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पाकिस्‍तान हो या मिस्र… किसी को नहीं देंगे बिना शर्त पैसा, सऊदी अरब के ऐलान से टेंशन में कंगाल मुस्लिम देश

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पाकिस्‍तान हो या मिस्र… किसी को नहीं देंगे बिना शर्त पैसा, सऊदी अरब के ऐलान से टेंशन में कंगाल मुस्लिम देश

Saudi Arabia Pakistan Egypt Crisis: सऊदी अरब ने अपनी कर्ज देने की नीति में बदलाव क्‍या किया, पाकिस्‍तान और मिस्र जैसे मुस्लिम देशों के बुरे दिन आ गए हैं। सऊदी अरब अक्‍सर कर्ज की भीख मांगने वाले पाकिस्‍तान और मिस्र को जहां एक पैसा नहीं दे रहा है, वहीं उसने तुर्की को आर्थिक संकट से बचाने के लिए खजाना खोल दिया है।

हाइलाइट्स

  • सऊदी अरब ने पाकिस्‍तान से लेकर मिस्र तक को अरबों डॉलर की राशि बिना किसी शर्त के दी थी
  • अब सऊदी अरब ने ऐलान किया है कि वह अपनी नीति में क्रांतिकारी बदलाव कर रहा है
  • अब मिस्र और पाकिस्‍तान दोनों ही गंभीर आर्थिक संकट में घिर गए हैं लेकिन सऊदी पैसे नहीं दे रहा

इस्‍लामाबाद: तेल के अकूत भंडार से लैस सऊदी अरब ने दशकों तक मुस्लिम देशों में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए पाकिस्‍तान से लेकर मिस्र तक को अरबों डॉलर की राशि बिना किसी खास शर्त के दी। अब सऊदी अरब ने ऐलान किया है कि वह अपनी नीति में क्रांतिकारी बदलाव कर रहा है। सऊदी अरब मिस्र को अपना रणनीतिक सहयोगी मानता था और अरबों डॉलर की सहायता अब तक दी है। अब मिस्र और पाकिस्‍तान दोनों ही बेहद गंभीर आर्थिक संकट में घिर गए हैं लेकिन सऊदी अरब दोनों ही कंगाल देशों से दूरी बना रहा है। सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्‍मद बिन सलमान लगातार अब कड़ी शर्तें लगा रहे हैं और वह सब्सिडी को खत्‍म करने तथा सरकारी कंपनियों को प्राइवेट हाथों में देने की मांग कर रहे हैं।

न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक इसकी बड़ी वजह तेल से होने वाली सऊदी अरब की कमाई में गिरावट आई है। दरअसल, दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश सऊदी अरब साल 2022 में 28 अरब डॉलर के बजट सरप्‍लस में था और इसकी वजह यह थी कि यूक्रेन युद्ध के बाद तेल की कीमतों में भारी बढ़ोत्‍तरी हुई। इस कमाई के बाद भी सऊदी अरब मिस्र, पाकिस्‍तान और लेबनान जैसे कर्ज मांगने वाले देशों के साथ सख्‍ती बरत रहा है। सऊदी अरब अभी भी विदेश में पैसा भेज रहा है लेकिन उसका उद्देश्‍य अब लाभ के लिए अंतरराष्‍ट्रीय निवेश है। इसके अलावा अपने देश में इलेक्ट्रिक वाहन जैसे उद्योगों को गति देना है।

यूएई की राह पर सऊदी अरब को ले जा रहे प्रिंस

सऊदी अरब के वित्‍त मंत्री मोहम्‍मद अल जदान ने जनवरी में दावोस में कहा था, ‘पहले हम सीधे सहायता देते थे और पैसा जमा करते थे जिसमें कोई शर्त नहीं होती थी। हम अब इसे बदल रहे हैं। हम बहुपक्षीय संस्‍थाओं के साथ काम कर रहे हैं और कहते हैं कि हमें सुधार देखना है।’ इस बदलाव के बाद जहां सऊदी और मिस्र के विशेषज्ञों में जुबानी जंग शुरू हो गई। मिस्र सऊदी अरब और यूएई के पैसे पर बहुत ज्‍यादा निर्भर है। इसके बाद दोनों देशों के अधिकारियों ने मामले को सुलझाने की कोशिश की लेकिन इसमें बदलाव नहीं होने जा रहा है।

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सऊदी प्रिंस ने अपने पिता के गद्दी संभालने के बाद देश को तेल की निर्भरता से कम करने की कोशिश की है। अब वह इस परंपरा से जुड़े इस्‍लामिक देश को बिजनस और संस्‍कृति का गढ़ बनाना चाहते हैं। वह अब अपने साथी अरब देशों जैसे यूएई और कतर के मॉडल को अपने देश में लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे वह अपने अंतरराष्‍ट्रीय प्रभाव को भी बढ़ाना चाहते हैं। खाड़ी देशों के पास इस समय बहुत ज्‍यादा पैसा है और अभी उन्‍होंने तुर्की को 5 अरब डॉलर की मदद देने का ऐलान किया है।

सऊदी ने शहबाज शरीफ और नवाज शरीफ को बुलाया

इससे तुर्की में सऊदी का प्रभाव बढ़ गया है जो उसका धुर विरोधी हुआ करता है। मोहम्‍मद बिन सलमान अब सऊदी फर्स्‍ट की नीति पर चल रहे हैं और देश में राष्‍ट्रवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। सऊदी के इस बदलाव से पाकिस्‍तान जैसे देशों की मुश्किलें बढ़ गई हैं और उसे आईएमएफ से लोन तक नहीं मिल पा रहा है। आईएमएफ ने अब सऊदी और यूएई से लोन देने से पहले गारंटी मांग ली है। पाकिस्‍तान डिफॉल्‍ट होने की कगार पर है और अब सऊदी प्रिंस ने पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनके भाई नवाज शरीफ को उमरा के बहाने बुलाया है।

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