
बीकानेर। राजस्थान के अब तक 41.5% विद्यार्थी ऑनलाइन माध्यम से बैक टू स्कूल एवं आओ घर में सीखे अभियान द्वारा जुड़ चुके हैं जिसके प्रथम माह की रिपोर्ट शिक्षा विभाग द्वारा जारी कर दी गई है ।
उल्लेखनीय है कि राज्य के सभी सरकारी एवं गैर सरकारी विद्यालयों में गत 7 जून से विद्यालयों में नवीन शैक्षणिक सत्र 2021-22 का प्रारम्भ किया गया है। कोविड-19 की परिस्थितियों के दृष्टिगत स्वास्थ्य विभाग एवं गृह विभाग की गाइडलाइन के अनुरूप नियमित कक्षा कक्ष शिक्षण अभी प्रारंभ नहीं किया जा सका हैं।जिसके तहत गत दिनांक 21.06. 2021 से “बैंक टू स्कूल” एवं “आओं घर में सीखें 2.0” कार्यक्रम का प्रारम्भ किया गया है। विद्यार्थियों को बैक टू स्कूल कार्यक्रम के अन्तर्गत
विविध कार्यवाही की जा रही है। बैक टू स्कूल कार्यक्रम के अंर्तगत विभाग द्वारा इस नवीन सत्र 2021-22 के प्रारम्भ से ही विद्यार्थियों के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए एवं लर्निंग गैप्स की क्षतिपूर्ति की दिशा में सुनियोजित व क्रमिक कार्ययोजना का निर्माण किया गया है, जिसके अनुरूप शिक्षण अधिगम की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जा सके।
विद्यार्थियों के अभ्यास के लिये होमवर्क वर्कशीट,व्हाट्सऐप क्विज,टीचर कॉलिंग (टीचर स्टूडेंट कनेक्ट), पाठ्य पुस्तकों का समय पर वितरण मिशन समर्थ (विशेष योग्यता वाले विद्यार्थियों के लिए विशेष शैक्षणिक प्रयास) किए जा रहे हैं।
परंतु अबतक का जुडाव देखें तो शिक्षण अधिगम संस्थितियों को संतोषजनक नही कहा जा सकता।
विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार शाला दर्पण मॉड्यूलर अब तक 96% विद्यालयों की का कार्य पूर्ण हो चुका है साथी सभी जिलों के 741499 4 में से 6411170 सहित 86% विद्यार्थियों की मैपिंग का सारे पूर्ण हो चुका है इस रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 41.5% विद्यार्थी व्हाट्सएप ग्रुप पर जुड़ चुके हैं परंतु यदि सभी जिलों की स्थिति का आकलन करें तो बांसवाड़ा डूंगरपुर करौली एवं प्रतापगढ़ जैसे जिलों में स्थिति अत्यधिक दयनीय है बांसवाड़ा में केवल 16. 2 प्रतिशत डूंगरपुर में 18. 6 प्रतिशत करौली में 24 पॉइंट 7 प्रतिशत तथा प्रतापगढ़ में लगभग 21% विद्यार्थी ऑनलाइन माध्यम से व्हाट्सएप ग्रुप जुड़ पाए जिसे देखकर ऑनलाइन अध्ययन की प्रभावशीलता पर संदेह उत्पन्न होता है ।
जबकि राजस्थान के जयपुर तथा हनुमानगढ़ में सर्वाधिक 57. 7 तथा सीकर में 56% से अधिक विद्यार्थी ऑनलाइन माध्यम से व्हाट्सएप ग्रुप पर जुड़े हुए हैं परंतु समेकित रूप से देखें तो ऑनलाइन शिक्षण की व्यवस्था कितनी प्रभावी दृष्टिगोचर नहीं होती ऐसे में इंतजार है कि कब से स्कूल पुनः प्रारंभ होंगे तथा शिक्षण अधिगम की सुनियोजित व्यवस्था प्रारंभ हो सकेगी?









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