कुतुबमीनार या विष्णु स्तंभ:संस्कृति मंत्रालय का पुरातत्व विभाग को निर्देश, कुतुबमीनार परिसर में खुदाई कर रिपोर्ट दें

FacebookWhatsAppTelegramLinkedInXPrintCopy LinkGoogle TranslateGmailThreadsShare

*कुतुबमीनार या विष्णु स्तंभ:संस्कृति मंत्रालय का पुरातत्व विभाग को निर्देश, कुतुबमीनार परिसर में खुदाई कर रिपोर्ट दें*
दिल्ली की साकेत कोर्ट में सुनवाई से पहले केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने पुरातत्व विभाग (ASI) से कुतुबमीनार कॉम्प्लेक्स की खुदाई करने के लिए कहा है। मंत्रालय ने इसकी रिपोर्ट भी मांगी है। मंत्रालय ने साथ ही कहा है कि सर्वे कर मूर्तियों की डिटेल रिपोर्ट तैयार करें। कोर्ट में 24 मई को सुनवाई होनी है।रिपोर्ट के मुताबिक कुतुबमीनार के पास स्थित मस्जिद से 15 मीटर की दूरी पर खुदाई की जा सकती है। मंत्रालय के सचिव गोविंद मोहन ने शनिवार को इसके लिए हाईलेवल मीटिंग भी की। कुतुबमीनार में 1991 में अंतिम बार खुदाई का काम हुआ था।

*ASI के पूर्व रीजनल डायरेक्टर ने किया था दावा*
इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में ASI के पूर्व रीजनल डायरेक्टर धर्मवीर शर्मा ने दावा किया है कि कुतुब मीनार को कुतब-उद-दीन ऐबक ने नहीं बनवाया था। उन्होंने इसको लेकर 3 बड़े दावे किए थे।
*पूर्व ASI अफसर के 3 बड़े दावे…*

*1. कुतुब मीनार नहीं, सन टॉवर*
यह कुतुब मीनार नहीं, सन टॉवर है। मेरे पास इस संबंध में बहुत सारे सबूत हैं। शर्मा ने ASI की तरफ से कई बार कुतुब मीनार का सर्वेक्षण किया है।

*2. मीनार के टॉवर में 25 इंच का झुकाव*
उन्होंने कहा, ‘कुतुब मीनार के टॉवर में 25 इंच का टिल्ट (झुकाव) है, क्योंकि यहां से सूर्य का अध्ययन किया जाता था। इसीलिए 21 जून को सूर्य आकाश में जगह बदल रहा था तब भी कुतुब मीनार की उस जगह पर आधे घंटे तक छाया नहीं पड़ी। यह विज्ञान है और एक पुरातात्विक साक्ष्य भी।’

*3. रात में ध्रुव तारा देखा जाता था*
शर्मा ने बताया कि लोग दावा करते हैं कि कुतुब मीनार एक स्वतंत्र इमारत है और इसका संबंध करीब की मस्जिद से नहीं है। दरअसल, इसके दरवाजे नॉर्थ फेसिंग हैं, ताकि इससे रात में ध्रुव तारा देखा जा सके

*कोर्ट में दाखिल है याचिका*
दिल्ली के साकेत कोर्ट में 17 मई को कुतुबमीनार परिसर में पूजा की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई टल गई थी। इस याचिका पर 24 मई को सुनवाई होनी है। यूनाइटेड हिंदू फ्रंट ने 2022 में याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया था कि कुतुबमीनार स्थित कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद को हिन्दू और जैन धर्म के 27 मंदिर को तोड़कर बनाया गया है। ऐसे में वहां फिर से मूर्तियां स्थापित की जाएं और पूजा करने की इजाजत दी जाए।

FacebookWhatsAppTelegramLinkedInXPrintCopy LinkGoogle TranslateGmailThreadsShare
Categories:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!