ट्रोमा का टॉर्चर ट्रीटमेंट:सोनोग्राफी-MRI बंद, बाकी जांच भी OPD तक, पीबीएम का फर्स्ट एड ही बीमार, सोनोलॉजिस्ट नहीं-स्टाफ भी कम

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ट्रोमा का टॉर्चर ट्रीटमेंट:सोनोग्राफी-MRI बंद, बाकी जांच भी OPD तक, पीबीएम का फर्स्ट एड ही बीमार, सोनोलॉजिस्ट नहीं-स्टाफ भी कम
संभाग के सबसे बड़े पीबीएम हॉस्पिटल का ट्रोमा सेंटर। समय: दोपहर के करीब सवा दो बजे हैं। हॉस्पिटल की लेबोरेटरी जहां खून जांच होती है, बंद पड़ी है। सोनोग्राफी कक्ष भी लॉक है। अब यहां भर्ती होने वाले मरीजों को सोनोग्राफी और खून जांच के लिए मर्दाना हॉस्पिटल जाना होगा।हैरानी की बात यह है कि जिन मरीजों को डॉक्टरों ने हिलने-डुलने के लिए भी मना किया है, उन्हें मजबूरी में ट्रोमा सेंटर से मर्दाना हॉस्पिटल स्ट्रेक्चर पर लिटाकर ले जाना होगा। ट्रोमा सेंटर में भर्ती मरीजों की बदहाली को लेकर जब शुक्रवार को पड़ताल की तो हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई। यहां सोनोग्राफी मशीन होने के बावजूद मरीजों की सोनोग्राफी नहीं होती।वजह है सोनोलॉजिस्ट का नहीं होना। यहां एमआरआई की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। मरीजों को उसके लिए भी मर्दाना हॉस्पिटल के चक्कर काटने पड़ते हैं। दोपहर दो बजे के बाद यानी ओपीडी समय पूरा होने के बाद यहां खून जांच करने वाली लेबोरेटरी पर भी ताला लग जाता है। कुल मिलाकर पीबीएम हॉस्पिटल के ट्रोमा सेंटर के हाल ओपीडी के बाद एक डिस्पेंसरी के समान हो जाते हैं।
सोनोलॉजिस्ट की सेवाएं जल्द शुरू करेंगे: सुपरिटेंडेंट
ट्रोमा सेंटर में मरीजों को 24 घंटे सोनोलॉजिस्ट की सेवाएं मिले इस बात को सुनिश्चित किया जाएगा। रही बात खून और एमआरआई जांच व्यवस्था की तो उसकी सेवाएं भी जल्द शुरू कर दी जाएगी। स्टाफ को लेकर जानकारी जुटाने के बाद रिक्त पदों और मरीजों की संख्या के आधार पर नर्सिंगकर्मियों की नियुक्ति कर दी जाएगी। ट्रोमा सेंटर में पहुंचने वाले किसी भी मरीज को परेशान नहीं होने दिया जाएगा।

डॉ. प्रमोद कुमार सैनी, सुपरिटेंडेंट पीबीएम

लू लग जाए तो…47 डिग्री में मरीजों को जांच के लिए बाहर ले जाते हैं

इन्हें हिलने-डुलने तक की मनाही…फिर भी स्ट्रेचर पर ले जाते हैं, घंटों कतार में रखते हैं

*दुर्घटना में घायल महेंद्र को देर रात ट्रॉमा सेंटर लाए थे। लेकिन यहां पहुंचने के बाद उसकी खून जांच के लिए हार्ट हॉस्पिटल, सीटी स्कैन, एमआरआई के लिए मर्दाना हॉस्पिटल जाना पड़ा। मरीज के भाई बजरंग ने बताया कि नर्वस सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया। डॉक्टर ने हिलने से ही मना किया है। महेंद्र कुमार, हीरावतान बास, डूंगरगढ़*
*मोटरसाइकिल से गिरने के बाद अचेत होने पर परिजन ट्रोमा सेंटर लेकर आए। यहां पहुंचने के बाद डॉक्टर ने सोनोग्राफी और सीटी स्कैन लिखा। सोनोग्राफी के लिए मर्दाना हॉस्पिटल जाना पड़ा। वहां कतार के कारण करीब ढाई घंटे बाद सोनोग्राफी हुई। ट्रोमा सेंटर में सुविधाएं होनी चाहिए। कुंभाराम, ठुकरियासर, श्रीडूंगरगढ़*
आवारा पशु ने सींग मारकर घायल कर दिया। गर्दन में गंभीर चोट लगी है। डॉक्टर ने मरीज को सीधे पलंग पर लेटने की हिदायत दी है। लेकिन सोनोग्राफी करवाने रात डेढ़ बजे मर्दाना हॉस्पिटल जाना पड़ा। भाई भरत कुमार ने बताया कि जब सोनोग्राफी के लिए दूसरी हॉस्पिटल लेकर गए तो वह दर्द से कराह रहा था। ​​​​​​​मुकेश कुमार, तखतपुरा, छतरगढ़

स्टाफ की स्थिति: 3 शिफ्ट में 13 स्टाफ-2 डॉक्टर
ट्रोमा सेंटर को लेकर बरती जाने वाली अनदेखी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां तीन शिफ्ट में नर्सिंग स्टाफ की संख्या महज 13 ही है। जबकि बीकानेर संभाग के दुर्घटनाग्रस्त और गंभीर मरीज इसी हॉस्पिटल आते हैं। रोजाना करीब 400 मरीजों के आउटडोर वाले ट्रोमा सेंटर में एक सर्जन और ऑर्थो डॉक्टर के अलावा 24 घंटे किसी की सेवाएं नहीं मिलती। दो डॉक्टरों के अलावा शेष सभी श्रेणी के डॉक्टरों को ऑन कॉल बुलाया जाता है। हॉस्पिटल में रोजाना 30-40 मरीज सोनोग्राफी और एमआरआई के आते हैं, लेकिन उनकी जांच यहां नहीं होती। पिछले दिनों कलेक्टर को बेटी के कान दर्द पर ट्रोमा सेंटर की बदहाली का दर्द झेलना पड़ा था।

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