गणगौरी तीज पर अनेक स्थानों पर मेले, गणगौर पूजन सामग्री का हुआ विसर्जन

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बीकानेर। गणगौरी तीज पर शहर के अनेक स्थानों पर मेले लगे। गणगौर सा श्रृंगार किए हुए बालिकाओं व महिलाओं ने शहर के प्राचीन कुओं के पास गणगौर पूजन सामग्री, ज्वारा व घुड़ले का विसर्जन किया। जूनागढ़ से शाही लवाजमें के साथ गणगौर माता की सवारी निकली। बेस कीमती आभूषण का श्रृंगार किए हुए चांदमल ढढ्ढा की गणगौर निकली। दो दिवसीय मेला शुरू हुआ।
सुयोग्य वर, मंगलमय जीवन व अखंड सुहाग की कामना होली के दूसरे दिन धुलंडी सुबह शाम व दोपहर गणगौर, ईसर व भाइये के गीतों के की स्वर लहरियों के साथ चल रहा दौर शुक्रवार को संपन्न होगा। अनेक बालिकाओं व महिलाओं ने बुधवार को पूजन सामग्री का विसर्जन किया। अधिकतर बालिकाएं शुक्रवार को करेंगी।
जूनागढ़ से शाही लवाजमें के साथ निकली गणगौर माता की सवारी में रायसिंह ट्रस्ट के बैड बीकानेर राज घराने की एंथम बजाकर गणगौर को सलामी दी। बैंड ने प्राचीन गीतों की स्वर लहरियां बिखेर कर देशी – विदेशी दर्शकों का मन मोह लिया। चौतीना कुआं पर पानी पिलाने की रस्म अदा की गई। शुक्रवार शाम को पुनः जूनागढ़ की जनानी ड्योढ़ी में पूजा के बाद गणगौर की सवारी निकल कर चौतीना कुआं पहुंचेगी जहां बीकानेर के विभिन्न मोहल्लों, पंचायतियों की गणगौरे शाही गणगौर के सम्मान में चौतीना पहुंचेगी । उनका राजपरिवार की ओर से खोळ भरा जाएगा। चौतीना कुआं से कोटगेट तक गणगौरों की दौड़ होगी।
बालिकाओं ने गणगौर पूजन सामग्री का विसर्जन जस्सूसर गेट, सिटी कोतवाली के सामने, चौतीना कुआं,अमरसर कुआं, गंगाशहर, भीनासर आदि स्थानों पर किया। सर्वाधिक भीड़ जस्सूसर गेट पर थीं। दोपहर से रात करीब दस बजे तक बालिकाओं व महिलाओं की रेलम पेल थीं। बालिकाओं व महिलाओं ने विभिन्न तरह के झूले झूल कर व खानपान की वस्तुओं का आनंद लिया। कई बालिकाओं ने बैंड पार्टी के साथ व कई ने ढोल तासे के साथ नृत्य करते हुए पूजन सामग्री का विसर्जन किया।
ढढ्ढों के चौक में बेसकीमती आभूषणों का श्रृंगार किए चांद मल ढढ्ढा की पैरों वाली गणगौर व भाइए की प्रतिमाओं को पूजन के बाद चौक में पाटे पर प्रतिष्ठित किया गया। गणगौर के आगे अनेक महिलाओं ने ढोल की विभिन्न चालों के साथ घूमर नृत्य किया। आयोजन से जुड़े यशवंत कोठारी ने बताया कि शुक्रवार को मेला परवान पर रहेगा। धरणीधर मैदान में गणगौर उत्सव गीतों के साथ मनाया गया। गणगौर लिए महिलाओं व बालिकाओं ने गीतों के साथ नृत्य किया। अनेक महिलाओं ने गणगौर का उद्यापन किया। अनेक मोहल्लों में महिलाओं ने अपनी गणगौर की प्रतिमाओं को घर के बार रखकर गीत गाए।

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