कुत्ते ने नोच डाला बच्ची का चेहरा, मौत:खेलते समय घर के बाहर कुत्ते ने किया हमला, बुरी तरह जगह-जगह काटा

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कुत्ते ने नोच डाला बच्ची का चेहरा, मौत:खेलते समय घर के बाहर कुत्ते ने किया हमला, बुरी तरह जगह-जगह काटा

कुत्ते के काटने से एक बच्ची की गुरुवार को मौत हो गई। शुक्रवार को पिता ने बेटी का अंतिम संस्कार किया। मामला भीलवाड़ा के मांडलगढ़ का है। बेटी का अंतिम संस्कार करने से पहले पिता शव से लिपटकर रोने लगा। दरअसल, करीब दो सप्ताह पहले उसकी बेटी को स्ट्रीट डॉग ने काट लिया था। बच्ची का इलाज कर छुट्टी दे दी गई थी। लेकिन अचानक फिर तबियत बिगड़ी। फिर बच्ची की मौत हो गई।

बच्ची के पिता महादेव जाट ने बताया कि भीलवाड़ा के गांव थाबोल मांडलगढ़ में परिवार के साथ रहते है। 27 सितंबर की शाम करीब 5 बजे उनकी बेटी खुशी (9) घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान खेल रही खुशी पर स्ट्रीट डॉग ने हमला कर दिया। बच्ची को रोड पर गिराकर चेहरे पर बुरी तरह काट लिया। मासूम बेटी के चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनकर परिजनों ने कुत्ते को भगाया।

खून से लथपथ हालत में तुरंत बच्ची को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र राजकीय महात्मा गांधी आरोग्य सदन में दिखाया। बच्ची को रेबीज प्रोटोकॉल के तहत इलाज दिया गया। बच्ची के घाव पर टांके लगा दिए गए। तीन दिन बच्ची को हॉस्पिटल में एडमिट रखने के बाद छुट्टी दे दी गई।

परिजनों ने 13 अक्टूबर को बच्ची को राजकीय महात्मा गांधी आरोग्य सदन भीलवाड़ा हॉस्पिटल में दिखाया।

परिजनों ने 13 अक्टूबर को बच्ची को राजकीय महात्मा गांधी आरोग्य सदन भीलवाड़ा हॉस्पिटल में दिखाया।

फिर तबीयत बिगड़ने पर हुई मौत
12 अक्टूबर को खुशी की दोबारा तबीयत खराब हो गई। पानी से डरने लगी, बुखार चढ़ने लगा और शरीर कंपन करने लगा। परिजनों ने 13 अक्टूबर को बच्ची को राजकीय महात्मा गांधी आरोग्य सदन भीलवाड़ा हॉस्पिटल में दिखाया। डॉक्टरों ने बच्ची को रेबीज प्रोफाइल एक्सेस हाइड्रोफोबिया का पेशेंट मानकर हायर सेंटर रेफर कर दिया। बच्ची को उसका पिता कार से मम्मी और बुआ के साथ उदयपुर के भूपालसागर हॉस्पिटल रवाना हुआ। शाम करीब 4 बजे हॉस्पिटल ले जाते समय बेटी खुशी की रास्ते में मौत हो गई।

शुक्रवार को घर से ढाई किलोमीटर दूर शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

शुक्रवार को घर से ढाई किलोमीटर दूर शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

घर से 5KM दूर शव लेकर रुका
मौत के बाद बेटी की लाश लेकर महादेव जाट कार से अपने गांव पहुंच गए। बच्ची के पोस्टमार्टम करवाने की कहने पर परिजनों ने मना कर दिया। घर से 5KM दूर कार में डेड बॉडी लेकर रुक गया। लाश को बाहों में लिपटकर रोने लगा। घर चलने की कहने पर बोला- घरवाले देखेंगे तो कोहराम मच जाएगा। थोड़ी देर बाद कुछ रिश्तेदार और परिचित को कॉल कर बुला लिया। शुक्रवार को घर से ढाई किलोमीटर दूर शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

9 साल की खुशी चौथी क्लास में पढ़ती है। पिता जेसीबी चलाने का काम करते हैं। दो छोटे भाई देवराज (6) और अभिषेक (5) हैं।

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