पूर्व सेना प्रमुख की किताब में दावा:अग्निपथ योजना ने तीनों सेनाओं को चौंकाया; कांग्रेस बोली- बिना चर्चा किए स्कीम लाई सरकार

जनरल मनोज मुकुंद नरवणे 31 दिसंबर 2019 से 30 अप्रैल 2022 तक सेना प्रमुख के रूप में कार्यरत थे।
पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की एक किताब पब्लिश हुई है, जिसमें उन्होंने अग्निपथ योजना को लेकर बड़ा दावा किया है। इसमें उन्होंने लिखा है कि सरकार की अग्निपथ योजना के ऐलान ने तीनों सेनाओं (आर्मी, नेवी और एयरफोर्स) को चौंका दिया था।
इस दावे को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मंगलवार (19 दिसंबर) को नरवणे के दावे के बाद कहा- अग्निपथ योजना बिना किसी के विचार विमर्श के लाई गई।

जनरल नरवणे की किताब 2024 में लॉन्च होगी।
2020 में पीएम को टूर ऑफ ड्यूटी स्कीम का प्रस्ताव दिया गया था
जनरल मनोज मुकुंद नरवणे 31 दिसंबर 2019 से 30 अप्रैल 2022 तक सेना प्रमुख के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने अपनी किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ में लिखा कि उन्होंने 2020 में PM मोदी को ‘टूर ऑफ ड्यूटी’ स्कीम का प्रस्ताव दिया था। इसमें अग्निवीरों की तरह ही जवानों को कुछ समय के लिए भर्ती करने का सुझाव दिया था, जो सिर्फ इंडियन आर्मी के लिए मान्य था।
नरवणे ने लिखा- कुछ समय बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अग्निपथ योजना लेकर आया। इसमें थल सेना के साथ-साथ वायु सेना और नौसेना को भी शामिल किया गया। इस योजना ने आर्मी से ज्यादा वायु सेना और नौसेना को चौंकाया।
सेना ने 75% जवानों को सेवा में बनाए रखने की अपील की थी
नरवणे ने किताब में लिखा कि अग्निपथ योजना को लेकर बाद में कई बार चर्चा हुई। इसमें सेना ने 75% जवानों को सेवा में बनाए रखने और 25% को सेना से मुक्त करने की बात कही थी। लेकिन जब जून 2022 में सेना की अग्निपथ योजना शुरू हुई तो सिर्फ 25% अग्नीवीर को ही कार्यकाल के बाद 15 साल तक सेवा में रखने का फैसला लिया गया।
वेतन बढ़ाने की भी की थी सिफारिश
नरवणे ने अपनी किताब में लिखा कि अग्नीवीरों का वेतन 20,000 रुपए प्रति माह फाइनल किया गया था। लेकिन फिर सेना इनके वेतन में वृद्धि की सिफारिश की थी। सेना का मानना था कि अग्नीवीर देश के लिए अपनी जान भी देने को तैयार थे। सेना की सिफारिशों के बाद वेतन बढ़ाकर 30,000 रुपए किया गया।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मंगलवार (19 दिसंबर) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा- अग्निपथ योजना बिना किसी विचार-विमर्श के लाई गई विनाशकारी नीति थी। नरवणे ने अपनी किताब में इस बात को कन्फर्म किया है। संसद के 141 निलंबित सांसदों की खबरों के बीच ये खबर भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
नरवणे की किताब में दावा- 16 जून 2020 को जिनपिंग भूल नहीं पाएंगे, हमने उनके 40 सैनिक मारे थे
पूर्व आर्मी चीफ नरवणे ने अपनी किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ में लिखा- 16 जून, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का जन्मदिन है और वे इसे जल्दी नहीं भूल पाएंगे, क्योंकि 2020 में इसी दिन 20 साल में पहली बार चीन और उसकी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को सबसे घातक मुठभेड़ का सामना करना पड़ा था।
उन्होंने लिखा कि चीन ने छोटे पड़ोसियों को डराने-धमकाने के लिए वुल्फ वॉरियर कूटनीति और सलामी-स्लाइसिंग रणनीति अपनाई। लेकिन गलवान में भारतीय सेना ने चीन और दुनिया को दिखा दिया कि बस, अब बहुत हो गया।







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