पूर्वोत्तर राष्ट्रीय नाट्य समारोहतीसरे दिन हुआ मॉनो उन्थ मुखोर क्षण का मंचन

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पूर्वोत्तर राष्ट्रीय नाट्य समारोह
तीसरे दिन हुआ मॉनो उन्थ मुखोर क्षण का मंचन
बीकानेर, 16 मई। आजादी का अमृत महोत्सव के तहत राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा आयोजित पूर्वोत्तर राष्ट्रीय नाट्य समारोह के तीसरे दिन सोमवार को रविन्द्र रंगमंच पर उपन्यासकार येशे दोरेजी थोंग्चे और निर्देशक गुणमणि बरुआ के बहुभाषी नाटक मॉनो उन्थ मुखोर हृदोय का मंचन हुआ। लगभग एक घंटा 40 मिनट के नाटक का दर्शकों ने जमकर लुत्फ उठाया। इस श्रृंखला में मंगलवार को आशापुरा नाट्य संस्थान की नौटंकी शहजादी रम्मत का मंचन होगा। समारोह संयोजक रामजी बाली ने बताया कि सोमवार को मंचित नाटक में धुव्र पंडित ने दीपक पंडित, पुरोस्मिता बोदौलाई ने यामा, भास्कर सैकिया ने रिन्सिन, प्रणामी मोहन ने रिरिंग जंगमू, हेमांगा रंजन बोरा ने ताड़क, दीपाशा फुकन ने यादो, तरुण तीर्था सैकिया ने जिंगमो, परस्मिता बरुआ ने जंगमु, हर्षदीप सिंह जड़ेजा ने साहेब, रूपज्योति लहयन ने ताकर और इंदिरा कालिता ने मांग्फा की भूमिका निभाई। बाहागी बरुआ, अंजेलिना बरुआ, कृष्णाश्री भुयन और भार्गव गोस्वामी ने कोरस में संगत की। संगीत गुणमणि बरुआ और नयनमोमी सैकिया ने दिया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए संजय पुरोहित ने नाटक के कथानक के बारे में बताया। इस दौरान रंगकर्मी सुधेश व्यास, दयानन्द शर्मा, डॉ. असित गोस्वामी, बुलाकी सेवग, अशोक जोशी, तरुण गौड़, भरत राजपुरोहित, अमित गोस्वामी, संगीता शर्मा, सौरभ कुमावत, काननाथ, मांगीलाल गोदारा, विकास शर्मा, प्रहलाद आदि मौजूद रहे।

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