रावण के हाथ-पैर और पटाखे लूट भागे लोग:7 बार आग लगाने के बाद भी नहीं जला, नीचे गिरते ही टूट पड़े लोग

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रावण के हाथ-पैर और पटाखे लूट भागे लोग:7 बार आग लगाने के बाद भी नहीं जला, नीचे गिरते ही टूट पड़े लोग

दशहरा महापर्व पर बुधवार को प्रदेशभर में जगह-जगह रावण दहन किया गया। प्रदेश में कई जगह बारिश के दौरान रावण दहन में परेशानी का भी सामना करना पड़ा। लेकिन, कोटा में में अलग ही नजारा देखने को मिला। यहां लोग रावण के हाथ-पैर के साथ पटाखे लूट ले गए। मामला जिले सुल्तानपुर कस्बे का है।

दरअसल, सुल्तानपुर नगर पालिका की ओर से बुधवार को रावण दहन कार्यक्रम रखा गया था। इसके लिए 30 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार करवाया गया। लेकिन, इससे पहले दोपहर में हुई बारिश की वजह से पुतला पूरी तरह से भीग गया। रात 8 बजकर 40 मिनट पर विधिवत पूजा अर्चना के बाद रावण के पुतले में आग लगाई। पैरों में आग लगाने के बाद कुछ देर रावण जला। लेकिन, बारिश से गिला होने की वजह से वह जल नहीं पाया। कई बार प्रयास किए लेकिन नगर पालिका कर्मचारी सफल नहीं हुए। इस बीच जैसे ही पुतले को नीचे गिराया मैदान में खड़ी भीड़ रावण पर टूट पड़ी।

देखते ही देखते भीड़ रावण के पुतले को तोड़ने लगी। कई लोग रावण में लगे पटाखे तक लूट ले गए। भीड़ यहीं नहीं रूकी, वे पुतले में लगे रावण के हाथ-पैर तक ले गई। इस बीच मौजूद पुलिसकर्मियों ने भीड़ को वहां से हटाया।

नीचे गिरते ही लोग उसपर टूट पड़े। पटाखे लूटने के लिए रावण के पुतले के अंगों की छीना झपटी शुरू हो गई थी।

नीचे गिरते ही लोग उसपर टूट पड़े। पटाखे लूटने के लिए रावण के पुतले के अंगों की छीना झपटी शुरू हो गई थी।

7 बार आग लगाने की कोशिश, पेट्रोल भी छिड़का
इस दौरान नगर पालिक कर्मचारियों की ओर से आग लगाने के पूरे प्रयास किए गए लेकिन सफल नहीं हो पाए। आखिर फायर ब्रिगेड पर चढ़ पेट्रोल भी छिड़का गया लेकिन आग नहीं लग पाई। इसके बाद 9 बजकर 20 मिनट पर नीचे गिराना पड़ा। रावण में लगे पटाखों के लिए लोग पुतले पर टूट पड़े। करीब 20 मिनट तक लोगों के बीच छीना-झपट्‌टी भी हुई।

छह बार प्रयास के बाद भी जब आग नहीं लगी तो फायर ब्रिगेड पर चढ़ पेट्रोल छिड़का गया।

छह बार प्रयास के बाद भी जब आग नहीं लगी तो फायर ब्रिगेड पर चढ़ पेट्रोल छिड़का गया।

नगरपालिका EO जितेंद सिंह पारस ने बताया कि करीब 95 हजार की लागत से रावण का पुतला तैयार हुआ था। बारिश के कारण गिला हो गया था। हालांकि EO की ओर से दावा किया जा रहा है कि नीचे गिराने के बाद उसको जलाया गया, जबकि नगर पालिका कर्मचारियों को टूटा हुआ पुतला ले जाना पड़ा।

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