प्राईवेट स्कूल्स के आरटीई के भुगतान को लेकर शिक्षा सचिवालय में प्राईवेट एज्यूकेशनल इंस्टीट्यूट्स प्रोसपैरिटी एलायंस (पैपा) द्वारा ज्ञापन देकर शीघ्र समाधान की मांग

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बीकानेर। प्राईवेट स्कूल्स के आरटीई के भुगतान के संबंध में मंगलवार को जयपुर स्थित शिक्षा सचिवालय में प्राईवेट एज्यूकेशनल इंस्टीट्यूट्स प्रोसपैरिटी एलायंस (पैपा) द्वारा ज्ञापन देकर शीघ्र समाधान की मांग की गई। पैपा के प्रदेश समन्वयक गिरिराज खैरीवाल के मुताबिक शासन सचिव को संबोधित ज्ञापन उनकी अनुपस्थिति में शासन उप सचिव गोविंद नारायण दाधीच को दिया गया। उन्होंने बताया कि इस ज्ञापन में आरटीई के भुगतान संबंधित समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु 6 बिंदुओं पर शिक्षा विभाग का ध्यान आकर्षित किया गया है। ज्ञापन में 30 नवंबर 2019 एवं उसके बाद के बैरियर्स हटाने की मांग को पुरजोर रूप से प्रस्तुत किया गया।
ज्ञापन में बताया गया है कि आरटीई के अंतर्गत सत्र 2020-21 के तहत भुगतान के लिए लागू की गई प्रक्रिया आधी अधूरी थी और वैधानिक भी नहीं थी। बिना दिशा निर्देशों एवं गाईडलाईंस के जारी इस प्रक्रिया के तहत लगभग पचास प्रतिशत स्कूल पोर्टल पर आनलाईन शिक्षण सत्यापन प्रक्रिया के अंतर्गत अपने अपने स्कूल की रिपोर्ट अपलोड नहीं कर सके। हजारों स्कूल्स द्वारा इस संबंध में शिक्षा विभाग को जरिए ईमेल अपनी मजबूरी से अवगत भी करा दिया था। अतः सत्र 2020-21 के अंतर्गत अध्ययन करने वाले भुगतान से वंचित समस्त स्टूडेंट्स, जो स्कूल अपरिहार्य कारणों से जानकारी अपडेट नहीं कर सके और जिन्होंने पोर्टल को भूलवश गलत फीड कर दिया का भुगतान बिना किसी शर्त के अतिशीघ्र ही कराने के निर्देश जारी कराएं। सत्र 2020-21 के अंतर्गत आरटीई का भौतिक सत्यापन सत्र 2021-22 के भौतिक सत्यापन के साथ ही कर लिया गया था। इस सत्यापन प्रक्रिया के दौरान पात्र समस्त स्टूडेंट्स को शीघ्र से शीघ्र भुगतान के आदेश शिक्षा विभाग के माध्यम से तुरंत प्रभाव से जारी कराने की व्यवस्था की जानी चाहिए। ज्ञापन में कहा गया है आरटीई प्रक्रिया शुरू होने से लेकर अब तक भुगतान से वंचित या अन्य किसी भी तकनीकी समस्या के कारण पोर्टल पर भौतिक सत्यापन रिपोर्ट दर्ज नहीं कर सकने वाले स्कूल्स को एक अवसर और दिलवाया जाना चाहिए। ज्ञापन में मांग की गई है कि आरटीई के अंतर्गत प्री प्राईमरी कक्षाओं में अध्ययन कर रहे स्टूडेंट्स की फीस का भुगतान भी किया जाना चाहिए। ज्ञापन में मांग की गई है कि
जिन स्कूल्स का सत्र 2023-24 का पहले क्लेम बिल का स्वीकृति आदेश बजट नहीं होने के कारण से नहीं बन सका है, वे स्कूल्स सेकंड बिल जनरेट नहीं कर पाते हैं, अतः पोर्टल पर ऐसी व्यवस्था की जाए, जिससे यह विसंगति नहीं रहे और ऐसे विद्यालय भी बिल जनरेट कर सके। ज्ञापन में यूनिट कॉस्ट में समुचित वृद्धि की मांग करते हुए बताया गया है कि यूनिट कॉस्ट पिछले तीन सत्रों से यथावत है, अतः यूनिट कॉस्ट का निर्धारण उचित तरीके से करवाते हुए यूनिट कॉस्ट में वृद्धि की जानी चाहिए। खैरीवाल के नेतृत्व में शासन उप सचिव गोविंद नारायण दाधीच से मिले प्रतिनिधि मंडल में रमेश बालेचा एवं लोकेश कुमार मोदी भी सम्मिलित थे।

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