*शिक्षा मंत्री के सामने टीचर का हंगामा:चिल्लाने लगा; बोला- ब्यूरोक्रेट्स और कल्ला माइनॉरिटी के खिलाफ काम कर रहे*
राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में शिक्षा मंत्री डॉ. बीडी कल्ला के सामने ही हंगामा हो गया। कल्ला के संबोधन के दौरान उर्दू शिक्षक संघ के अध्यक्ष अमीन कायमखानी ने मंच पर जाकर प्राथमिक शिक्षा में उर्दू शिक्षक लगाने की मांग रखी। रिस्पॉन्स नहीं मिला तो सीट पर खड़े होकर मुख्यमंत्री की बजट घोषणा की पालना करवाने की मांग को लेकर चिल्लाना शुरू कर दिया।
एकाएक हुए हंगामे से शिक्षा मंत्री कल्ला, राज्यमंत्री जाहिदा खान और राज्यमंत्री राजेन्द्र सिंह यादव चौंक गए। वहां मौजूद स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों में भी कार्यक्रम बिगड़ने के डर से खलबली मच गई। हंगामा बढ़ते देख पुलिस ने कायमखानी को हिरासत में लिया और अशोक नगर थाने ले गई। समारोह जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में सोमवार को आयोजित हुआ।
शिक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की तारीफ करते हुए मौजूदा सरकार में शिक्षा का स्तर सुधरने की बात कही। इस बीच उर्दू शिक्षक संघ के अध्यक्ष कायमखानी ने हंगामा करते हुए कहा- मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की 2021 की बजट घोषणा के बावजूद प्राथमिक स्तर की उर्दू शिक्षा बहाल क्यों नहीं की गई है ?सीएम ने कहा था- किसी स्कूल में उर्दू के 20 बच्चे नामांकित होंगे यानी पढ़ना चाहेंगे, तो उन प्राथमिक स्कूलों में उर्दू शिक्षकों के पद क्रिएट कर शिक्षक लगाए जाएंगे। फिर भी प्राथमिक स्कूलों में एक भी उर्दू शिक्षक नहीं लगाया गया है। पहली से 5वीं क्लास तक बच्चे उर्दू शिक्षा से दूर हैं, जबकि यह हमारी भाषा है।
हंगामा बढ़ते देखकर उन्हें मौजूद लोग पकड़कर सभागार से बाहर ले गए। बाहर भी काफी देर तक कायमखानी हंगामा करते रहे। उन्होंने मंत्री कल्ला और ब्यूरोक्रेट्स पर सरकार और माइनॉरिटी के खिलाफ काम करने के आरोप लगाया। यहां तक कहा कि सारे ब्यूरोक्रेट्स संघी हैं।
*मंत्री और ब्यूरोक्रेट्स सरकार के खिलाफ काम कर रहे*
अमीन कायमखानी ने बातचीत में कहा- आज शिक्षक सम्मान समारोह में जब शिक्षा मंत्री कामों का बखान कर रहे थे, तो मैंने मंत्री बीडी कल्ला से कहा- उर्दू तालीम से संबंधित मुख्यमंत्री की बजट घोषणा की पालना करवा दो। इस पर मुझे बीकानेर का साजिद कुरैशी धक्का मारकर बिड़ला ऑडिटोरियम से बाहर ले गया। बदसलूकी की गई है। वो टीचर नहीं है, कांग्रेस पार्टी का कार्यकर्ता है। जिस तरह का व्यवहार किया गया इससे उर्दू शिक्षकों में आक्रोश है।
मैं ऑन ड्यूटी था, अपनी मांग रख रहा था। तब मंत्री के इशारे से उनके विधानसभा क्षेत्र और बीकानेर से बाहरी गुंडों ने मुझ पर हमला किया है। ऑडिटोरियम से बाहर निकाला है। मंत्री और उनके ब्यूरोक्रेट्स ने गलत रवैया अपना रखा है। सरकार की गुड गवर्नेंस की जगह माइनॉरिटी में गलत मैसेज देना चाहते हैं। ये सरकार के खिलाफ काम कर रहे हैं। कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद माइनॉरिटी को कांग्रेस से नाराज करने का काम कर रहे हैं।
*20 बच्चे होने पर प्राथमिक स्कूल में उर्दू शिक्षक लगाना चाहिए*
कायमखानी ने कहा- मैंने कहा कि यह मुख्यमंत्री की 2021-22 की बिन्दु संख्या 14 की बजट घोषणा है। सीएम ने कहा था- 20 बच्चे प्राथमिक स्तर पर उर्दू शिक्षा लेने के लिए नामांकित होंगे तो वहां प्राथमिक स्कूलों में उर्दू शिक्षकों के पद सृजित किए जाएंगे। आज 2022-23 सत्र चल रहा है, लेकिन उर्दू तालीम नहीं दी जा रही है और शिक्षकों के पद नहीं भरे। 2022 में बोर्ड परीक्षा में उर्दू के एग्जाम हुए हैं, लेकिन प्राथमिक शिक्षा में उर्दू नहीं है।
राजस्थान में करीब 65 हजार स्कूल हैं। 10 से 15 हजार स्कूलों में उर्दू शिक्षकों की डिमांड है। यह संविधान और नियमों में है कि राजस्थान में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में हिन्दी के अलावा पंजाबी, उर्दू, सिन्धी और गुजराती भाषाएं हैं। जबकि संस्कृत भाषा इसमें शामिल नहीं है। राइट टू एजुकेशन और भारत के संविधान में उर्दू पढ़ाने का प्रावधान है।
*संस्कृत पढ़ाई जा रही है, उर्दू नहीं*
कायमखानी ने कहा- संस्कृत शिक्षा निदेशालय की स्कूल में सब्जेक्ट के तौर पर संस्कृत विषय पढ़ाया जा रहा है। लेवल-1 पदों में संस्कृत का प्रावधान है, लेकिन राजस्थान में उर्दू का एक भी लेवल-1 पद सृजित नहीं किया गया।
सरकारी स्कूलों में 1-5 वीं क्लास में उर्दू की पढ़ाई नहीं करवाई जा रही है। जबकि 6 से 10 वीं तक तृतीय भाषा पढ़ाई जा रही है। उसमें भी मैपिंग में भेदभाव हो रहा है। तृतीय भाषा के 444 पद बढ़ाकर 1000 पद करने की घोषणा की गई थी, लेकिन सिर्फ पद अलॉटमेंट कर खानापूर्ति की गई है। नियुक्तियां नहीं दी गई हैं। गेस्ट फैकल्टी के तौर पर भी उर्दू शिक्षक नहीं लगाए जा रहे हैं।














Add Comment