नैतिकता का प्राण है गाँधी दर्शन: डॉ. बिस्सा

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अजित फाउंडेशन द्वारा आयोजित मासिक संवाद में डॉ गौरव बिस्सा का व्याख्यान

हर तरीके से पैसा बनाने की इच्छा, समाज के निकृष्ट जनों को नायक समझने की भूल और अंतर्मन में भ्रष्टाचार की स्वीकृति के कारण जीवन मूल्यों में गिरावट आ रही है. ये विचार इंजीनियरिंग कॉलेज के एसोसिएट प्रोफ़ेसर और मैनेजमेंट ट्रेनर डॉ. गौरव बिस्सा ने अजित फाउंडेशन द्वारा आयोजित “मासिक संवाद कार्यक्रम” में बतौर मुख्य वक्ता व्यक्त किये. डॉ. गौरव बिस्सा ने “नैतिकता, जीवन मूल्य और युवा विषयक” संवाद में गाँधी दर्शन को राष्ट्र का गौरव बताते हुए कहा कि साधन की पवित्रता और ट्रस्टीशिप सिद्धांत में विश्वास से ही देश परम वैभव पर पहुँच सकता है. धर्म और नैतिकता को एक मानते हुए बिस्सा ने कहा कि अपनी इन्द्रियों अर्थात सेन्स ऑर्गन्स पर नियंत्रण, सत्य के मार्ग का प्रयोग, बुरे कर्म को करने में लज्जा तथा क्षमा करने का भाव ही नैतिकता का मार्ग है. डॉ. बिस्सा ने “क्विक जनरलाइजेशन” को समझाते हुए कहा कि किसी कार्य को अधिक लोग करें इससे वह उत्तम या नैतिक नहीं हो जाता. अतः इस जनरलाइजेशन से बचना चाहिए. डॉ बिस्सा ने आधुनिक मैनेजमेंट प्रयोगों, एथिक्स आधारित गेम्स और अनेकानेक उदाहरणों से युवाओं को नैतिक आचरण की महत्ता समझाई.

कार्यक्रम अध्यक्ष व्यंग्यकार प्रो. डॉ. अजय जोशी ने कहा कि नैतिकता सिखाई नहीं जाती अपितु व्यवहार से सीखी जाती है. जोशी ने कहा कि युवाओं में नैतिक मूल्यों में गिरावट के पीछे मोबाइल और घटिया साहित्य का हाथ है अतः इस पर चिंतन आवश्यक है.

कार्यक्रम के समन्वयक तथा अजित फाउंडेशन के प्रभारी संजय श्रीमाली ने अजित फाउंडेशन के उद्देश्यों और नीति के बारे में बताया. श्रीमाली ने कहा कि अजित फाउंडेशन का यह नियमित प्रयास है कि उत्तम जनों के संवाद और अनुभव से युवओं को सीख मिले.
कार्यक्रम के अंत में राजेन्द्र जोशी ने सभी का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में रामगोपाल व्यास, राजाराम स्वर्णकार, गिरीराज पारीक, मोनिका यादव, सुनीता श्रीमाली, बी.एल. नवीन, महेश उपाध्याय, रामनारायण चौधरी, राजेन्द्र जोशी, मनन श्रीमाली, हर्षित दैया आदि उपस्थित रहे।

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