राजस्थान पर्यटन और यूनेस्को द्वारा लोक और हस्तशिल्प कला का दो दिवसीय उत्सव मीर लोक संगीत और कालबेलिया नृत्य लहरियों के साथ आयोजित

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राजस्थान पर्यटन और यूनेस्को द्वारा लोक और हस्तशिल्प कला का दो दिवसीय उत्सव मीर लोक संगीत और कालबेलिया नृत्य लहरियों के साथ आयोजित

राजस्थान पर्यटन और यूनेस्को का लोक,हस्तशिल्प कला  उत्सव मीर संगीत और कालबेलिया नृत्य के साथ संपन्न


बीकानेर। बीकानेर की लोक संस्कृति एवं हस्तशिल्प के संरक्षण हेतु यूनेस्को तथा राजस्थान पर्यटन के संयुक्त तत्वावधान में बीकानेर हस्तशिल्प उत्सव रविंद्र रंगमंच में आयोजित हुआ।राजस्थान पर्यटन और यूनेस्को की पहल पर पश्चिमी राजस्थान की अमूर्त संस्कृति को मजबूत बनाने की दिशा यह पहल की गई है। बीकानेर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को इस उत्सव में प्रदर्शित किया गया है ताकि जिले की ग्रामीण संस्कृति और कला को बढ़ावा देते हुए इन्हें पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने में मदद मिले।
इस अवसर पर प्रथम दिवस के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बीएसएफ बीकानेर सेक्टर के डीआईजी पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि बीकानेर लोक संस्कृति और लोक कलाओं का लंबे समय से संवाहक रहा है बीकानेर के कई कलाकारों को पद्मश्री तक प्राप्त हुए हैं इस प्रकार के उत्सव न केवल पर्यटन को बढ़ावा देते हैं बल्कि यहां के नागरिकों के लिए भी रोजगार के साधन सुलभ करवाने में सहायक सिद्ध हैं।
कार्यक्रम मैनेजर अर्पण ठाकुर चक्रवर्ती ने बताया कि इस कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण मीर बसु द्वारा मीर लोक संगीत प्रदर्शन – जलाल राम मेघवाल और समूह द्वारा लोक संगीत प्रदर्शन – कालबेलिया गीत और नृत्य तथा सफी मोहम्मद और राशिद खान द्वारा लंगा संगीत का प्रदर्शन रहे। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन से उत्सव में पारंपरिक सांस्कृतिक रीति-रिवाज, रहन-सहन को सीधे – स्थानीय परिवेश में देखने-समझने का एक शानदार अवसर मिला है। लोक संस्कृति और यहां की विरासत की में रुचि रखने वालों को अनुभवी लोक कलाकारों के बीच पारंपरिक संस्कृति व कला को करीब से देखने-समझने का सुअवसर प्राप्त हुआ है।
अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वरिष्ठ उस्ता कलाकार मोहम्मद हनीफ ने कहा कि इस उत्सव में पश्चिमी राजस्थान की सभी लोक कलाएं शामिल हैं तथा इस प्रकार के आयोजनों से बीकानेर का केवल भारत ही नहीं अपितु विश्व स्तर पर भी मान सम्मान बढ़ा है।
उत्सव में उस्ता कला प्रदर्शित करने वाले आशीष ने कहा कि वे पिछले 9 साल से इस कार्य को कर रहे हैं तथा विभिन्न प्रकार की ज्वेलरी , क्लचेज इत्यादि में उस्ता कला का प्रयोग किया जा रहा है। उस्ता कलाकार दिव्या जैन ने बताया कि उन्होंने अपने विवाह के पश्चात इस कला को सीखा और अब वे इसके वर्कशॉप भी आयोजित करती हैं। इस अवसर पर जैसलमेर से आए भजन गायक जलाल राम ने बताया कि उन्होंने अपने पूर्वजों से इस कला को सीखा है तथा वे इस कला और आगे बढ़ाना चाहते हैं। इस कला के विषय में बात करते हुए उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से मालिक की आराधना और सब के कल्याण हेतु सुमिरन किया जा रहा है।

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