‘मारते-मारते पुलिसवालों ने मेरे ऊपर 3 लाठियां तोड़ दी थी’:कारसेवक बोले- मेरी रीढ़ की हड्डी टूट गई थी; अब अयोध्या नहीं बुलाए जाने की पीड़ा

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‘मारते-मारते पुलिसवालों ने मेरे ऊपर 3 लाठियां तोड़ दी थी’:कारसेवक बोले- मेरी रीढ़ की हड्डी टूट गई थी; अब अयोध्या नहीं बुलाए जाने की पीड़ा

जयपुर

अयोध्या में 22 जनवरी को भव्य राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए पूरे देश से कारसेवकों को बुलाया गया है। जयपुर के पवन शर्मा (68) भी उन कारसेवकों में शामिल थे, जिन्होंने पुलिस की लाठियां खाईं। उस पिटाई से उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई थी और वह 9 महीने तक हॉस्पिटल में रहे। उन्होंने बताया- मारते मारते पुलिसवालों ने मेरे ऊपर तीन लाठियां तोड़ डाली। मेरे पूरे शरीर का रंग काला पड़ गया। घाव इतने गहरे थे कि आज तक सही से चल नहीं सकता हूं। हालांकि अब रामलला की मूर्ति को देखकर अपने सारे कष्ट भूल चुका हूं, लेकिन इस बात से दुखी हूं कि मुझे अयोध्या नहीं बुलाया गया।

जयपुर में झोटवाड़ा के रहने वाले पवन शर्मा 1990 में 250 कार्यकर्ताओं के साथ रवाना हुए थे। पवन शर्मा अयोध्या तो नहीं जा सके। इन्हें और इनकी पूरी टीम को मथुरा स्टेशन पर ही रोक लिया गया था। इसके बाद इन्हें पास के नरौली (यूपी) थाने ले जाया गया। जहां कारसेवकों पर जमकर लाठियां चलाई गई। आगे पढ़िए पवन शर्मा की कहानी उन्हीं की जुबानी…

68 साल के पवन शर्मा 1999 से 2003 तक जयपुर नगर निगम के उप महापौर भी रह चुके हैं।

68 साल के पवन शर्मा 1999 से 2003 तक जयपुर नगर निगम के उप महापौर भी रह चुके हैं।

मुझे बहुत खुशी हो रही है कि भारत देश के लाखों कारसेवकों के आज दिल खुशी से भरे हुए हैं। आज सारे कारसेवकों का दिल आनंदित है कि हमारा दिया हुआ बलिदान काम आ रहा है। भगवान राम के भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है। इसे लेकर सबको बहुत खुशी है।

मैं उस वक्त बनीपार्क विधानसभा का मंडल में था। पार्टी की ओर से कहा गया कि आपको कारसेवा के लिए अयोध्या जाना है। हमारे साथ अन्य मंडलों के भी कार्यकर्ता थे। हम 1990 में जयपुर स्टेशन से 250 कार्यकर्ता कार सेवा के लिए रवाना हुए। हमें यह कहा गया था कि किसी भी हाल में कही रुकना नहीं है। पहले हम जयपुर के सांसद गिरधारी लाल भार्गव के नेतृत्व में जाने वाले थे। फिर अचानक उनको दिल्ली में पार्टी कार्यालय में बुला लिया गया। उनकी जगह आरएसएस के वरिष्ठ कार्यकर्ता दादा भाई जी के नेतृत्व में गए थे।

यहां से जैसे ही हम यूपी सीमा में दाखिल हुए मथुरा स्टेशन पर ट्रेन रोक दी गई। एक हजार पुलिसकर्मियों ने सारे कारसेवकों को ट्रेन से उतार लिया। ट्रेन से उतारने के बाद पीटते-पीटते हमें नरौली थाना ले जाया गया। उस वक्त थाने का इंचार्ज मुलायम सिंह यादव का साला रामनाथ यादव था। वो कुर्सी पर बैठकर आईपीएस ऑफिसर को आदेश दे रहा था। सर्दी का समय था। हमें बाहर लॉन में बैठाकर पीटा जा रहा था।

इतनी बुरी तरीके से मारा शरीर पर तीन लाठियां तोड़ दी
फिर कार्यकर्ताओं को पीटते हुए उसने पूछा की आपका नेतृत्व कौन कर रहा था। हमारा नेतृत्व दादा भाई कर रहे थे। जैसे ही उन पर लाठियां बरसने लगी। मैं उनको बचाने के लिए उनके ऊपर लेट गया। जब पुलिस वालों को यह दिखा की मैं उन्हें बचाने की कोशिश कर रहा हूं तो मारते मारते उन्होंने मेरे ऊपर तीन लाठियां तोड़ डाली। मेरे पूरे शरीर का रंग काला पड़ गया।

पवन शर्मा 25 दिनों तक मथुरा की जेल में रहे।

पवन शर्मा 25 दिनों तक मथुरा की जेल में रहे।

डायबिटीज पेशेंट जानने के बाद पुलिस ने पिटना बंद किया
पुलिस वालों ने मेरी अटैची चेक की। उसमें रखी मेरी डायबिटीज की दवाइयों को देखकर पुलिस के डंडे कम हुए। फिर हमें 25 दिनों तक मथुरा के जेल में रखा गया। सभी कार्यकर्ताओं को 23 दिन में छोड़ा गया। मुझे और मेरे साथ एक और कार्यकर्ता को दो दिन बाद छोड़ा। इस दौरान हमारे मन में यह दहशत बैठ गई थी कि कहीं हमारा एनकाउंटर न कर दे। फिर हमें रिहा कर दिया गया।

छह महीने बाद बैठ पाया
उस पिटाई की वजह से मेरे पूरे शरीर में खून के थक्के बन गए। इससे मेरे शरीर के निचले हिस्से ने काम करना बंद कर दिया। शरीर में बनी गांठ का डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया। मुझे 9 महीने तक अस्पताल में बेड पर रहना पड़ा। इस दौरान पार्टी के कई वरिष्ठ नेता हॉस्पिटल मिलने आते रहे। 6 महीने बाद मैं बैठ पाया। एक से डेढ़ साल तक बैसाखी के सहारे चला। आज भी मैं ढंग से चल नहीं सकता। मुझे सहारे कि आवश्यकता होती है।

पवन शर्मा ने बताया- उस वक्त इतना दर्द और पीड़ा हुई थी। हाल ही में रामलला की मूर्ति की तस्वीर सामने आई है। जब से मूर्ति देखी है, सारी तकलीफ दूर हो गई है। सरकार की ओर से सभी कारसेवकों को बुलाया गया है, लेकिन मुझे नहीं बुलाया गया। इसकी मन में पीड़ा है। बता दें कि पवन शर्मा 1999 से 2003 तक जयपुर नगर निगम के उप महापौर भी रह चुके हैं।

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