सन् 1965 में जंग लड़ चुके हैं। इस जंग में पाकिस्‍तानी सेना की कमान जनरल मोहम्‍मद मूसा के हाथ में थी। जनरल मूसा, पाकिस्‍तानी सेना के इकलौते जनरल थे जिन्‍होंने भारत में ट्रेनिंग ली थी। आईएमए की पासिंग आउट परेड के मौके पर आज हम आपको जनरल मूसा की कहानी के बारे में बताते हैं जो एक जवान से जनरल के पद तक पहुंचे थे।

1965 की जंग में थे जनरल
भारत और पाकिस्तान के बीच 1965 का युद्ध जम्मू और कश्मीर की स्थिति को लेकर दोनों देशों के बीच लड़ी गई दूसरी जंग थी। जनरल मूसा ने 27 अक्‍टूबर 1958 से 17 जून 1966 तक पाकिस्‍तानी सेना के चौथे कमांडर-इन-चीफ के तौर पर जिम्‍मेदारी निभाई थी। सन् 1926 में जब उनकी उम्र 18 साल थी तो वह एक सिपाही के तौर पर ब्रिटिश भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। वह चौथी हजारा पायनियर्स में जूनियर कमीशंड ऑफिसर थे। इसके बाद अक्टूबर 1932 में उन्‍हें कैडेट के तौर पर देहरादून स्थित आईएमए में चुना गया और यहीं पर उन्‍होंने ट्रेनिंग हासिल की।


पहले बैच का हिस्‍सा
एक फरवरी 1935 को वह बतौर सेकंड लेफ्टिनेंट के तौर पर कमीशंड आफिसर बने। जनरल मूसा ने आईएमए में ही युद्ध की बारीकियां और रणनीति सीखी। आईएमए से पासआउट होकर निकले जनरल मूसा पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष के पद तक पहुंचे। मूसा आईएमए के 40 जेंटलमेन कैडेट्स वाले पहले बैच का हिस्‍सा थे। जनरल मूसा ने सन् 1965 के युद्ध में पाकिस्तानी सेना की कमान संभाली थी। पूरे युद्ध दौरान हर ऑपरेशन जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। जनरल मूसा उसी बैच में थे जिसमें भारत के पहले फील्‍ड मार्शल सैम मानेक शॉ भी शामिल थे। जनरल मूसा और मानेकशॉ के अलावा म्‍यांमार के आर्मी चीफ रहे स्मिथ डू भी उस बैच में थे।

जनरल मूसा-जवान टू जनरल
सेना प्रमुख के तौर पर बॉर्डर की दूसरी तरफ से हमले को भांप न पाने में उनकी जबरदस्‍त आलोचना भी की गई थी। हालांकि, उन्हें चाविंडा की लड़ाई के दौरान सियालकोट की ओर से भारतीय हमले को कमजोर करने का श्रेय भी दिया जाता है। जनरल मूसा ने अपनी ऑटो-बायोग्राफी लिखी थी जिसका टाइटल ‘जवान टू जनरल’ था। इसमें उन्होंने बताया था कि कैसे एक साधारण जवान से लेकर वह जनरल बने। इस किताब में उन्‍होंने अपने जीवन के सभी अनुभवों का विस्‍तार से लिखा था।

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