बीकानेर। भारत सरकार के ज्ञान भारतम् मिशन के स्वतंत्र केंद्र अभय जैन ग्रन्थालय द्वारा आयोजित सात दिवसीय ऑनलाइन ब्राह्मी लिपि प्रशिक्षण कार्यशाला का उद्घाटन सत्र उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। देशभर के विभिन्न राज्यों से 700 से अधिक प्रशिक्षार्थियों ने ऑनलाइन माध्यम से जुड़कर भारतीय ज्ञान परंपरा, प्राचीन पांडुलिपियों और ब्राह्मी लिपि के अध्ययन के प्रति अपनी गहरी रुचि दिखाई।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. अनिर्वाण दास ने अपने संबोधन में ज्ञान भारतम् मिशन की गतिविधियों और उद्देश्यों की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि मिशन देशभर में भारतीय ज्ञान संपदा के संरक्षण और दस्तावेजीकरण का कार्य कर रहा है।विशिष्ट वक्ता प्रो. कीर्ति कांत शर्मा ने ब्राह्मी लिपि के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की प्राचीन पांडुलिपियों, शिलालेखों और सांस्कृतिक धरोहर को समझने के लिए ब्राह्मी लिपि का अध्ययन अत्यंत आवश्यक है।कार्यक्रम की अध्यक्षता ललित कुमार नाहटा ने की। उन्होंने अगरचंद नाहटा द्वारा संग्रहित हस्तलिखित ग्रंथों, दुर्लभ पुस्तकों और ज्ञान संरक्षण के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान का उल्लेख किया।विशिष्ट अतिथि डॉ. सरोज कोचर ने भारतीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि ऐसी कार्यशालाएं युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती हैं।डॉ. सुरेंद्र कुमार शर्मा ने भारतीय पांडुलिपियों के संरक्षण, अध्ययन और शोध की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय पांडुलिपियां हमारी सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं, जिनका व्यवस्थित अध्ययन समय की मांग है।सारस्वत अतिथि डॉ. अंजना शर्मा ने लिपि अध्ययन और अभिलेखों की उपयोगिता पर अपने विचार साझा किए। वहीं कार्यशाला की प्रशिक्षक डॉ. सुकेता ने ब्राह्मी लिपि के इतिहास, विकास और प्रशिक्षण की आगामी रूपरेखा से प्रतिभागियों को अवगत कराया।कार्यक्रम के अंत में ऋषभ नाहटा ने सभी अतिथियों, प्रशिक्षकों, प्रशिक्षार्थियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। आयोजन व्यवस्था का संचालन संयोजक मोहित बिस्सा, लव कुमार देराश्री तथा सह-संयोजक लक्ष्मीकांत उपाध्याय और गौरव आचार्य ने किया।उद्घाटन सत्र में आगामी सात दिनों तक ऑनलाइन माध्यम से संचालित होने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई। कार्यशाला को लेकर प्रतिभागियों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
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