इंडियन सोसाइटी फॉर प्रमोशन ऑफ इंग्लिश लैंग्वेज एंड लिटरेचर (आइस्पैल इंडिया) के छिहतरवें साहित्यिक सत्संग मे मार्मिक कविताओं का पठन

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फरवरी महीने के अंत मे जहाँ एक तरफ युक्रेन और रशिया की दिल दहलाने वाली खबरे मानवता का हरण कर रही है वही सभी भौगोलिक और मानव निर्धारित सीमाओं और बंधनों को दरकिनार कर सद्भाव, प्रेम और शांति के प्रतीक और दूत के रूप मे दस देशों के ग्यारह प्रसिद्ध कवियों ने इंडियन सोसाइटी फॉर प्रमोशन ऑफ इंग्लिश लैंग्वेज एंड लिटरेचर (आइस्पैल इंडिया) के छिहतरवें साहित्यिक सत्संग मे भव्य रूप से शिरकत की और अपनी मार्मिक कविताओं का पठन कर श्रोताओं का दिल जीत लिया। स्नेह और भाईचारे के भाव से परिपूर्ण काव्यमयी माहौल में अमेरिका से जनेता वरनाडो जोन्स और थामस ए थामस, पाकिस्तान से शाहिद अब्बास, आस्ट्रेलिया से डाॅ देविका ब्रेंडेन, बांग्लादेश से तोफिक जुहूर, पुर्तगाल से मरिया दो रोजारियों लोरिस, कैनेडा से डेविड लियो सिरवाह, यूके से रेबेका लोवे, कैपे वरदे से ग्लोरिया सोफिया, ब्राजील से जेल्डा काइस्ट्रो और साउथ अफ्रीका से रूबेन क्रिस्चियन्स ने उत्कृष्ट काव्य प्रस्तुतियां दी। यह अति विशिष्ट प्लेटिनम जुबली काव्य सम्मेलन डाॅ जी ए घनश्याम, फाउंडर और जनरल सैकट्ररी, आइस्पैल इंडिया और प्रोफेसर आॅफ इंगलिश, डायरेक्टरेट ऑफ हायर एजुकेशन, रायपुर, छतीसगढ के मार्गदर्शन में डॉ शालिनी यादव, प्रोफेसर, अंग्रेजी विभाग, कॉम्प्यूकॉम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, जयपुर ने विशेष रूप से संयोजित और संचालित किया।

तत्पश्चात् प्रोफेसर घनश्याम ने सभी कवियों और प्रबुद्ध श्रोतागणों के प्रति तहेदिल से सादर आभार व्यक्त किया। इस साहित्यिक सत्संग को ऑनलाइन जूम प्लेटफार्म पर श्री प्रमोद ढींगले, आइटी कोर्डिनेटर, आइस्पैल इंडिया के विशेष सहयोग से सम्पन्न किया गया। काव्य सम्मेलन को बेहद सफलतापूर्वक एक अच्छे मानवीयता को जीवित रखने के संदेश के साथ समाप्त किया गया।

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