जब बात बेटी की आती है: अनामिका श्रीवास्तव

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जब बात बेटी की आती है
तो क्यों यह लोग सोच लेते हैं
कि बेटी पराया धन
यह सोचकर मुँह मोड़ लेते हैं
नहीं सोचते एक भी दफा कि
वह भी एक बेटी होती है
जिनसे बेटे जन्म लेते हैं
तो कैसे बेटी के गर्भ से जन्म कर
उसे ही गर्भ मे मार हैं
जरा गौर करिए इस बात पर कि अगर बेटी न होती तो क्या हम होते
अपने इस समाज में बेटों की बराबरी में बेटियों का भी अधिकार है
और देख सकते हैं आप भी कि
वह देश को दिला रहीं बहुत सम्मान हैं बॉर्डर पर वीर बनकर वह लडती हैं आतंकियों से लड़ने में भी
वह नहीं डरती है
हंसते हंसते शरहद पर
वह जान गावा देती हैं
और जब बात घर वालों की होती हैं वह चुप नहीं रहती है
और घर की इज्ज़त के लिए
वह बहुत कुछ सहती है
तो जब बात बेटी की आए है
तो गर्व से सीना चौड़ा हो जाए
आओ ऐसा अपना भारत बनाए अपनी बेटियों को पढ़ाये लिखाने आगे बढ़ाएं

   अनामिका श्रीवास्तव
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