महाविद्यालय में दो दिवसीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन: तनाव प्रबंधन तथा आत्म विश्लेषण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा

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महाविद्यालय में दो दिवसीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन तनाव प्रबंधन तथा आत्म विश्लेषण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा

बीकानेर। भीमसेन चौधरी राजकीय महाविद्यालय लूणकरणसर में दिनांक 26.11.24 से 27.11.24 तक दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन सफलतापूर्वक हुआ महाविद्यालय प्राचार्य डॉक्टर आर आर झा ने स्वागत उद्बोधन के साथ ही बताया कि उनकी पहल व प्रेरणा से महाविद्यालय में प्रथम बार स्मार्ट रूम की स्थापना हुई है।यह महाविद्यालय की एक महती आवश्यकता है । मुख्य अतिथि प्रोफेसर विजय श्री विशिष्ट अतिथि श्री प्रोफ़ेसर संजू श्रीमाली तथा प्राचार्य प्रोफेसर आरआर झा ने इसका उद्घाटन किया। ‘योग्यता अभिवृद्धि में आत्म विस्तार का योगदान’ विषयक कार्यशाला में डॉ विजय श्री ने तनाव प्रबंधन पर बोलते हुए बताया कि तनाव शरीर के लिए एक प्राकृतिक रक्षा प्रणाली है यह शरीर के लिए उतना ही आवश्यक है जितना किसी बिजली के उपकरण के लिए बिजली। लेकिन जिस प्रकार उच्च वोल्टेज पर उपकरण खराब हो जाते हैं वैसे ही तनाव यदि अनियंत्रित और बार-बार होता है तो यह शरीर के लिए हानिकारक होता है।उन्होंने तनाव प्रबंधन के लिए कई गुर तथा 4A’s मंत्रा बताया l ग्रोथ हार्मोन व स्ट्रेस हार्मोन का चिकित्सकीय दृष्टिकोण भी बताया। उन्होंने पेपर गेम के जरिए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया कि हर समस्या का हल होता है। प्रोफेसर संजू श्रीमाली ने आत्मनियन्त्रण विषय पर कहा कि कायिक, वाचिक और मानसिक नियन्त्रण आत्मनियन्त्रण की तीन अवस्थाएं हैं।
हमें हमारे किये का विश्लेषण करना चाहिए और यदि लगे कि हमने किसी को दु:ख पहुंचाया है तो क्षमा मांगने में संकोच नहीं करना चाहिए।
इससे अपना व्यक्तित्व बडा बनता है।
कार्यशाला में प्रथम दिन अतिथि शिक्षाविदों यथा डॉ. अंजलि शर्मा, डॉ. हिमांशु काण्डपाल एवं लूणकरणसर उपकोषागार मेंसहायक लेखाधिकारी श्री मदन पारीक के व्याख्यान हुए। कार्यशाला के अंत में विद्यार्थियों को सर्टिफिकेट प्रदान किए गए।महिला प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. श्रद्धा के निर्देशन में आहूत इस कार्यशाला में मंच संचालन श्री गोविन्द प्रसाद सारस्वत ने किया। एनएसएस प्रभारी श्री दीपक चाहर ने बाहरी व्यवस्थाओं को संभाला।महाविद्यालय प्राचार्य प्रो. रजनीरमण झा ने कार्यशाला के सफलतापूर्वक आयोजन पर संतोष जताया एवं ऐसे आयोजनों की निरंतर आवश्यकता पर बल दिया।

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