शिक्षिका सुनीता गुलाटी के महामहिम द्रोपदी मुर्मू से सम्मानित होने पर बीकानेर उत्साह से लबरेज

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शिक्षिका सुनीता गुलाटी के महामहिम द्रोपदी मुर्मू से सम्मानित होने पर बीकानेर उत्साह से लबरेज

शिक्षिका सुनीता गुलाटी के महामहिम द्रोपदी मुर्मू से सम्मानित होने पर बीकानेर उत्साह से लबरेज


बीकानेर।कल शिक्षक दिवस के अवसर पर भारत सरकार द्वारा 46 शिक्षकों के सम्मान में राजस्थान के बीकानेर से राजकीय उच्च माध्यमिक मूक बधिर विद्यालय में पद स्थापित शिक्षिका सुनीता गुलाटी भी शामिल है । यह सम्मान मिलने पर उन्होंने बताया कि उनके द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में कई नवाचार उनके इस पुरस्कार के आधार बने है। उन्होंने बताया कि यह नवाचार उनके द्वारा इन दिव्यांग बच्चों को दृष्टिगत रखकर किए गए है ।
जिससे वे दिव्यांग बच्चों की आवाज बनी तथा उन्होंने बीकानेर का राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के क्षेत्र में परचम लहराया है। गुरु ही है जो व्यक्ति का गोविंद से परिचय करवाता है ऐसी ही बीकानेर इस शिक्षिका ने दिव्यांग बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का जो कार्य किया है उसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
जब सुनीता के शिक्षक दिवस पर राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित होने की सूचना बीकानेर पहुंची तो पूरा बीकानेर उत्साह से लबरेज हो गया।
बीकानेर के राजकीय उच्च माध्यमिक मूकबधिर विद्यालय में पदस्थापित विज्ञान शिक्षिका सुनीता गुलाटी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी है। विशेष विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि उनके द्वारा मूक बधिर एवं दृष्टिहीन बच्चों के लिए ई कंटेंट तथा ई कॉमिक्स का भी निर्माण किया गया है। साथ ही इन नवाचारों के माध्यम से उनका प्रयास है कि इन बच्चों को विज्ञान के नवाचारों से जोड़ा जा सके। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी उनका यही उद्देश्य रहेगा कि वे इस प्रकार के बच्चों को अधिक से अधिक मात्रा में नवाचार करवा कर विज्ञान शिक्षण को अधिक रूचिकर बना सके तथा उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित कर सकें।
शिक्षा निदेशक गौरव अग्रवाल ने बताया कि शिक्षक दिवस पर सम्मानित होने वाले शिक्षकों में इसमें देशभर के विभिन्न राज्यों से 46 शिक्षकों का चयन किया गया है जिनमे शामिल राजकीय उच्च माध्यमिक मूक बधिर विद्यालय में विज्ञान शिक्षिका के पद पर कार्यरत सुनीता गुलाटी मूक बधिर बच्चों के साथ विज्ञान शिक्षण के नवाचार के तहत कार्य कर रही हैं। उन्होंने इन विशेष बच्चों को 2017 से लगातार राज्य स्तरीय विज्ञान प्रतियोगिता एवं राष्ट्रीय स्तरीय इंस्पायर अवार्ड में भाग दिलवाया और लगातार 4 सालों से यह प्रतियोगिताएं जीती हैं। इस विशेष विद्यालय में इन विशेष बच्चों द्वारा बनाई गई विज्ञान लैब है जिसमें इन बच्चों द्वारा कुछ चित्र बनाए गए हैं इसके अतिरिक्त विद्यालय की एक छात्रा ने ओलंपियाड में भी अपना स्थान प्राप्त किया है और रजत पदक प्राप्त कर पूरे देश को गौरवान्वित किया है । मूक बधिर बच्चो के लिए ऑनलाइन और नवाचार युक्त विडियोज बनाये हैं। इसके अतिरिक्त शिक्षण मॉड्यूल्स और दीक्षा पोर्टल पर ई कंटेंट भी तैयार किया है। इसके साथ ही नेत्रहीन विद्यार्थियों के लिए भी ऑडियो बुक के निर्माण का भी कार्य किया है। वे लगातार दस सालों से इस प्रकार के ट्रेनिंग प्रोग्राम में भाग ले रही है । अपने हौसले की कहानी को बयान करती है सुनीता स्वयं कहती हैं कि मूक बधिर बच्चों से वार्तालाप करना इतना आसान नहीं था परंतु इन बच्चों के साथ उनके जुड़ाव में उनके लिए यह राह आसान कर दी है। एक मध्यमवर्गीय परिवार की सुनीता ने दिव्यांग बच्चों के लिए जो राह खोली है उसने न केवल उन्हें गौरवान्वित किया है बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान के बीकानेर को भी अपनी पहचान दी है उनके जज्बे और शिक्षण के प्रति इस प्रेम ने इन बालकों की जीवन को पूरी तरह से बदल दिया है।

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