पॉवर पॉलिटिक्स की रीति नीति अलग ही होती है। आजकल सियासी झगड़ों की जड़ ट्रांसफर पोस्टिंग से बढ़ रही है। पिछड़े जिले में गांवों के विकास से जुड़ी एक महिला अफसर का तबादला दो विधायकों के बीच तनातनी का कारण बन गया है। महिला अफसर को राजधानी के जिले में लाने की सिफारिश सत्ताधारी पार्टी के ही एक खेमा बदलने वाले विधायक ने की। जिस पिछड़े जिले से अफसर का ट्रांसफर हुआ वहां के फायर ब्रांड विधायक बाहर से सरकार को समर्थन दे रहे हैं। बिना पूछे महिला अफसर का तबादला करने पर फायर ब्रांड विधायक भी खासे नाराज हैं। महिला अफसर के खिलाफ पुराने मामले में कई तरह की गड़बड़ियों की जांचें भी खुली हुई हैं।

प्रियंका गांधी क्यों हुईं नाराज?
राष्ट्रीय राजनीति में पिछले कुछ दिनों से किसी न किसी बहाने राजस्थान सेंटर पॉइंट में आता रहा है। पहले राहुल गांधी से ईडी पूछताछ के विरोध की कमान संभालकर प्रदेश के मुखिया ने सियासी पकड़ साबित करने का प्रयास किया। अब ईडी प्रकरण के बाद पार्टी के दो खेमों के बीच कोल्ड वॉर के संकेत मिलने शुरू हो गए। इस बीच पार्टी ने केंद्र को घेरने का प्रयास जारी रखा, लेकिन बीच में ही उदयपुर कांड हो गया। उदयपुर कांड ने पार्टी को लेकर पूरा नरेटिव ही बदल दिया। इस बीच प्रियंका गांधी के नाराजगी जताने की चर्चाएं भी अंदरखाने चल रही हैं। प्रियंका गांधी की नाराजगी को लेकर पार्टी के कुछ विश्वसनीय नेताओं ने ही दावा किया है। रैपिड एक्शन के पीछे भी इसे ही वजह बताया जा रहा है।

पूर्व कैग ने जायकेदार अचार बनाने की हॉबी को बिजनेस बनाया
देश के कुछ प्रभावशाली ब्यूरोक्रेट बड़े पदों से रिटायर होने के बाद भी चर्चा में बने रहते हैं। केंद्रीय गृह सचिव और कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) के पद से रिटायर होने के बाद जयपुर मूल के रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट अलग कारण से चर्चा में हैं। रिटायर्ड कैग इन दिनों जायकेदार अचार बनाने को लेकर छाए हुए हैं। सर्विस में रहते हुए भी वे जायकेदार अचार खुद बनाते थे, लेकिन उस समय उनकी इस अनोखी कला से केवल चुनिंदा नजदीकी ही परिचित थे। अब रिटायर होने के बाद वे अचार बनाने की हॉबी को बिजनेस बना लिया। रिटायर्ड ब्यूराेक्रेट की इस पाक कला के हुनर को उनकी बहु ने पहचानकर इसे स्टार्टअप का रूप दे दिया है। यह प्रीमियम अचार का स्टार्टअप चल निकला है, इसीलिए कहते हैं कि हाथ का हुनर और कला किसी उम्र की मोहताज नहीं होती।
चुनावी रणनीतिकार बने विधायक को मंत्री ने सुनाई खरी-खरी
पूर्वी राजस्थान के एक विधायक राज्यसभा चुनाव की बाड़ेबंदी में अचानक से चुनावी रणनीतिकार के अवतार में आ गए। प्रदेश के मुखिया को इन विधायक के आइडिया पसंद आ गए इसलिए सब विधायकों को प्रजेंटेशन ही दे दिया। कई विधायकों को यह प्रजेंटेशन बेमन से भी सुनना पड़ा। अब राजनीति में कोई सेट फाॅर्मूला तो होता नहीं इसलिए आप एक ही लाठी से पूरे राजस्थान को नहीं हांक सकते। विधायक को तो मुखियाजी को खुश रखना था, इसलिए खूब टिप्स दिए। पूर्वी राजस्थान के विधायक ने दूसरी बार भी प्रदेश के मुखिया की मौजूदगी में कई विधायकों को फिर से वही ज्ञान देना शुरू कर दिया। जी-6 की अगुवाई करने वाले शेखावाटी के मंत्री से विधायक का ज्ञान बर्दाश्त नहीं हुआ और प्रदेश के मुखिया की मौजूदगी में ही कह दिया कि दूसरों को ज्ञान देते-देते कहीं खुद मत निपट जाना, इस तरह चुनाव नहीं जीते जाते। चुनावी रणनीतिकार बने विधायक के पास इसका जवाब नहीं था।
बड़े अफसर नहीं खुलवा सके एयरपोर्ट का वीआईपी लॉन्ज

पिछले दिनों कुछ बड़े अफसर एक ऑफिशियल टूर पर प्रदेश से बाहर गए। राजधानी से फ्लाइट के जरिए जाना था। एयरपोर्ट पर समय से पहले पहुंच गए। एयरपोर्ट का वीवीआईपी लॉन्ज खुलवाने को कहा तो साफ मना कर दिया। एयरपोर्ट के प्राइवेटाइजेशन के बाद हालात बदल गए, जिस कंपनी ने एयरपोर्ट लिया है वह खुद रसूखदार है। बड़े अफसर ने इनकार को शान में गुस्ताखी माना। साथी अफसरों के सामने कह दिया कि अभी देखिए इन्हें हैसियत समझता हूं। यह कहकर कई फोन घुमाए, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। बड़े अफसर मन मसोसकर रह गए। इस घटना के बाद बड़े अफसर को यह समझ आ गया कि रसूख हर जगह काम नहीं करता।
मंत्री भूले पार्टी लाइन, बंद का समर्थन
राजधानी के तेजतर्रार मंत्री कई बार पार्टी लाइन की परवाह नहीं करते। उदयपुर मामले में मंत्रीजी ने कई बातें ऐसी कह दीं जो विरोधाभासी थीं। आरोपियों को ठोकने के बयान के बाद जयपुर बंद का समर्थन कर दिया। सत्ताधारी पार्टी में मंत्रीजी ग्राउंड कनेक्ट वाले नेता माने जाते हैं, इसलिए राज में होते हुए भी वे जनभावना को देख खुद को रोक नहीं पाते। नेताजी की इसी आदत के कारण कई बार सत्ताधारी पार्टी को असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है।






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