बेटियां अनमोल हैं : डॉ गुंजन सोनी, राष्ट्रीय बालिका दिवस पर अधिकारियों ने नर्सिंग विद्यार्थियों से किया संवाद

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बीकानेर, 24 जनवरी। राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर राजकीय नर्सिंग कॉलेज, पीबीएम अस्पताल परिसर में “बेटियां अनमोल है” विषय पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने नर्सिंग विद्यार्थियों से संवाद किया। जिला पीसीपीएनडीटी प्रकोष्ठ तथा आईईसी प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में प्राचार्य मेडिकल कॉलेज डॉ गुंजन सोनी ने कहा कि बेटियां इसलिए अनमोल है कि वे जीवन पर्यंत अपने माता-पिता का ख्याल रखती हैं, बेटे रखे ना रखे। इसलिए वह बेटियों से संबंधित किसी प्रकार के कार्य को हमेशा प्राथमिकता से आगे बढ़ाते हैं। डॉ सोनी ने बताया कि 24 जनवरी 1966 को इंदिरा गांधी ने भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में देश की बागडोर संभाली थी और गर्व की बात यह भी है कि आज देश की राष्ट्रपति और राज्य की मुख्य सचिव भी महिला है। संयुक्त निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं डॉ देवेंद्र चौधरी ने मुखबिर योजना के तहत डिकोय ऑपरेशन में आगरा जाकर कन्या भ्रूण हत्यारों को पकड़ने के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि महिलाएं देवियों के रूप में पूजनीय है तो घर पर भी महिलाओं और बालिकाओं को उनके अधिकार व सम्मान मिलने चाहिए। पीबीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ पी के सैनी ने राष्ट्रीय बालिका दिवस की शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए श्रेष्ठ नर्सिंग सेवाओं द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में बालिकाओं का परचम लहराने का आह्वान किया।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मोहम्मद अबरार पंवार ने मुखबिर योजना के बारे मे बताया कि गर्भस्थ शिशु के लिंग जांच करने या कन्या भ्रूण हत्या से संबंधित किसी प्रकार की सूचना यदि किसी के पास हो तो वह विभाग के टोल फ्री नंबर 104 व 108 पर कॉल करके बता सकते हैं। राज्य सरकार द्वारा ऐसे मुखबिर का नाम गुप्त रखते हुए ₹3,00,000 पुरस्कार का प्रावधान किया गया है। जिला टीबी अधिकारी डॉ चंद्रशेखर मोदी ने पीसीपीएनडीटी एक्ट 1994 के तकनीकी पहलुओं और लिंगानुपात में आए दशकीय परिवर्तनों की जानकारी दी। आरसीएचओ डॉ राजेश कुमार गुप्ता ने मातृत्व स्वास्थ्य से बालिकाओं के अधिकारों व पोषण के अंतर्संबंध पर प्रकाश डाला। इस अवसर कॉलेज के प्राचार्य अब्दुल वाहिद तथा जीएनएम नर्सिंग कोर्स कर रही बालिकाओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन जिला आईईसी समन्वयक मालकोश आचार्य ने किया, सहयोग भोजराज मेहरा का रहा।

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