बीकानेर 19 मई, 2026 । भा.कृ.अनु.प.-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र, बीकानेर की संस्थान अनुसंधान परिषद (आई.आर.सी.) की वार्षिक बैठक आज आयोजित की गई। पूरे दिन चली इस बैठक में केन्द्र की विभिन्न अनुसंधान परियोजनाओं, नवाचारों एवं वैज्ञानिक गतिविधियों की समीक्षा की गई।
बैठक में विषय विशेषज्ञ डॉ. जय कुमार कौशिक, अध्यक्ष, जैव प्रौद्योगिकी विभाग एवं प्रधान वैज्ञानिक, भाकृअनुप-राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान, करनाल ने कहा कि वैज्ञानिक प्रगति के लिए सकारात्मक आलोचना, खुला विमर्श और वैश्विक नवाचारों को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने मूलभूत एवं व्यावहारिक अनुसंधान दोनों को समान रूप से महत्वपूर्ण बताते हुए ऊँट के दूध में मौजूद कैमल लैक्टोफेरिन जैसे जैव-सक्रिय गुणों पर शोध की वैश्विक संभावनाओं को रेखांकित किया। देश में ऊँटों की घटती संख्या और बदलते परिदृश्य का हवाला देते हुए उन्होंने उष्ट्र पालन की चुनौतियों हेतु उपभोक्ता-केंद्रित व नवीन अनुसंधान पर बल दिया। साथ ही, डॉ. कौशिक ने ऊँट पालकों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए एनआरसीसी द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
केन्द्र के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने संस्थान की अनुसंधान उपलब्धियों और वर्तमान गतिविधियों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि वैज्ञानिक ऊँटों से जुड़े विविध पहलुओं पर महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बैठक में केंद्र द्वारा किए गए नवाचारों को रेखांकित किया और विश्वास दिलाया कि विशेषज्ञ द्वारा दिए गए मूल्यवान सुझावों व मार्गदर्शन को अनुसंधान कार्यों में समाहित किया जाएगा, जिससे परियोजनाओं की गुणवत्ता और उपयोगिता और सुदृढ़ हो सके। साथ ही, डॉ. पूनिया ने चल रहे अनुसंधानों के बेहतर कार्यान्वयन, सही दिशा और अपेक्षित परिणामों के लिए विशेषज्ञों से निरंतर मार्गदर्शन की अपेक्षा जताई।
इस अवसर पर केन्द्र के डॉ. राकेश रंजन, सदस्य सचिव, आईआरसी द्वारा आई.आर.सी. की पिछली बैठक के निर्णयों संबंधी प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। बैठक की कार्यवाही के दौरान सभी वैज्ञानिकों ने बारी-बारी से अपनी परियोजनाओं में गत वर्ष के दौरान किए गए कार्यों एवं भविष्य में प्रस्तावित अनुसंधान परीक्षणों का विवरण प्रस्तुत किया, जिनकी विस्तार से विवेचना की गई तथा परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु आवश्यक सुझाव प्रदान किए गए।



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