एनआरसीसी द्वारा स्वच्छता अभियान के तहत प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन

FacebookWhatsAppTelegramLinkedInXPrintCopy LinkGoogle TranslateGmailThreadsShare
https://twitter.com/TIN_NETWORK__/status/1741411743023366419?t=hmJtMgkturKLWEMr7nTpQQ&s=19


बीकानेर 31.12.2023 । भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी), बीकानेर द्वारा भारत सरकार के निर्देशानुसार स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत दिनांक 16 से 31 दिसम्बर 2023 की अवधि में मनाए जा रहे स्वच्छता पखवाड़ा में स्वच्छता संबंधी संदेश को व्यापक स्तर पर प्रचारित-प्रसारित करने के उद्देश्य से केन्द्र द्वारा आज प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया।
प्रेस वार्ता के दौरान केन्द्र निदेशक डा. आर्तबन्धु साहू ने स्वच्छता के महत्व एवं इसके प्रति जागरूकता पर बोलते हुए कहा कि स्वच्छता का हम सभी के जीवन में विशेष महत्व है, भारत सरकार द्वारा स्वच्छता के प्रति जागरूकता का यह अभियान, जनमानस में अब तेजी से प्रभावी तौर पर प्रचारित-प्रसारित हो रहा है तथा स्वच्छता को लेकर आमजीवन की मानसिकता में अब परिवर्तन आने से हमारे सार्वजनिक स्थल, विद्यालय, अस्पताल तथा पर्यटन स्थलों आदि की स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह केन्द्र, अनुसंधान के अलावा एक पर्यटन स्थल के रूप में भी विश्व प्रसिद्ध है, इसे दृष्टिगत रखते हुए केन्द्र स्वच्छता संबंधी अभियान से जुड़ी गतिविधियों को संजीदा तौर पर लेता है, ऐसे अभियान केन्द्र में पर्यटनीय दृष्टिकोण से महत्ती रूप से सहायक सिद्ध हो रहे हैं तथा इस दर्शनीय स्थल को देखने हेतु सैलानी, ऊँट पालक, किसान, विद्यार्थी गण आदि हजारों की संख्या में प्रतिवर्ष आते हैं। उन्होंने कैमल इको-टूरिज्म को उद्यमिता से जुड़ते हुए ऊँट पालकों को लाभ पहुंचाने की भी बात कही।
केन्द्र के नोडल अधिकारी (स्वच्छता) डा.राजेश कुमार सावल, प्रधान वैज्ञानिक ने केन्द्र में 15 दिन तक चले इस पखवाड़ा गतिविधियों को प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस दौरान स्वच्छता शपथ, विशेष किसान दिवस के उपलक्ष्य पर पशु स्वास्थ्य शिविर व किसान गोष्ठी, ऊंट पालकों के समक्ष स्वच्छ दूध उत्पादन का प्रदर्शन, बालक-बालिकाओं हेतु प्रतियोगिता, सार्वजनिक स्थलों की साफ-सफाई एवं पर्यटन विकास को बढ़ावा देने स्वच्छता संबंधी गतिविधियों संचालित की गई।
इस अवसर पर स्वच्छता गतिविधियों, ऊँटों के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु केन्द्र के अनुसंधानिक प्रयास, ऊँटनी के दूध का औषधीय महत्व एवं विभिन्न मानवीय रोगों में इसकी उपयोगिता तथा एनआरसीसी द्वारा कैमल इको-टूरिज्म की दिशा में किए जा रहे प्रयासों आदि कई बिन्दुओं पर भी बातचीत की गई।

[metaslider id=68846 cssclass=””]
Categories:
error: Content is protected !!