नए क्रिमिनल जस्टिस कानून 26 जनवरी से पहले नोटिफाई होंगे:एक साल में पूरे देश में लागू कर दिए जाएंगे, चंडीगढ़ में होगा ट्रायल रन

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नए क्रिमिनल जस्टिस कानून 26 जनवरी से पहले नोटिफाई होंगे:एक साल में पूरे देश में लागू कर दिए जाएंगे, चंडीगढ़ में होगा ट्रायल रन

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद के शीतकालीन सत्र में नए क्रिमिनल कानूनों को लेकर जानकारी दी थी। - Dainik Bhaskar

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद के शीतकालीन सत्र में नए क्रिमिनल कानूनों को लेकर जानकारी दी थी।

तीन नए क्रिमिनल जस्टिस कानून भारतीय न्याय संहिता (‌BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) की अधिसूचना 26 जनवरी तक जारी कर दी जाएगी। एक सरकारी अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि इन कानूनों को एक साल के भीतर पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा। अधिसूचित हो जाने पर नए कानूनों के तहत आपराधिक मामले दर्ज किए जा सकते हैं।

फुलप्रूफ ऑनलाइन सिस्टम सुनिश्चित करने के लिए चंडीगढ़ में एक ट्रायल रन किया जाएगा क्योंकि अधिकांश रिकॉर्ड इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल होंगे।

नए कानूनों को लेकर न्यायिक अधिकारियों की ट्रेनिंग के लिए गृह मंत्रालय पहले ही परामर्श कर चुका है। ट्रेनिंग भोपाल की एक एकेडमी में दी जाएगी।

तीनों कानून हाल ही में हुए संसद के शीतकालीन सत्र में पारित किए गए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 दिसंबर को कानूनों को अपनी सहमति दे दी। नए कानून क्रमशः भारतीय दंड संहिता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लेंगे।

तीन साल के भीतर पहले फैसले की उम्मीद
अधिसूचित होने के तीन साल के भीतर नए कानूनों के तहत पहला फैसला आने की उम्मीद है।

सरकार ने देश के सभी 850 पुलिस जिलों में तैनात करने के लिए 900 फोरेंसिक वैन खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे किसी भी अपराध के बाद फोरेंसिक साक्ष्य जल्दी इकठ्ठा किए जा सकेंगे और अपराध वाली जगह की की वीडियोग्राफी की जा सकेगी। ट्रेनिंग देने के लिए विभिन्न क्षेत्रों से करीब तीन हजार अफसरों की भर्ती की जाएगी।

एक साल में फोरेंसिंक ट्रेनिंग
तीन कानूनों के अधिसूचित होने के बाद, गृह मंत्रालय पुलिस अधिकारियों, जांचकर्ताओं और फोरेंसिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए एक ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू करेगा। ट्रेनिंग से इन कानूनों के सुचारू रूप से लागू करने, निष्पक्ष, समयबद्ध और साक्ष्य-आधारित जांच और जल्द सुनवाई सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। ट्रेनिंग प्रोग्राम में अगले नौ महीनों से एक साल के भीतर उन 90 प्रतिशत लोगों को शामिल कर लिया जाएगा जिन्हें ट्रेनिंग की जरूरत है।
सभी रिकॉर्ड डिजिटल होंगे
नए कानूनों के अनुसार, रिकॉर्ड बनाने और सप्लाय करने, जीरो FIR, FIR, चार्जशीट इलेक्ट्रॉनिक रूप में होगी। पीड़ितों को डिजिटल रूप में जानकारी दी जाएगी।

नए कानूनों में डायरेक्टोरेट ऑफ प्रोसिक्यूशन का प्रमुख प्रावधान जोड़ा है। यह विभिन्न प्राधिकरणों की पात्रता, कार्यों और शक्तियों को परिभाषित करेगा। जरूरी कॉर्डिनेशन सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न स्तरों के प्रोसिक्यूशन अफसरों के कर्तव्य और जिम्मेदारियां तय की गई हैं। जांच के दौरान प्रोसिक्यूशन अफसर नजर रखेगा।

हर जिले में प्रोसिक्यूशन अफसर की पोस्ट
सूत्रों ने कहा कि हर जिले में प्रोसिक्यूशन अफसर की पोस्ट क्रिएट की जाएगी। राज्य स्तर पर डायरेक्टर ऑफ प्रोसिक्यूशन और असिस्टेंट डायरेक्टर ​​​​​​​ऑफ प्रोसिक्यूशन​​​​​​​ की नियुक्ति के मानदंडों को कानूनों में संशोधित किया गया है।

राज्य तय कर सकेंगे लागू करने की समय सीमा
सूत्रों ने कहा कि राज्य अपनी क्षमता और संसाधनों के आधार पर इन प्रक्रियाओं के पूरी तरह लागू करने की अपनी समयसीमा बता सकते हैं। इसका पूरा मैनुअल केंद्र सरकार उनके साथ साझा करेगी। सरकार द्वारा लागू किया जा रहा इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) तीन नए कानूनों को लागू करने में बड़ी मदद करेगा।

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