डाॅ.सोहनदान चारण को साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार घोषित

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जोधपुर । राजस्थानी भाषा – साहित्य के मूर्धन्य विद्वान एवं लोक साहित्य मर्मज्ञ प्रोफेसर (डाॅ.) सोहनदान चारण को उनकी राजस्थानी अनुवाद कृति ‘ भीलां रौ भारथ ‘ पर साहित्य अकादेमी राजस्थानी अनुवाद अवार्ड 2024 घोषित हुआ है ।

साहित्य अकादेमी सचिव के.श्रीनिवास राव ने बताया कि प्रोफेसर (डाॅ) सोहनदान चारण ने गुजराती भाषा के प्रतिष्ठित लेखक भगवानदास पटेल रचित आदिवासी महाकाव्य ‘ भीलों नुं भारथ ‘ का राजस्थानी भाषा में ‘ भीलां रौ भारथ ‘ नाम से किये गए अनुवाद कृति को तीन सदस्यों के निर्णायक मंडल ने इस पुस्तक का सर्वसम्मति से चयन किया है । इस अनुवाद पुरस्कार के अंतर्गत डाॅ.सोहनदान चारण को ताम्रफलक, पच्चास हजार रुपए, शाॅल एवं श्रीफल प्रदान कर साहित्य अकादेमी के विशेष समारोह में पुरस्कृत किया जायेगा ।

भीलां रौ भारथ : असल में भीलां रौ भारथ मूलरूप से गुजराती भाषा में रचित आदिवासी महाकाव्य का राजस्थानी अनुवाद है जिसमें बताया गया है कि भील समाज में महाभारत की कथाओं को ऋतुचक्र के आधार पर वर्षभर गाने और सुनने अद्भुत परम्परा है । जैसे- भादवा में भजन, आसोज अरेला, काती में वही, पोस में काबरिया कोळी, फागण एवंर चैत्र में सव अभियानो गीतो’ आदि नाम से जाने जाते है । इस पुस्तक में गुजरात एवं राजस्थान के सीमा पर अरावली की गोद में निवास करने वाले भील समाज की सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, व्यापारिक, राजनैतिक एवं साहित्यिक परम्पराओं को शोधपरक दृष्टि से उजागर किया गया है । निसंदेह इसमें भील समाज की अंतर-आत्मा प्रकाश नजर आता है ।

साहित्य जगत में खुशी की लहर : डाॅ. सोहनदान चारण को साहित्य अकादेमी अनुवाद पुरस्कार घोषित होने पर राजस्थानी साहित्य जगत में खुशी की लहर छा गई । इस अवसर पर प्रतिष्ठित कवि-आलोचक प्रोफेसर (डाॅ.) सत्यनारायण, प्रोफेसर (डाॅ.) कौशलनाथ उपाध्याय, मधु आचार्य आशावादी, डाॅ.गजेसिंह राजपुरोहित, डाॅ.मंगत बादल, डाॅ.देव कोठारी, डाॅ.नंद भारद्वाज, चेतना आचार्य, कृष्ण कुमार आशु , डाॅ.रमाकांत शर्मा, डाॅ.पद्मजा शर्मां, डाॅ. कालूराम परिहार, ओम नागर, डाॅ.प्रकाशदान चारण, श्रीमती संतोष चौधरी, डाॅ.रामरतन लटियाल, अंम्बिकादत्त, डाॅ.कप्तान बोरावड़, डाॅ.जितेन्द्रसिंह, डाॅ.इन्द्रदान चारण, डाॅ.राजेन्द्र बारहठ सहित अनेक प्रतिष्ठित रचनाकारों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी।

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