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बीकानेर ! नियमों की आड़ लेकर आंकड़ों में हेरफेर:लम्पी से बीकानेर में 3.50 लाख गायें मरी, मुआवजा सिर्फ 1833 का ही मिला

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नियमों की आड़ लेकर आंकड़ों में हेरफेर:लम्पी से बीकानेर में 3.50 लाख गायें मरी, मुआवजा सिर्फ 1833 का ही मिला

पिछले साल लम्पी की वजह से पशुपालकों को कितना नुकसान हुआ ये किसी से छिपा नहीं है। पिछले हफ्ते सरकार ने प्रदेश के 42 हजार पशुपालकों को 175 करोड़ का मुआवजा बांटा। इसमें सरकार ने बीकानेर में 1838 गायें मृत मनी हैं। इसके एवज में 1669 पशुपालकों को 7.33 करोड़ का मुआवजा मिला है।

बीकानेर में लम्पी के प्रभाव की पड़ताल की तो सामने आया कि जिले में करीब साढ़े तीन लाख गायों की लम्पी से मौत हुई। यानी सरकार ने सिर्फ 0.5 प्रतिशत गायों का ही मुआवजा दिया है। इस दौरान कई ऐसे पशुपालक भी मिले जिनका दावा है कि सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद उनको मुआवजा नहीं मिला।

पिछले साल पश्चिमी राजस्थान के जिलों में लम्पी का प्रकोप फैला था। इस वजह से बड़ी संख्या में गायों की मौत हुई थी। मुख्यमंत्री आशोक गहलोत ने बजट भाषण में लम्पी से मृत गायों का मुआवजा देने का ऐलान किया था। इसके बाद मुआवजा देने के नियम जारी हुए तो अधिकतर पशुपालक अपात्र हो गए। सरकार ने सिर्फ उन्हीं पशुपालकों को मुआवजे के लिए पात्र माना, जिन्होंने लम्पी से पीड़ित पशुओं का इलाज सरकारी डिस्पेंसरी में कराया था। सर्वे में भी गड़बड़ी हुई।

सरकार ने पटवारियों और गिरदावरों की बजाय पशु अस्पतालों के कंपाउंडरों से सर्वे कराया, जिसकी वजह से सही आंकड़े नहीं पहुंचे। राज्य सरकार ने 75819 गायों की मौत लम्पी से मानी। इसमें भी नियम लगा दिया कि दूध न देने वाली और गोशालाओं की गायों का मुआवजा नहीं मिलेगा। इससे 33209 गायों के मालिक भी मुआवजे की लिस्ट से बाहर हो गए। इसके बाद भी रजिस्ट्रेशन और अन्य कागजी औपचारिकताओं में पूरी प्रक्रिया इतनी उलझ गई कि बहुत से पशुपालकों को मुआवजा नहीं मिला। वहीं, बहुत से पशुपालक ऐसे हैं जिनकी 15 से 20 गायों की मौत हुई, लेकिन मुआवजा सिर्फ 2 गायों का ही मिला। पशुपालकों का कहना है कि प्रति गाय सिर्फ 40 हजार का मुआवजा मिला है। इतनी राशि में अच्छी नस्ल की दुधारू गाय खरीदना मुश्किल है।

पशुपालकों का दर्द : 15 गायें मरीं, पेपर भी पूरे, लेकिन एक का भी नहीं मिला मुआवजा

केस-1 काेलायत के भेलू गांव के हमीरसिंह के पास 48 गायें थीं। पिछले साल लम्पी से उनकी 15 गायें मर गईं। सरकारी कंपाउंडर से ही इलाज हुआ। बाड़मेर से गॉट पॉक्स मंगाकर वैक्सीनेशन भी कराया, लेकिन मरी गायों का एक रुपए मुआवजा नहीं मिला।

केस-2 नाेखा के अणखीसर गांव के मघाराम मेघवाल की दो गायें मरीं। पशुपालन विभाग के ही कंपाउंडर नानूराम ने उनका इलाज किया था। फिर भी लम्पी से मरी गायों के लिए मुआवजे के नाम पर दिए गए रुपए इन तक नहीं पहुंचे।

केस-3 अणखीसर गांव के ही मनफूल जाट के पास 7 गायें थीं। तीन मर गई। उसी सरकारी नानूराम कंपाउंडर से इलाज कराया। लम्पी के मुआवजे के लिए मृत गायों का रजिस्ट्रेशन भी कराया। इसके बावजूद इनको एक भी रुपए मुआवजा नसीब नहीं हुआ।

केन्द्र ने 75810 मृत गाय मानीं, राज्य ने 41900 काे दिया मुआवजा

मुख्यमंत्री अशाेक गहलाेत ने बजट भाषण में ही पशुओं के मरने पर 40 हजार रुपए प्रति पशु देने का एलान किया था। बाद में इसी स्कीम काे लम्पी में शामिल कर दिया। केन्द्र सरकार ने राजस्थान में 75819 गायाें की माैत लम्पी से मानी क्याेंकि राज्य से आंकड़े ऐसे ही पहुंचे। इसमेंं भी कांट-छांट हो गई। 33209 गायाें काे या ताे गोशालाओं का मान लिया या आवारा। कुछ काे गैर दुधारू माना क्याेंकि मुआवजा दुधारू पशुओं काे ही देने की बात कही गई। इसके लिए 175 कराेड़ रुपए देने का दावा किया गया। बीकानेर में 1838 मृत गायाें के 1669 पशुपालकाें काे सात कराेड़ 33 लाख रुपए देने का दावा सरकार कर रही है।

लम्पी से मरे पशुओं के इलाज से संबंधित दस्तावेज और बाद में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया हुई थी। जिसने भी जनाधार और सही मोबाइल नंबर दर्ज कराए उन सभी को मुख्यमंत्री ने राहत दी है। जो लोग वंचित हैं उन्होंने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया होगा। हालांकि अभी कुछ लोगों को मुआवजा मिलना बाकी है क्योंकि उनके दस्तावेज अधूरे हैं। -डॉ. एनएम सिंह, डायरेक्टर एलएमपी, पशु पालन विभाग, जयपुर

किसान बोले – हमें 40 हजार रुपए मत दाे…

गाय खरीदकर दे दाेअंग्रेजी में कहावत है, सम थिंग बेटर देन नथिंग- ये कहावत सीएम के मृत पशुओं के लिए मिले मुआवजे पर चरितार्थ हाे रही है। किसी भी पशु बाजार में एक स्वस्थ्य अमरीकन गाय 40 हजार में नहीं मिलेगी। इसलिए काकड़ा गांव के सरपंच श्रीभगवान ने जवाब दिया कि सरकार 40-40 हजार रुपए में गाय खरीदकर बताए ताे मैं जानूं। आज कल लाेगाें के पास अमरीकन गाय हैं। सरकार 40 हजार रुपए का झुनझुना पकड़ा रही है। उधर जिसे मुआवजा मिला उसने कहा, सरकार ने जाे दे दिया वही बहुत है।

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