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प्रेमचंद आधुनिक हिंदी साहित्य के पहले सत्याग्रही हैं : मधु आचार्य

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प्रेमचंद आधुनिक हिंदी साहित्य के पहले सत्याग्रही हैं।मधु आचार्य

प्रेमचंद जयंती के उपलक्ष में आज हिंदी विभाग में संवाद का आयोजन रखा गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता विख्यात आईसीसी साहित्यकार व पत्रकार मधु आचार्य “आशावादी” ने की।

कार्यकम का आगाज विषय प्रभारी डॉ सुचित्रा कश्यप व मधु आचार्य के कर कमलों से सरस्वती पूजन व दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

प्रेमचंद का दलित साहित्य को अवदान पर डॉ. अनिल कुमार बारिया ने अपने उद्धबोधन में प्रेमचंद को दलित संवेदनाओं के पैरोकार एवं प्रस्थान बिंदु बताया।
विभाग के संकाय सदस्य श्री निर्मल रांकावत ने प्रेमचन्द की साहित्यिक अवधारणाओं व सौंदर्य की साहित्यिक व्याख्या की। संकाय सदस्य श्रीअजीत कुमार मोदी ने प्रेमचंद साहित्य की प्रासंगिकता पर चर्चा करते हुए गांधी व प्रेमचंद को एक व्यक्तित्त्व माना।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मधु आचार्य ने साहित्य व संवेदना का सहजात सम्बंध बताते हुए साहित्य को सत्ता के प्रतिरोध का शस्त्र बताते हुए प्रेमचंद को प्रथम सत्याग्रही साहित्यकार कहा।

इस अवसर पर अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ दिव्या,डॉ अनिता गोयल, डॉ सुमन राठौड़,डॉ. शशिकांत आचार्य, घनश्याम बिठू,श्रीराम नायक
उपस्थित थे।
कार्यक्रम का संचालन विभाग के श्री ब्रजरतन जोशी ने किया ।
कार्यक्रम के अंत मे हिंदी विभाग की विषय प्रभारी डॉ सुचित्रा कश्यप ने सबका धन्यवाद ज्ञापित कर साथियों का आभार जताया।

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