वक़्त : By Vandana Raj

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वक़्त

वक़्त को संभालते, जीते रहे उम्र सारी
जीयो कि, वक़्त की अपनी लय है जारी
जियो खुल के,कि खुशियाँ भी जाए वारी
वक्त की बिसात पे जन्दगी न जाए हारी

है समय बहुत बलशाली,रखता है झोली खाली
न जाओ पीछे आगे, साथ चलने मैं खुशहाली
वक्त हो जो मुश्किल तो , धरो धैर्य तुम बलशाली
हैं वक्त की कठपुतलियां सभी,बात है ये देखी भाली

समय की मांग है ,धनुर्धर धीर धर ओ वीर
कभी खुद पे भी लौट आते,औरो पे जो छोड़े तीर
तो छोड़ो बाण पुष्पो के, की लौटे भी तो न हो पीर
है समय अभी रोक लो युद्ध यह,जिंदा रहने दो ज़मीर

दिलों के दरम्यां दीवारें नफरतो की, खींची दी किसने लकीर
मस्त मौला अकेला घूमता है,हमसे अच्छा तो कोई फकीर
कैद हैं अपने ही अहम में, झूठे दम्भ की पहने हुए जंजीर
मिटा के बैर सारे ,मिल चलो,पेश हो जँहा में उम्दा नज़ीर

वक़्त भी बदलता है मौसमों की तर्ज पर वंदना
आज खिले हैं चमन में फूल, कल बारिश है होने वाली
कश्ती डुबाने से बेहतर है ,बात एकाकी चलने वाली
थमेगा यह भंवर भी ,नेक इरादों की है नाव बनने वाली

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वंदना राज

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