आरटीआई के दुरूपयोग पर 3 लाख का अर्थ दण्ड, पढ़ें पूरा मामला

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बीकानेर। एक व्यक्ति द्वारा 6 माह में 400 के आरटीआई लगाना। उसकी अपील के लिये एक कर्मचारी का 80 प्रतिशत समय उस अपीलों के जबाब में व्यतीत होना। जिसके बार बार अपील पर नियमानुसार अपील का जबाब तलब करने पर तीन लाख का राजस्व खर्च होना। सुनने में अजीब सा लगता है। पर ऐसा हुआ है। इस अजीबों गरीब आरटीआई अपील पर राज्य लोक सूचना अधिकारी एवं क्षेत्रीय प्रबंधक रीको ने फैसला सुनाते हुए आरटीआई लगाने वाले को अर्थदंड के रूप में तीन लाख का भुगतान करने का पत्र जारी कर दिया है। संभवत में राज्य में ऐसा पहला फैसला है। जिसमें आरटीआई लगाकर रीको से मांगी गई जानकारी में विभाग का समय बर्बाद कर राजकीय नुकसान पहुंचाने पर तीन लाख रूपये के अर्थदंड के की वसूली अमल में लाने की बात कही गई है। अपील पर जबाब देते हुए शर्मा ने परिवादी नारायण दास तुलसानी को आरटीआई के दुरूपयोग करने,कार्यालय के राजकीय संसाधनों को प्रभावित करने एवं कार्यालय के कर्मचारियों,अधिकारियों पर विभिन्न प्रतिवेदनों के माध्यम से भय एवं चि ंता का माहौल बनाने की बात भी कही है। शर्मा ने तुलसानी को पत्र जारी कर 7 दिनों में कारण स्पष्ट करते हुए विधिक कार्रवाई की दिशा निर्देश दिए है। शर्मा ने इसके पक्ष में तथ्य प्रस्तुत करते हुए कहा है कि रीको द्वारा भूखंड निरस्त करने के पश्चात अत्यधिक मात्रा में सूचना का अधिकार अधिनियम के आवेदन प्रस्तुत किये। जबकि यह मामला करणी औद्योगिक विस्तार से संबंध रखता है। यहीं नहीं तुलसानी ने नियम के अधीन आवंटित किये गये अन्य भूखंडों से संबंधित सूचना मांगी और तृतीय पक्ष की सूचना चाहने के लिये व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान अनुचित दबाव बनाया।

यह है मामला
बताया जा रहा है कि तुलसानी ने रीको औद्योगिक क्षेत्र करणीनगर में रीको भू निपटान नियम 1979 के नियम 3 डब्लू के तहत 885.49 रूपये प्रति वर्गमीटर की रियायती दर पर औद्योगिक भूखंड संख्या ई-593 एवं एफ 609 से एफ 615 क्षेत्रफल 29893 वर्गमीटर रीको द्वारा आवंटित किया गया था। इस भूखंड पर तुलसानी द्वारा आवंटन पत्र की शर्तों के अनुसार निर्धारित समायवधि में रूपये 39.62 करोड़ का निवेश करना था। जिससे राज्य के औद्योगिक विकास को बल मिलता एवं क्षेत्र में रोजगार सृजित होता। परन्तु तुलसानी द्वारा आवंटन पत्र की शर्तों एवं रीको के नियमों की पालना नहीं किये जाने पर रीको द्वारा उनके भूखंड को 25.11.2019 को निरस्त कर दिया। जिससे अस ंतुष्ट होकर तुलसानी द्वारा रीको के विभिन्न स्तरों पर भूखंड को बहाल की अपील दायर की। जिसे रीको निगम मुख्यालय द्वारा विभिन्न स्तरों पर नियमानुसार खारिज किया गया। इसके बाद तुलसानी ने रीको के विरूद्व उच्च न्यायालय जोधपुर एवं आईडीसी रीको के समक्ष सात वाद भी दायर किये गये।

6 माह में 400 लगाई आरटीआई
तुलसानी ने भूखंड निरस्तीकरण से क्षुब्ध होकर भूखंड बहाल के लिये 6 माह में लगभग 400 आरटीआई आवेदन प्रस्तुत किये। जिनकी प्रतिलिपि व स्मरण पत्र राष्ट्रपति,राज्यपाल,मुख्यमंत्री,प्रभारी मंत्री,मुख्य सचिव,संभागीय आयुक्त,जिला कल क्टर,चेयरमैन रीको,एमडी रीको,जिला उद्योग केन्द्र,राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल जयपुर,बीकानेर,सलाहाकार ईएम,इन्फ्रा,एएंडएम आदि को भी दिये।

रीको कार्यालय का एक कर्मचारी का समय सिर्फ जबाब देने में
जानकारी मिली है कि रीको कार्यालय के एक कर्मचारी का लगभग 80 प्रतिशत समय केवल तुलसानी के अपीलों के जबाब देने में ही व्यतीत हुआ।तो पचास प्रतिशत कर्मचारी आवेदन पत्रों के निस्तारण में लगे रहते है। मंजर यह रहा कि सूचना आयोग द्वारा पूर्व में भी वर्ष 2021-22 में अत्यधिक मात्रा में द्वितीय अपीलों को निरस्त किया जा चुका है। जिस पर रीको द्वारा लगभग तीन लाख का व्यय विधिक खर्च किया गया।

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