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मुझे जीने दो : कु, कविता चव्हाण

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*मुझे जीने दो *

आने दो मुझे भी इस संसार में
ना कर जांच तू डॉक्टर से
सिर्फ एक लड़की हु इसलिए
तेरी कोक से बोल रही हु माँ
में अंश हु बस तेरा

आँसु तेरे में पोछूँगी
काम में हात बटाऊँगी
सर तेरा न में कभी
किसी के सामने झुकने
दूंगी

एक बेटे की लगाकर आस
बेटी को न दे तू स्वर्गवास
रहूंगी हमेशा तेरे पास
ना लगाउंगी दिखावेका
मास

पापा की लाडली रहूंगी
शिकायत का मौका न दूंगी
मुझे भी हे मेरा जीवन जीना
इस खूबसूरत दुनिया को देखना

इस पाप की तू बन भागीदार
में बनुँगी लड़कि जिम्मेदार
खयाल रखूंगी इस परिवार
प्रेम करुँगी में अपरंपार

कु, कविता चव्हाण, जलगांव, महाराष्ट्र

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