श्री जैन पब्लिक स्कूल:भारतीय भाषा समर कैम्प-2025:नेहरू जी की पुण्यतिथि पर दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि..

FacebookWhatsAppTelegramLinkedInXPrintCopy LinkGoogle TranslateGmailThreadsShare


बीकानेर। श्री जैन पब्लिक स्कूल, बीकानेर में नई शिक्षा नीति 2020 के तहत “भारतीय भाषा समर कैम्प 2025” का भव्य एवं उत्साहपूर्ण आयोजन किया गया। यह अवसर और भी विशेष बन गया जब बच्चों ने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जी की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। बच्चों ने उनके बाल-प्रेम, शिक्षा के प्रति समर्पण और प्रगतिशील विचारों को आत्मसात किया।
इस कैम्प का मुख्य उद्देश्य था विद्यार्थियों के भाषायी कौशल, सामाजिक चेतना, रचनात्मकता और आत्मविश्वास का बहुआयामी विकास। शिविर के प्रत्येक दिन को एक विशेष थीम से जोड़ा गया, जिसके अंतर्गत लोकगीत एवं नृत्य, फायरलेस कुकिंग, साइंस फन, जंगल सफारी, रोबोटिक्स, पारंपरिक खेल, पूल पार्टी एवं भारत दर्शन जैसी रचनात्मक व मनोरंजक गतिविधियाँ आयोजित की गईं।
विद्यार्थियों ने विभिन्न भारतीय भाषाओं में अभिवादन, क्षेत्रीय व्यंजनों की विधियाँ, तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विचारों को भी आत्मसात किया। प्रत्येक दिन स्टार ऑफ द डे विद्यार्थी का चयन कर उसे विशेष रूप से सम्मानित किया गया। अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी और सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ शिविर की सफलता में प्रेरक रहीं।
समापन समारोह के अवसर पर विद्यालय अध्यक्ष श्री विजय कुमार जी कोचर ने विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान करते हुए कहा, “ऐसे व्यावहारिक एवं अनुभव आधारित शिविर बच्चों के समग्र व्यक्तित्व विकास में अत्यंत सहायक सिद्ध होते हैं।”
विद्यालय के सचिव सीए माणक जी कोचर ने कहा, ”जीवन कौशलों के विकास हेतु ऐसे समर कैम्प्स का आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण है।“
विद्यालय की सीईओ श्रीमती सीमा जैन ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ प्रेषित की”
प्रधानाचार्या श्रीमती रूपश्री सिपानी ने विद्यार्थियों की सहभागिता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा “यह अनुभव निश्चित रूप से विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर और जागरूक नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करेगा।”
विद्यालय परिवार ने इस अवसर पर पंडित नेहरू जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके शिक्षा और बाल-कल्याण संबंधी विचारों को स्मरण किया। यह आयोजन न केवल ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ, अपितु बच्चों में भारतीय भाषाओं, परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति गहरी आस्था एवं सम्मान भी उत्पन्न हुआ।

FacebookWhatsAppTelegramLinkedInXPrintCopy LinkGoogle TranslateGmailThreadsShare
Categories:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!