बाहर गाली और अंदर पैर छूने वाले नेताजी हुए एक्सपोज:नेताजी का CM फेस के लिए खुद का सर्वे, मंत्रियों के खिलाफ विरोधियों ने जुटाए डॉक्युमेंट

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बाहर गाली और अंदर पैर छूने वाले नेताजी हुए एक्सपोज:नेताजी का CM फेस के लिए खुद का सर्वे, मंत्रियों के खिलाफ विरोधियों ने जुटाए डॉक्युमेंट
राजनीति के समीकरण और नेताओं का व्यवहार समझना काफी मुश्किल है। सत्ताधारी पार्टी के एक नेता प्रदेश के मुखिया की राजनीति को गरियाने का कोई मौका नहीं छोड़ते। कई बार गालियां तक दे देते हैं। कई बार खुले आम क्रांति का बिगुल बजाने तक की चेतावनी देते रहते हैं। लेकिन, इस बार ये नेताजी फंस गए। पिछले दिनों प्रदेश के मुखिया से मिलने सत्ता के बड़े घर पहुंच गए। जब नेताजी मुलाकात करने गए तो पीछे-पीछे एक मंत्री भी पहुंच गए। बाहर गालियां देने वाले नेताजी ने प्रदेश के मुखिया के जिस अंदाज में चरण छुए, उससे लगा ही नहीं कि बाहर ये उतना विरोध करते हाेंगे। मंत्री को वहां देख नेताजी खुद सन्न हो गए। अब सफाई में बोले भी तो क्या…कहने लगे उम्र में बड़े हैं, इसलिए सम्मान तो बनता ही है, लेकिन इस घटना ने उनकी लीडरशिप और स्टैंड को लेकर पहले वाली बात नहीं रही। बाहर गाली और बंद कमरे में चरण छूने वाली बात सार्वजनिक हो चुकी है।

जनता से पूछा, नेताजी सीएम का चेहरा हों तो क्या संभावना?
चुनावी साल नजदीक आते ही पार्टियों में फिलहाल सर्वे का मौसम चल रहा है। विपक्षी पार्टी में इन दिनों कई नेता सर्वे करवा रहे हैं। सीएम चेहरे की दौड़ में शामिल एक नेताजी भी सर्वे करवा रहे हैं। इस सर्वे के लिए पिछले दिनों कई लोगों से फोन पर भी फीडबैक लिया गया। पहले खुद के इलाके के विधायक के कामकाज, आगे जीतने वाला चेहरा और फिर सवाल सीएम चेहरे पर आ गया। इसके बाद सीधे मारवाड़ से जुड़े विपक्षी पार्टी के नेताजी का नाम लेकर राय जानी जा रही है कि अमुक नेताजी सीएम चेहरा हों तो क्या रहेगा। इस तरह के सर्वे दूसरे नेता भी अपने स्तर पर करवा रहे हैं। चुनाव से पहले सर्वे से जनमत की थाह लेना टेस्टेड तरीका है।

जयपुर-दिल्ली के बीच विधायकों से मुलाकातें
सत्ताधारी पार्टी में चल रही खींचतान के बीच विरोधी खेमा पिछले काफी समय से सुपर एक्टिव मोड में है। युवा नेता की विधायकों से लगातार मुलाकातों ने सत्ता खेमे के कान खड़े कर दिए हैं। युवा नेता ने सियासी मुलाकातों के लिए देश और प्रदेश की राजधानी के बीच के हाईवे को चुना है। पिछले दिनों कई विधायकों ने युवा नेता से ऑन द व्हील मुलाकातें की हैं। इस बात की जानकारी सत्ता खेमे को भी है। सियासी जानकार इन मुलाकातों को आने वाले दिनों की सियासी आहट के तौर पर देख रहे हैं। कई विधायकों को भविष्य की राजनीति के लिए समीकरण सेट करना हैं, ऐसे में युवा नेता से बनाकर रखना चाहते हैं।

चुनावी साल से पहले बड़े बदलावों के इंतजार में कई नेता
चुनावी साल से पहले सत्ताधारी पार्टी के कई नेता बड़े बदलावों का इंतजार कर रहे हैं। मंत्रिमंडल फेरबदल के इंतजार में कई विधायक सपने देखने लगे हैं। इन नेताओं का सपना देखने का अपना गणित है। इसके लिए कई विधायक दिल्ली से लेकर जयपुर तक एक्टिव हैं। कुछ मंत्रियों के खिलाफ पहले ही दस्तावेज दिल्ली पहुंचा दिए हैं, जबकि कुछ के खिलाफ अब पहुंचाने की तैयारी है। सियासी मौसम वैज्ञानिक के रूप में चर्चित ये नेता जितने समय मिल जाए उतने सत्ता सुख में भी राजी हैं।

संकटमोचक विधायकों का क्यों हुआ मोहभंग?
सत्ताधारी पार्टी में कई नेता इन दिनों खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। इनमें संकट मोचक बने कुछ विधायक भी शामिल हैं। सत्ता का हिस्सा होने के बाद भी मन में गहरी टीस है। अब भी लग रहा है कि उन्हें अब तक वैसा मान-सम्मान नहीं मिला जैसा वे चाहते थे। जी-6 के नाम से सियासी हलकों में चर्चित इन विधायकों ने अब पिछले दिनों सत्ता खेमे के विरोधी नेता से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद से ग्रुप के सुर बदले हुए हैं। जी-6 के लीडर के भी सुर सियासी हो रहे हैं। आगे अगर कुछ सियासी घटनाक्रम होता है तो जी-6 अपने विवेक का नए सिरे से इस्तेमाल करेगा, मतलब खूंटे से बंधकर नहीं रहेगा।

पार्टी की सरकार होते हुए ऑफिस छिन गए, सुनने वाला कोई नहीं
सत्ताधारी पार्टी में तीन फ्रंटल ऑर्गेनाइजेशन प्रदेश में सरकार होने के बावजूद बिना दफ्तर हो चुके हैं। चार दशक से जिस जगह इनके दफ्तर थे वहां से इन्हें रवाना कर दिया गया, इन संगठनों का जो सामान था, उसे नेताओं के फार्म हाउस पर रखना पड़ा। आगे कब और कहां इन्हें ठिकाना मिलेगा इसके बारे में कुछ भी साफ नहीं है। पार्टी के यूथ से जुड़े संगठनों को इस तरह से बेदखल करने पर पार्टी के भीतर ही सवाल उठ रहे हैं। एक मंत्री खुलकर विरोध कर चुके, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकला है। पार्टी ने तीनों संगठनों के ऑफिस को सरेंडर करके नया बंगला लिया, उस पर वॉर रूम बना दिया और ठेंगा दिखा दिया। कई नेता कह रहे हैं कि अगर विपक्ष में रहते हुए इस तरह ऑफिस खाली करवाया जाता तो प्रदेश भर में मुद्दा बना देते, लेकिन अपनों को कौन क्या कहे?

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